परिवार के आचरण से बच्चों को मिलता है संस्कार

दिनारा : प्रखंड के दुर्गाधाम शक्तिपीठ पोंगाढ़ी में चल रहे श्री सहस्त्रचंडी महादिव्य यज्ञ के अंतिम दिन अयोध्या से पहुंची आचार्या जया भारती तिवारी ने हिरण्य कश्यप, प्रह्लाद व नारायण की कथा सुनाई. इस दौरान कहा कि भगवान कृष्ण जब युद्ध में शांति प्रस्ताव लेकर दुर्योधन के समक्ष पहुंचे तो दुर्योधन ने ऊंची आवाज में […]

दिनारा : प्रखंड के दुर्गाधाम शक्तिपीठ पोंगाढ़ी में चल रहे श्री सहस्त्रचंडी महादिव्य यज्ञ के अंतिम दिन अयोध्या से पहुंची आचार्या जया भारती तिवारी ने हिरण्य कश्यप, प्रह्लाद व नारायण की कथा सुनाई. इस दौरान कहा कि भगवान कृष्ण जब युद्ध में शांति प्रस्ताव लेकर दुर्योधन के समक्ष पहुंचे तो दुर्योधन ने ऊंची आवाज में भगवान से बात की. लेकिन बाद में जब उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ, तो उन्होंने भगवान कृष्ण को अपने घर चल कर भोजन करने का आग्रह किया.

अभिमान से कहा कि उनके लिए 56 भोग बनाये गये है, लेकिन भगवान कृष्ण को पता था कि दुर्योद्धन के मन में भोजन कराने का भाव नहीं है. केवल औपचारिकता पूरी कर रहा है. इस लिए भगवान कृष्ण ने दुर्योधन के 56 भोग त्याग कर विदुर के घर सूखी साग खाई. विदुरानी कृष्ण को देख कर इतनी भाव से भर गयी कि केले के छिलके कृष्ण को खिला दिये व गुदा नीचे फेंक दिया. लेकिन, विदुरानी के भाव देख कर कृष्ण ने प्रेम से छिलके भी ग्रहण कर लिए.
इस लिए भाव अच्छे होने चाहिए, क्योंकि भगवान भाव के भूखे है. उन्होंने कहा कि जब भक्ति प्रबल हो जाती है और भक्त सच्चे मन से भगवान को पुकारते हैं, तो भगवान को आना ही पड़ता है. सुश्री जया ने कहा कि परवरिश से संस्कार नहीं मिलते, परिवार के आचरण से संस्कार मिलते हैं. इसलिए अपना आचरण अच्छा रखे तो बच्चों का भी आचरण उत्तम रहेगा.

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