राजेंद्र नगर से बेउर तक पीआरडीए की संपत्तियां होंगी फ्री-होल्ड, आज हजारों लोगों को मिलेगा मालिकाना हक

पटना नगर निगम की विशेष बैठक में पीआरडीए की 432 एकड़ जमीन और 3631 संपत्तियों को फ्री-होल्ड करने के प्रस्ताव पर आज अंतिम मुहर लग सकती है। जानें पूरी जानकारी।

PRDA's Assets : राजधानी पटना में पीआरडीए की लीज-होल्ड संपत्तियों को फ्री-होल्ड में बदलने की तैयारी पूरी कर ली गयी है. सशक्त स्थायी समिति से प्रस्ताव पारित होने के बाद इसे अंतिम मंजूरी देने के लिए गुरुवार को पटना नगर निगम बोर्ड की विशेष बैठक बुलायी गयी है. पिछली बोर्ड बैठक में प्रस्ताव के सभी बिंदु स्पष्ट नहीं होने के कारण इसे रोक दिया गया था और संशोधित प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया गया था. अब संशोधनों के बाद प्रस्ताव को विशेष बैठक में रखा जा रहा है.

इन इलाकों में मालिकाना हक का रास्ता साफ होगा

बोर्ड से मंजूरी मिलते ही राजेंद्र नगर, श्रीकृष्णापुरी, कंकड़बाग, मौर्यलोक कॉम्प्लेक्स, परिवहन नगर और बेउर समेत प्रमुख इलाकों में पीआरडीए की संपत्तियों के धारकों को मालिकाना हक मिलने का रास्ता साफ हो जायेगा. इससे हजारों भूखंड, भवन, फ्लैट, दुकान और कियोस्क धारकों को लाभ मिलने की उम्मीद है.

संपत्ति बेचने और बैंक लोन लेने में होगी आसानी

फ्री-होल्ड होने के बाद संपत्ति धारकों के लिए खरीद-बिक्री, बैंक से लोन लेने और म्यूटेशन कराने की प्रक्रिया आसान हो जायेगी. हालांकि, जिस संपत्ति का लीज डीड पहले निबंधित नहीं हुआ है, उसके लिए पहले लीज डीड का निबंधन कराना अनिवार्य होगा. इस व्यवस्था से नगर निगम को भी एकमुश्त बड़ी राशि राजस्व के रूप में मिलने की उम्मीद है.

एमवीआर के आधार पर लगेगा परिवर्तन शुल्क

नगर निगम की ओर से तैयार नीति के अनुसार, लीज-होल्ड संपत्ति को फ्री-होल्ड में बदलने के लिए वर्तमान न्यूनतम मूल्य दर (एमवीआर) के आधार पर परिवर्तन शुल्क लिया जायेगा. यदि संपत्ति मूल आवंटी या उसके वैध वारिस के पास है, तो अद्यतन एमवीआर का 10 प्रतिशत परिवर्तन शुल्क देना होगा. वहीं, संपत्ति किसी दूसरे व्यक्ति यानी द्वितीय आवंटी को बेची जा चुकी है, तो 12 प्रतिशत परिवर्तन शुल्क निर्धारित किया गया है.

फ्री-होल्ड की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी संपत्ति धारकों को नगर निगम को पूर्व की तरह नियमित भू-लगान का भुगतान करना होगा.

432 एकड़ में फैली 3631 संपत्तियों को मिलेगा लाभ

पीआरडीए की ओर से वर्ष 1952 से 66 या 99 साल की लीज पर जमीनों का आवंटन किया जाता रहा है. नगर निगम के पास कुल 432.07 एकड़ अधिग्रहित भूमि है. इसमें राजेंद्र नगर में 198 एकड़, श्रीकृष्णापुरी में 64 एकड़, मीठापुर में 59.69 एकड़, परिवहन नगर में 38.94 एकड़, बुद्धा कॉलोनी में 27.70 एकड़ और बेउर में 18.03 एकड़ जमीन शामिल है.

इस पूरे क्षेत्र में 1367 भूखंड, 806 भवन, 841 फ्लैट, 575 दुकानें एवं कियोस्क, 37 कार्यालय, चार अतिथिशालाएं और एक ईंट भट्ठा समेत कुल 3631 संपत्तियां हैं.

हाईकोर्ट के फैसलों के बाद बदलनी पड़ी लीज नीति

लीज संपत्तियों की खरीद-बिक्री के दौरान नगर निगम पहले 50 प्रतिशत लाभांश या म्यूटेशन शुल्क की मांग करता था. इसके खिलाफ कई आवंटियों ने पटना हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. हाईकोर्ट ने निगम की 50 प्रतिशत लाभांश मांगने की शर्त को खारिज कर दिया था.

अदालती फैसलों के साथ अवैध निर्माण, लीज शर्तों के उल्लंघन और निगम को हो रहे वित्तीय नुकसान को देखते हुए लीज नीति में बदलाव की जरूरत महसूस की गयी. इसी गतिरोध को खत्म करने के लिए नगर निगम ने लीज-होल्ड संपत्तियों को फ्री-होल्ड में बदलने की नई नीति तैयार की है.

राजधानी में पीआरडीए की संपत्तिया

भूखंड - 1367, भवन - 806, फ्लैट - 841, दुकान एवं कियोस्क - 575, कार्यालय - 37, अतिथिशाला - 4, ईंट भट्ठा - 1, कुल संपत्तियां - 3631


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लेखक के बारे में

By हिमांशु देव

हिमांशु देव सितंबर 2023 से पटना में प्रभात खबर से जुड़कर प्रिंट और डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. कला, साहित्य-संस्कृति, नगर निगम और स्मार्ट सिटी से जुड़ी खबरों पर प्रमुखता से काम किया है. महिला, युवा और जनहित से जुड़े मुद्दों को उठाना प्राथमिकता में शामिल है. व्यक्तिगत तौर पर किताबें पढ़ना और नई जगहों को एक्सप्लोर करना अच्छा लगता है.

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