पटना से हिमांशु देव की रिपोर्ट
राजधानी पटना में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और लोगों की सुरक्षा को देखते हुए नगर निगम लगातार नसबंदी अभियान चला रहा है. हालांकि कई इलाकों में स्थानीय लोगों के विरोध के कारण अभियान की रफ्तार प्रभावित हो रही है. निगम की टीम जब कुत्तों को पकड़ने पहुंचती है, तो कई बार लोगों के विरोध के कारण उन्हें बिना कार्रवाई किए लौटना पड़ता है.
सिविल कोर्ट के पास विरोध के कारण छोड़ने पड़े कुत्ते
हाल ही में पटना सिविल कोर्ट के पास निगम की टीम आवारा कुत्तों को पकड़ने पहुंची थी. इस दौरान एक महिला और स्थानीय लोगों ने अभियान का विरोध किया. विरोध इतना बढ़ गया कि टीम को पकड़े गए कुत्तों को वहीं छोड़ना पड़ा. नगर निगम का कहना है कि ऐसे विरोध से अभियान का लक्ष्य पूरा करने में कठिनाई हो रही है.
कई इलाकों में निगम कर्मियों को झेलना पड़ा विरोध
नगर निगम के अनुसार किदवईपुरी, एसके पुरी, कांग्रेस मैदान रोड, वीरचंद पटेल पथ, राजीव नगर, लोहिया नगर, चित्रगुप्त नगर, लोहानीपुर, बाकरगंज और राजेंद्र नगर समेत कई इलाकों में अभियान के दौरान विरोध का सामना करना पड़ा है. कुत्तों को पकड़ने के दौरान कई निगम कर्मी घायल भी हो चुके हैं.
हर महीने एक हजार कुत्तों की हो रही नसबंदी
नगर निगम को प्रत्येक माह 1200 से 1400 आवारा कुत्तों की नसबंदी का लक्ष्य मिला है. लेकिन स्थानीय विरोध के कारण हर महीने करीब एक हजार कुत्तों की ही नसबंदी हो पा रही है. निगम का मानना है कि नागरिकों का सहयोग मिलने पर अभियान और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है.
11 माह में 11 हजार से अधिक कुत्तों की हुई नसबंदी
सितंबर 2025 में शुरू हुए इस अभियान के तहत पिछले 11 माह में 11,395 आवारा कुत्तों की नसबंदी की जा चुकी है. पकड़े गए कुत्तों को बैरिया स्थित डॉग शेल्टर ले जाया जाता है. वहां नसबंदी के बाद डॉक्टरों की निगरानी में सात दिनों तक रखा जाता है. पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद उन्हें उसी इलाके में छोड़ दिया जाता है, जहां से उन्हें पकड़ा गया था. उनकी पहचान के लिए कान पर विशेष निशान भी बनाया जाता है.
नागरिकों से सहयोग की अपील
पटना नगर निगम ने आम लोगों से अपील की है कि वे नसबंदी अभियान में सहयोग करें और टीम का विरोध न करें. निगम का कहना है कि आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने और शहर को सुरक्षित बनाने के लिए नागरिकों का सहयोग बेहद जरूरी है. लोगों के सहयोग से ही निर्धारित लक्ष्य समय पर पूरा किया जा सकेगा और भविष्य में आवारा कुत्तों से जुड़ी समस्याओं पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा.
