SBI कर्मचारियों की 25-26 मई को देशव्यापी हड़ताल, बिहार में संशय

SBI NEWS: स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के कर्मचारी 25–26 मई को देशव्यापी हड़ताल पर रहेंगे, जिसे ऑल इंडिया स्टेट बैंक ऑफ इंडिया स्टाफ फेडरेशन ने 16 सूत्रीय मांगों को लेकर घोषित किया है। बिहार में स्थिति असमंजस में है. लगातार छुट्टियों और हड़ताल से बैंकिंग सेवाएं प्रभावित होने की संभावना है.

SBI NEWS: स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के कर्मचारियों के मुद्दों को लेकर देशभर में विरोध तेज हो गया है. इसी क्रम में ऑल इंडिया स्टेट बैंक ऑफ इंडिया स्टाफ फेडरेशन ने 25 और 26 मई को दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है.

कर्मचारी यूनियन का कहना है कि लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर बार-बार अपील के बावजूद समाधान नहीं हुआ, जिसके चलते आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा. यूनियन की 16 सूत्रीय मांगों में मुख्य रूप से स्टाफ की कमी दूर करना, सब-स्टाफ व सुरक्षा गार्डों की भर्ती, और बीमा उत्पादों की मिस-सेलिंग पर रोक लगाना शामिल है.

बिहार में संशय की स्थिति

बिहार में स्थिति फिलहाल असमंजस में है क्योंकि राज्य में एसबीआई स्टाफ एसोसिएशन दो गुटों में बंटा हुआ है. इसी वजह से हड़ताल में भागीदारी को लेकर स्पष्टता नहीं बन पाई है. खासकर पटना में दोनों गुट अलग-अलग दावे कर रहे हैं, जिससे स्थिति और उलझ गई है.

हड़ताल से बैंकिंग सेवा पर गहरा असर

बैंकिंग सेवाओं पर असर की बात करें तो 23 मई को चौथा शनिवार, 24 मई को रविवार, 25–26 मई को संभावित हड़ताल और 28 मई को बकरीद के कारण बैंकिंग कार्य कई दिनों तक बाधित रह सकते हैं। इससे ग्राहकों को नकद निकासी, चेक क्लियरेंस और अन्य सेवाओं में परेशानी हो सकती है।

हालांकि बिहार में हड़ताल को लेकर अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं है, लेकिन पूरे देश में बैंकिंग गतिविधियों पर असर की संभावना जताई जा रही है।

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By Nikhil Anurag

मूलतः निखिल अनुराग. पेशे से पत्रकार. बुद्ध की धरती पर जन्म. बिहार का सबसे नवीनतम जिला (अरवल) से ताल्लुक. पढ़ाई की शुरूआत गांव से ही. फिर गंगा के तट पटना पहुंचा. ज्ञान की धरती से कुछ तालीम हासिल कर राष्ट्रीय राजधानी की ओर कूच. पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट. नोएडा की धरती पर विद्वतजन से कुछ न कुछ सीखा. करंट अफ़ेयर्स, राजनीति, खेल, अंतरराष्ट्रीय संबंध, गाँव, खेत-किसान पसंदीदा टॉपिक. स्कूल, कॉलेज युनिवर्सिटी में यूथ से गपशप करना एनर्जी का अतिरिक्त स्रोत. साल 2020 में नोएडा से शुरू हुई इस लेखन यात्रा कलम, डेस्कटॉप, लैपटॉप के की-बोर्ड से होते हुए स्मार्ट फोन तक पहुंच गयी. ज्यों-ज्यों उम्र बढ़ रही है, सीखने, पढ़ने, लिखने की भूख भी बढ़ रही है.

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