Samastipur News:अल्ताफ रजा कभी श्रोताओं को रंगीन किया तो कभी किया गमगीन

प्रभात खबर अखबार के सुर-संध्या कार्यक्रम की शुरुआत प्रसिद्ध गजल गायक अल्ताफ राजा ने रिमिक्स से किया.

समस्तीपुर : प्रभात खबर अखबार के सुर-संध्या कार्यक्रम की शुरुआत प्रसिद्ध गजल गायक अल्ताफ राजा ने रिमिक्स से किया. इस दौरान जैसे ही उन्होंने पर्दा है पर्दा पर्दानशी को बेपर्दा न कर दूं तो राजा मेरा नाम नहीं… के बोल शुरू किये ऑडियेंस में गजब का उत्साह भर गया. पूरा पटेल मैदान तालियों से गूंज उठा. अल्ताफ राजा ने तालियों की गूंज पर दर्शकों का आभार प्रकट किया. उन्होंने कहा कि आप सभी इसी तरह कार्यक्रम में हौसला अफजाई करते रहें. पूरे कार्यक्रम में अल्ताफ रजा कभी श्रोताओं को रंगीन किया तो कभी गमगीन किया. खुशी और गम के नगमों का सिलसिला जारी रहा. पटेल मैदान में जुटी हजारों की भीड़ सुरमयी संध्या में बड़े ही संजीदकी से उनकी गजलों व गीतों के हर लाइन को सुनते रहे. कभी तालियां बजती को कभी पूरा ऑडियेंस पूरी तरह शांत होकर बोल सुनने लग जाते. श्रोताओं का भाव पूरी तरह उनके गजल व गीत के भाव से तारत्यमता बनाये हुये था. कार्यक्रम में हर उम्र के लोग शामिल हुये थे. पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं की संख्या भी बहुत अधिक थी. वहीं उत्साही युवा भी अपने जोश को लगाम लगाकर संगीत में रमे हुये थे.

पर्दा है पर्दा पर्दानशी को बेपर्दा न कर दूं तो राजा मेरा नाम नहीं …..

अल्ताफ रजा ने एक के बाद एक गजल व गीतों से ऐसा समां बांधा था कि लोग घड़ी की सूई की ओर देखना भूल गये थे. मानों वे समय को ठहर जाने के लिये कह रहे हों. रिमिक्स की शुरुआत उन्होंने अपने प्रसिद्ध गजल आवारा हवा का झोंका हूं किया. इस बोल शुरू होते ही धमाल मच गया. उसके बाद उन्होंने जैसे ही मेरी जिंदगानी है मेरी महबूबा, आने से उसके आये बहार गाना शुरू किया दर्शकों ने खूब मजे लिया. उसके बाद मेरे ख्वाबों की शहजादी तेरा दामन न छोडूगा, मैं हर चिलमन को तोडूुगा शुरू किया. युवा श्रोताओं का मन उत्साह से भर गया. बीच-बीच में उन्होंने डॉयलॉग बोलकर माहौल को बदलते भी रहे. कहा कि हमारे दोस्तों में कोई दुश्मन हो भी सकता है, ये अंग्रेजी दवाएं हैं, रियक्शन हो भी सकता है. कहा कि जब तुम आशिक बदलती रहती हो तो चार हफ्ते में किसी मासूम से मेरा कनेक्शन हो सकता. कहा हमही अकेले नहीं जागते रातों में उन्हें भी नींद बड़ी मुश्चिकल से आता.फिर उन्होंने अपने पुराने अंदाज में हम वाे दिवाने हैं जो ताजा हवा लेते हैं, खिड़कियां खोलके मौसम का मजा लेते हैं. बीच-बीच में उन्होंने फिल्मी गानों के बोल से भी माहौल को बदलते रहे. उन्होंने दिल सच्चा और चेहरा झूठा, चेहरों ने लाखों को लूटा, ये शोखियां ये बागपन तो तुम में है कहीं नहीं, मैं मेरी आंखों में पा गया दो जहां, हमे तो लूट लिया हुस्न वालों ने…, काले-काले बालों के गोरे-गोरे गालों खुदा अगर सवाल करेगा कयामत में हम तो लूट गये शराफत में…, उसके बाद उन्होंने गम के नगमें बेवफा तेरा मासूम तेरा चेहरा भूल जाने के काबिल नहीं है. तु बहुत खूबसूरत है, लेकिन दिल लगाने के काबिल नहीं. गम की धूप में दिल की हसरतें न जल जाये, वरना बूढ़े भी जवानी की दुआ मांगेंगे.इन नगमों के साथ शांत हुये माहौल में उन्होंने अचानक से मैंने छोड़ा जमाना तेरे साथ हो गयी, इश्क और प्यार का मजा लीजिये थोड़ा इंतजार का मजा लीजिये… गाकर लाेगों को झूमा दिया.

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Author: PREM KUMAR

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