धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की कही बात सहरसा . जिले के बनमा इटहरी प्रखंड के महारस गांव स्थित प्राचीन मां कात्यायनी मंदिर के सर्वांगीण विकास एवं सौंदर्यीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गयी है. जिलाधिकारी दीपेश कुमार ने पर्यटन विभाग बिहार के निदेशक को पत्र भेजकर मंदिर को राज्य की पर्यटन योजनाओं में शामिल करते इसके समग्र विकास की मांग की है. अंचलाधिकारी के रिपोर्ट के आलोक में जिलाधिकारी ने अपने पत्र में कहा है कि मां कात्यायनी मंदिर क्षेत्र की प्राचीन धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र है. यह मंदिर ना केवल सहरसा बल्कि आसपास के जिलों एवं नेपाल से आने वाले श्रद्धालुओं की भी प्रमुख आस्था का केंद्र है. प्रत्येक सोमवार व शुक्रवार को यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं. वहीं शारदीय नवरात्रि के छठे दिन आयोजित होने वाले विशाल धार्मिक मेले में हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं. धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व के बावजूद मंदिर परिसर में पर्यटकों एवं श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक आधारभूत सुविधाओं का अभाव है. इसलिए मंदिर परिसर का जीर्णोद्धार, सौंदर्यीकरण एवं पर्यटन अवसंरचना का विकास आवश्यक है. जिससे श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें एवं इस स्थल को बिहार के प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा सके. अंचलधिकारी, बनमा इटहरी द्वारा उपलब्ध कराए गये प्रतिवेदन के अनुसार मंदिर की भूमि थाना संख्या 310, खाता संख्या 532, खेसरा संख्या 2212, रकबा 72 डिसमिल, प्रकृति-अनाबाद सर्वसाधारण में दर्ज है. राजस्व कर्मचारी व अंचल अमीन द्वारा स्थल सत्यापन कर इसकी रिपोर्ट भी उपलब्ध करा दी गयी है. जिलाधिकारी ने पर्यटन विभाग से अनुरोध किया है कि मंदिर को उपयुक्त पर्यटन योजना के तहत शामिल कर प्रवेश द्वार, परिसर विकास, पथमार्ग, प्रकाश व्यवस्था, पेयजल, शौचालय, पार्किंग, हरितीकरण, सूचना पट्ट, बैठने की व्यवस्था सहित अन्य आवश्यक पर्यटन सुविधाओं का विकास कराया जाय. फोटो - सहरसा - मां कत्यायनी मंदिर.
मां कात्यायनी मंदिर के विकास के लिए डीएम ने पर्यटन विभाग को भेजा प्रस्ताव
सहरसा के प्राचीन मां कात्यायनी मंदिर को पर्यटन केंद्र बनाने के लिए डीएम ने पर्यटन विभाग को प्रस्ताव भेजा है। मंदिर के सौंदर्यीकरण की योजना तैयार की गई है।

फोटो - सहरसा - मां कत्यायनी मंदिर | Prabhat Khabar Network