सहरसा से विनय कुमार मिश्र की रिपोर्ट
Saharsa News: सहरसा स्थित स्नातकोत्तर केंद्र में रविवार को मैथिली साहित्य के दो मूर्धन्य विद्वानों डॉ मनोरंजन झा और डॉ जयानंद झा के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तृत परिसंवाद आयोजित किया गया. संस्कृति मंत्रालय की साहित्य अकादेमी और परमहंस लक्ष्मीनाथ गोसाई चेयर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में साहित्यकारों, शिक्षाविदों, पत्रकारों और शोधार्थियों ने दोनों विद्वानों के साहित्यिक अवदान पर विस्तार से चर्चा की. इस दौरान ‘ईंटउघनी’ और ‘हेरायल दिवस’ पुस्तकों का लोकार्पण भी किया गया.
दीप प्रज्ज्वलन के साथ शुरू हुआ साहित्यिक आयोजन
स्नातकोत्तर केंद्र परिसर में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ. मंच पर मौजूद शिक्षाविदों और विद्वानों ने मैथिली भाषा और साहित्य की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया.
कार्यक्रम में सेवानिवृत्त मैथिली साहित्यकार डॉ कुलानंद झा ने बीज भाषण प्रस्तुत किया. वहीं कार्यक्रम का संचालन किसलय कृष्ण ने किया और धन्यवाद ज्ञापन डॉ अरुण कुमार सिंह ने किया.
डॉ मनोरंजन झा को जनपक्षधर साहित्यकार के रूप में किया याद
परिसंवाद के प्रथम सत्र की अध्यक्षता प्रो भवानंद मिश्र ने की. इस दौरान मैथिली के विद्वान धर्मव्रत चौधरी और दीपिका ने अपने आलेख प्रस्तुत किए. सुधासंध्या ने डॉ मनोरंजन झा के व्यक्तित्व पर चर्चा करते हुए उनके गीत, कविता, नाटक, उपन्यास, निबंध और आलोचना लेखन पर प्रकाश डाला.
वक्ताओं ने कहा कि डॉ मनोरंजन झा केवल साहित्यकार नहीं थे, बल्कि वे समाज के वंचित और गरीब वर्ग की आवाज भी थे. उन्होंने अपने लेखन के माध्यम से सत्ता के भ्रष्टाचार और सामाजिक बुराइयों के खिलाफ निर्भीकता से आवाज उठायी. वक्ताओं ने यह भी कहा कि उन्होंने विश्वविद्यालय परिवार और शिक्षकों की समस्याओं के समाधान के लिए लगातार संघर्ष किया, जिसके कारण वे लंबे समय तक सीनेट सदस्य रहे.
डॉ जयानंद झा की बहुभाषी प्रतिभा पर हुई चर्चा
दूसरे सत्र की अध्यक्षता डॉ लक्ष्मण झा सागर ने की. इस सत्र में प्रसिद्ध नाट्यकार प्रकाश झा, पत्रकार आलोक झा और डॉ संजय वशिष्ठ ने डॉ जयानंद झा के साहित्यिक और पत्रकारिता योगदान पर विस्तार से चर्चा की.
वक्ताओं ने कहा कि डॉ जयानंद झा मैथिली साहित्य के मूर्धन्य विद्वान, चिंतक और सशक्त पत्रकार थे. वे हिंदी, अंग्रेजी, बंगला, संस्कृत और मैथिली भाषा के गहरे जानकार थे. उनके लेखन और पत्रकारिता ने समाज, संस्कृति और भाषा को नई दिशा देने का कार्य किया.
Saharsa News: पुस्तकों का हुआ लोकार्पण, नई पीढ़ी को मिला संदेश
कार्यक्रम के दौरान ‘ईंटउघनी’ और ‘हेरायल दिवस’ पुस्तकों का विधिवत लोकार्पण भी किया गया. वक्ताओं ने कहा कि ऐसे साहित्यिक आयोजन केवल अतीत को याद करने के लिए नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी भाषा, संस्कृति और साहित्यिक विरासत से जोड़ने के लिए भी जरूरी हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए विश्वविद्यालयों और साहित्यिक संस्थाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है.
बड़ी संख्या में पहुंचे साहित्य प्रेमी
इस अवसर पर स्नातकोत्तर केंद्र के विभिन्न विभागों के शिक्षक, शोधार्थी, छात्र और साहित्य प्रेमी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे.
मौके पर डॉ रमाकांत रमण, डॉ लाला प्रवीण कुमार सिन्हा, डॉ सिद्धेश्वर कश्यप, डॉ जैनेंद्र, डॉ अणिमा, डॉ रंजीत सिंह, गोपाल झा, नवल मिश्र, विनोद कुमार झा, विनय ठाकुर, प्रांजल सुमन सहित अनेक लोग मौजूद थे.
इसे भी पढ़ें: बिहार के इस जिले में बनेगा 800 MW का नया पावर प्लांट, बिजली संकट होगा दूर, जानें पूरा प्लान
बिहार में अगले 72 घंटे मूसलाधार बारिश और वज्रपात का अलर्ट, पटना समेत कई जिलों में बिगड़ेगा मौसम
