पटना में बढ़ती गर्मी से जल संकट गहराया, 5 फुट नीचे गया जलस्तर, ट्यूबवेल पर बढ़ा दबाव

Patna News: पटना में भीषण गर्मी के कारण जलस्तर करीब पांच फुट नीचे चला गया है. 186 ट्यूबवेल से 1.15 लाख से अधिक परिवारों को जलापूर्ति की जा रही है. पानी की मांग बढ़ने से सिस्टम पर दबाव है. 39 नए हाई यील्ड ट्यूबवेल से सप्लाई मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है.

Patna News: (हिमांशु देव की रिपोर्ट) राजधानी पटना में भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान के कारण जलस्तर में लगभग पांच फुट तक गिरावट दर्ज की गई है. इससे शहर की जलापूर्ति व्यवस्था पर गंभीर दबाव बढ़ गया है. वर्तमान में 186 ट्यूबवेल के जरिए करीब 1 लाख 15 हजार से अधिक परिवारों को पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है.

वाटर बोर्ड द्वारा इन ट्यूबवेल को प्रतिदिन दो शिफ्टों में कुल 10 घंटे चलाया जा रहा है. सुबह 5 बजे से 1 बजे तक और दोपहर 3 बजे से रात 9 बजे तक जलापूर्ति की जा रही है. बीच में एक-एक घंटे का अंतराल देकर मोटर को बंद किया जाता है.

39 नए हाई यील्ड ट्यूबवेल से बढ़ी सप्लाई क्षमता

जल संकट को देखते हुए शहर में 39 नए हाई यील्ड ट्यूबवेल चालू किए गए हैं. इसके अलावा 38 नए बोरिंग भी लगाए जा रहे हैं, जिनकी टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. इन प्रयासों से आने वाले समय में जलापूर्ति व्यवस्था को और मजबूत करने की योजना है. वर्तमान में ट्यूबवेल से प्रति घंटे 220 से 300 घनमीटर पानी की आपूर्ति हो रही है. लेकिन बढ़ती आबादी और पुराने ट्यूबवेल की घटती क्षमता के कारण सिस्टम पर लगातार दबाव बना हुआ है.

कई इलाके पूरी तरह ट्यूबवेल पर निर्भर

लोहानीपुर, सब्जी मंडी, कॉलेजिएट गेट, सैदपुर, लालजी टोला, राजेंद्र नगर, दरियापुर, संदलपुर, एजी कॉलोनी, छज्जूबाग, हनुमान नगर, विजय नगर, गर्दनीबाग, कांटी फैक्ट्री और गांधी मैदान जैसे क्षेत्रों में जलापूर्ति ट्यूबवेल आधारित है. वार्ड संख्या 36, 38, 40, 42, 47 और 48 में बड़ी आबादी पूरी तरह इसी व्यवस्था पर निर्भर है. कई स्थानों पर एक हजार से अधिक घरों तक नल कनेक्शन से पानी पहुंचाया जा रहा है.

पुरानी बोरिंग की क्षमता घटी, नई योजना पर काम

लगातार उपयोग और मशीनों के घिसाव के कारण कई पुराने ट्यूबवेल की पानी खींचने की क्षमता कम हो गई है. ऐसे स्थानों पर पुराने ट्यूबवेल को बदलकर नए हाई यील्ड ट्यूबवेल लगाने की योजना बनाई जा रही है. साथ ही नियमित मॉनिटरिंग भी की जाएगी.

पानी की बर्बादी बनी बड़ी चुनौती

वाटर बोर्ड के इंजीनियरों के अनुसार, सुबह और शाम के समय पानी की मांग अचानक बढ़ जाती है, जिससे पंपिंग स्टेशन और पाइपलाइन पर दबाव बढ़ता है. कई इलाकों में नल खुले छोड़ने और पाइपलाइन टूटने से पानी की बर्बादी भी हो रही है. गर्दनीबाग, कांग्रेस मैदान, छज्जूबाग और संदलपुर जैसे क्षेत्रों से लगातार शिकायतें मिल रही हैं.

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लेखक के बारे में

Published by: Nikhil Anurag

मूलतः निखिल अनुराग. पेशे से पत्रकार. बुद्ध की धरती पर जन्म. बिहार का सबसे नवीनतम जिला (अरवल) से ताल्लुक. पढ़ाई की शुरूआत गांव से ही. फिर गंगा के तट पटना पहुंचा. ज्ञान की धरती से कुछ तालीम हासिल कर राष्ट्रीय राजधानी की ओर कूच. पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट ( माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय). नोएडा की धरती पर विद्वतजन से कुछ न कुछ सीखा. करंट अफ़ेयर्स, राजनीति, खेल, अंतरराष्ट्रीय संबंध, गाँव, खेत-किसान पसंदीदा टॉपिक. स्कूल, कॉलेज युनिवर्सिटी में यूथ से गपशप करना एनर्जी का अतिरिक्त स्रोत. साल 2020 में नोएडा से शुरू हुई इस लेखन यात्रा कलम, डेस्कटॉप, लैपटॉप के की-बोर्ड से होते हुए स्मार्ट फोन तक पहुंच गयी. ज्यों-ज्यों उम्र बढ़ रही है, सीखने, पढ़ने, लिखने की भूख भी बढ़ रही है. नोएडा में टीवी न्यूज में काम करने के बाद हिंदुस्तान ग्रूप होते हुए बिहार, झारखंड की सबसे पसंदीदा अखबार प्रभात खबर में कार्यरत. हां एक बात और... पढ़ने-लिखने की जिज्ञासा कभी खत्म नहीं होगी. साहित्य में बेहद दिलचस्पी.

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