कम बारिश की आशंका पर किसानों के लिए एडवाइजरी जारी, जानें धान, तिल और दलहन की वैज्ञानिक खेती

समस्तीपुर के किसानों के लिए कम बारिश की संभावना को देखते हुए कृषि विशेषज्ञों ने महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है. धान की रोपाई के साथ-साथ तिल और दलहनी फसलों की वैज्ञानिक खेती की जानकारी पाएं.

Samastipur News: मौसम के बदलते मिजाज और मानसून के शुरुआती चरण में कम बारिश की संभावना को देखते हुए कृषि विशेषज्ञों ने किसानों के लिए विस्तृत एडवाइजरी जारी की है. इसमें धान की रोपाई के साथ-साथ कम पानी वाली वैकल्पिक फसलों की वैज्ञानिक खेती के बारे में महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं.

सिंचाई की सुविधा वाले किसान शुरू करें धान की रोपाई

विशेषज्ञों के अनुसार जिन किसानों के पास सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था है, वे 21 से 25 दिन पुराने धान के बिचड़ों की रोपाई शुरू कर सकते हैं.

खेत की अंतिम तैयारी के समय प्रति हेक्टेयर 25-30 किलोग्राम नाइट्रोजन, 40 किलोग्राम फॉस्फोरस, 30 किलोग्राम पोटाश और 25 किलोग्राम जिंक सल्फेट का प्रयोग करने की सलाह दी गई है.

ऊंची जमीन पर तिल की खेती रहेगा बेहतर विकल्प

जिन क्षेत्रों में पानी की कमी के कारण धान की खेती संभव नहीं है, वहां किसानों को तिल की खेती अपनाने की सलाह दी गई है. तिल की बुआई जुलाई के मध्य तक की जा सकती है.

विशेषज्ञों ने कृष्णा, कालिका, कांके सफेद और प्रगति (एमटी-75) किस्मों की खेती की अनुशंसा की है. बुआई से पहले बीजों का थिरम (2 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज) से उपचार करने की सलाह दी गई है.

तिल की खेती में कतार से कतार की दूरी 30 सेंटीमीटर तथा पौधे से पौधे की दूरी 10 से 15 सेंटीमीटर रखने की सलाह दी गई है. खेत में 60 क्विंटल सड़ी गोबर की खाद के साथ 40 किलोग्राम नाइट्रोजन, 20 किलोग्राम फॉस्फोरस और 20 किलोग्राम पोटाश का उपयोग करने को कहा गया है.

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उड़द की खेती के लिए अपनाएं वैज्ञानिक तरीका

विशेषज्ञों ने बताया कि दलहनी फसलों की बुआई के लिए भी यह उपयुक्त समय है. किसानों को उड़द की टी-9, पंत यू-19, पंत उड़द-31, उत्तरा और नवीन किस्मों की खेती करने की सलाह दी गई है.

प्रति हेक्टेयर 20 से 25 किलोग्राम बीज का उपयोग करें. बुआई से पहले बीजों को कार्बेन्डाजिम, क्लोरपाइरीफॉस और राइजोबियम कल्चर से उपचारित करने की सलाह दी गई है.

उर्वरक के रूप में प्रति हेक्टेयर 20 किलोग्राम नाइट्रोजन, 45 किलोग्राम फॉस्फोरस, 20 किलोग्राम पोटाश और 20 किलोग्राम सल्फर का प्रयोग करें.

अरहर की बुआई से पहले जल निकासी पर दें विशेष ध्यान

विशेषज्ञों के अनुसार ऊंची एवं अच्छी जल निकासी वाली जमीन अरहर की खेती के लिए उपयुक्त है. किसानों को बहार, पूसा-9, राजेंद्र अरहर-1 और राजेंद्र अरहर-2 किस्मों की खेती करने की सलाह दी गई है.

प्रति हेक्टेयर 18 से 20 किलोग्राम बीज का प्रयोग करें. सामान्य बुआई में कतार से कतार 60 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 20 सेंटीमीटर रखें. अंतरवर्ती खेती में कतारों की दूरी 75 सेंटीमीटर रखने की सलाह दी गई है.

बीजों को कार्बेन्डाजिम, क्लोरपाइरीफॉस और राइजोबियम कल्चर से उपचारित करने के बाद ही बुआई करें. साथ ही खेत में बेहतर जल निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित करें और संभव हो तो मेड़ों या उठी हुई क्यारियों पर ही बुआई करें.


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लेखक के बारे में

Author: Girija nandan sharma

Published by: Sarfaraz Ahmad

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