खेसारी लाल यादव बोले- मैं पवन सिंह का चमचा नहीं हूं, संघर्ष के दिनों को याद कर बताया कब बदली किस्मत

Pawan-Khesari Controversy: भोजपुरी स्टार खेसारी लाल यादव ने एक पॉडकास्ट में पवन सिंह, काजल राघवानी और अपने संघर्ष के दिनों को लेकर खुलकर बात की. उन्होंने कहा कि वह पवन सिंह के चमचा नहीं हैं. खेसारी ने आगे कहा कि सफलता तक पहुंचने के लिए उन्होंने काफी संघर्ष किया है.

Pawan-Khesari Controversy: भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार खेसारी लाल यादव ने एक बार फिर अभिनेता और गायक पवन सिंह को लेकर बड़ा बयान दिया है. एक पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान खेसारी ने अपने करियर, निजी जिंदगी और इंडस्ट्री के कई मुद्दों पर खुलकर बात की. उन्होंने पवन सिंह का जिक्र करते हुए कहा कि सच बात सबको अच्छी नहीं लगती. मैं पवन सिंह का चमचा नहीं हूं कि मैं उनके गलत में भी हां बोलूं और सही में भी हां बोलूं.

‘मैं इंडस्ट्री में बाद में आया, लेकिन ज्यादा फिल्में की’

पवन सिंह के साथ रिश्तों को लेकर पूछे गए सवाल पर खेसारी ने कहा कि वह इंडस्ट्री में पवन सिंह के बाद आए, लेकिन उन्होंने उनसे ज्यादा फिल्मों में काम किया है. खेसारी ने आगे कहा कि उन्होंने कहा था कि वो मेरे साथ कभी काम नहीं करेंगे. इसके बावजूद मैं लगातार काम कर रहा हूं. मैंने उनके साथ सिर्फ एक फिल्म की है.

काजल राघवानी को लेकर भी दिया जवाब

पॉडकास्ट में खेसारी ने अभिनेत्री काजल राघवानी को लेकर भी बात की. उन्होंने कहा कि जिस तरह पहले वह उनके लिए सही थीं, आज भी वैसी ही हैं. उन्होंने कहा की इंसान को प्यार हो जाता है. मैं तो कहता हूं कि मर्द को प्यार नहीं, आदत हो जाती है.

बचपन में घर-घर पहुंचाते थे दूध

खेसारी ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए बताया कि उनके परिवार के पास ज्यादा जमीन नहीं थी. वह अपने चाचा के साथ गांव में रहते थे, जबकि उनके पिता दिल्ली में मजदूरी करते थे. उन्होंने बताया कि बचपन में वह घर-घर जाकर दूध पहुंचाते थे. इसी दौरान गाने का भी अभ्यास करते थे और संगीत सीखते थे.

दिल्ली में बेचा लिट्टी-चोखा

खेसारी ने बताया कि 2004 से 2007 तक उन्होंने दिल्ली के ओखला इलाके में लिट्टी-चोखा की दुकान चलाई. दिन में दुकान संभालते थे और रात में गाना गाते थे.

उन्होंने कहा कि साल 2006 में उनकी शादी हुई थी. उसी दौरान पिता ने उन्हें 11 हजार रुपये दिए थे, जिससे उन्होंने अपनी पहली ऑडियो कैसेट निकाली. पहली कैसेट फ्लॉप रही, दूसरी को थोड़ा प्यार मिला और तीसरी कैसेट ने उन्हें पहचान दिला दी.

बेटी के जन्म के बाद बदली किस्मत

खेसारी ने बताया कि साल 2008 में उनकी बेटी का जन्म हुआ. इसके बाद उनके कई गाने हिट हुए और धीरे-धीरे भोजपुरी इंडस्ट्री में उनकी पहचान मजबूत होती चली गई.

मनोज तिवारी के घर में छिपकर रहे

संघर्ष के दिनों को याद करते हुए खेसारी ने एक और दिलचस्प किस्सा सुनाया. उन्होंने बताया कि मुंबई में रहने के दौरान वह भोजपुरी स्टार और सांसद मनोज तिवारी के घर में छिपकर रहते थे. खेसारी ने कहा कि मनोज तिवारी के घर के दो केयरटेकर उनके परिचित थे. उन्हीं की मदद से वह वहां रुके रहते थे. बाद में मनोज तिवारी को भी इस बात की जानकारी हो गई थी.

Also Read: बिहार के मंत्री बोले- मैं दलित हूं, इसलिए बंगला खाली नहीं कर रहीं राबड़ी देवी, नंद किशोर राम को आवंटित है आवास

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: Abhinandan Pandey

अभिनंदन पांडेय पिछले दो वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की और दैनिक जागरण, भोपाल में काम किया. वर्तमान में वह प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के हिस्सा हैं. राजनीति, खेल और किस्से-कहानियों में उनकी खास रुचि है. आसान भाषा में खबरों को लोगों तक पहुंचाना और ट्रेंडिंग मुद्दों को समझना उन्हें पसंद है. अभिनंदन ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से की. पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को सही तरीके से लोगों तक पहुंचाने की सोच ने उन्हें इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. दैनिक जागरण में रिपोर्टिंग के दौरान उन्होंने भोपाल में बॉलीवुड के कई बड़े कलाकारों और चर्चित हस्तियों के इंटरव्यू किए. यह अनुभव उनके करियर के लिए काफी अहम रहा. इसके बाद उन्होंने प्रभात खबर डिजिटल में इंटर्नशिप की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की वास्तविक दुनिया को करीब से समझा. बहुत कम समय में उन्होंने रियल टाइम न्यूज लिखना शुरू कर दिया. इस दौरान उन्होंने सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता भी बेहद जरूरी होती है. फिलहाल वह प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ काम कर रहे हैं. बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में कवर किया, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और वीडियो कंटेंट भी तैयार किए. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और भरोसेमंद खबर पहुंचे. पत्रकारिता में उनका लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और एक विश्वसनीय पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >