पटना के कन्हैया नगर में विशाल पेड़ गिरने से मकान क्षतिग्रस्त, चार दिन बाद भी प्रशासन ने नहीं लिया संज्ञान

फुलवारीशरीफ के कन्हैया नगर में एक बड़ा सिमर पेड़ रविंदर दास के घर पर गिर गया, जिससे मकान और बाइक को भारी नुकसान हुआ. कोई आंधी नहीं थी. प्रशासन को सूचना देने के बावजूद चार दिन बाद भी जांच या मुआवजा नहीं मिला, जिससे लोगों में नाराजगी है.

Patna News: फुलवारी शरीफ के कन्हैया नगर इलाके में चार दिन पहले एक बड़ा हादसा हुआ, जब एक विशाल सिमर का पेड़ अचानक रविंदर दास के मकान पर गिर पड़ा. इस घटना से घर को गंभीर नुकसान पहुंचा है, जबकि बाहर खड़ी एक बाइक भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई.

स्थानीय लोगों के अनुसार, घटना के समय कोई तेज आंधी-पानी नहीं था, इसके बावजूद पेड़ अचानक गिर गया, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई. उस समय घर के अंदर मौजूद कुछ लोगों ने समय रहते बाहर निकलकर अपनी जान बचाई, जिससे बड़ा हादसा टल गया.

प्रशासन ने नहीं लिया अभी तक संज्ञान

पीड़ित परिवार का आरोप है कि घटना की सूचना प्रखंड विकास पदाधिकारी सहित संबंधित अधिकारियों को तुरंत दे दी गई थी, लेकिन चार दिन बीत जाने के बाद भी अब तक कोई भी प्रशासनिक अधिकारी मौके पर जांच के लिए नहीं पहुंचा है. साथ ही, आपदा राहत योजना के तहत मिलने वाली मुआवजा राशि भी अभी तक उपलब्ध नहीं कराई गई है.

लोगों में है नाराजगी

इस घटना को लेकर स्थानीय लोगों में प्रशासन की लापरवाही और उदासीनता के खिलाफ नाराजगी बढ़ रही है. लोगों ने मांग की है कि प्रभावित गरीब परिवार को जल्द से जल्द आपदा राहत राशि प्रदान की जाए और क्षतिग्रस्त मकान का सरकारी स्तर पर आकलन कर उचित सहायता सुनिश्चित की जाए.

Also Read: बिहार होकर चलने वाली कई ट्रेनें रद्द, कई के बदले रूट, सफर से पहले जरूर देखें लिस्ट

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Nikhil Anurag

मूलतः निखिल अनुराग. पेशे से पत्रकार. बुद्ध की धरती पर जन्म. बिहार का सबसे नवीनतम जिला (अरवल) से ताल्लुक. पढ़ाई की शुरूआत गांव से ही. फिर गंगा के तट पटना पहुंचा. ज्ञान की धरती से कुछ तालीम हासिल कर राष्ट्रीय राजधानी की ओर कूच. पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट. नोएडा की धरती पर विद्वतजन से कुछ न कुछ सीखा. करंट अफ़ेयर्स, राजनीति, खेल, अंतरराष्ट्रीय संबंध, गाँव, खेत-किसान पसंदीदा टॉपिक. स्कूल, कॉलेज युनिवर्सिटी में यूथ से गपशप करना एनर्जी का अतिरिक्त स्रोत. साल 2020 में नोएडा से शुरू हुई इस लेखन यात्रा कलम, डेस्कटॉप, लैपटॉप के की-बोर्ड से होते हुए स्मार्ट फोन तक पहुंच गयी. ज्यों-ज्यों उम्र बढ़ रही है, सीखने, पढ़ने, लिखने की भूख भी बढ़ रही है.

Read More
Tags
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >