IKKIS 2026: बिहार की Pragati Anand ने धर्मेंद्र की अंतिम फिल्म में निभाई दमदार भूमिका, साझा किए अपने भावुक अनुभव

IKKIS 2026: पटना की प्रगति आनंद ने (Pragati Anand) मेहनत और धैर्य के बल पर हिंदी सिनेमा में पहचान बनाई. दिवंगत धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म ‘इक्कीस’ में अहम भूमिका निभा रहीं प्रगति ने आउटसाइडर होने के संघर्ष, ऑडिशन की जर्नी और सेट पर मिले अनुभव साझा किए. उन्होंने युवाओं को कंसिस्टेंसी और ईमानदार मेहनत का संदेश दिया. पढ़ें बातचीत के अंश.

IKKIS 2026: अपने मेहनत के बूते पटना की प्रगति आनंद आज हिंदी सिनेमा में अपनी अलग पहचान बना रही हैं. घर में रहकर 12वीं तक की पढ़ाई पूरी की. लेकिन, बचपन से ही डांस, एक्टिंग व मॉडलिंग की शौक के चलते मुंबई चली गयी. वहीं रहकर उन्होंने ग्रेजुएशन किया. वह कहती हैं कि घर में सबकुछ आसानी से मिल जाता था. पर मुंबई में कुकिंग से लेकर अन्य सभी काम को खुद से की. इसमें फन और एक्साइटमेंट भी था. इसके बाद लॉकडाउन में अकेले रहकर खुद को मजबूत बनाया. उनके सफर में मां पुष्पलता सिंह का भी बड़ा योगदान रहा.

प्रभात खबर से बातचीत में प्रगति (Pragati Anand) ने युवाओं से कहा कि सपने बड़े रखें, लेकिन जिम्मेदारियां भी समझें. मेहनत ईमानदार हो तो रास्ता खुद बनता है. सेकेंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल की हिम्मत और उनके जज्बे की कहानी पर आधारित दिवंगत कलाकार धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म ‘इक्कीस’ में प्रगति मुख्य किरदार की भूमिका में नजर आ रही हैं.

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Q. ‘इक्कीस’ में रोल मिलने तक का सफर कैसा रहा? पहली प्रतिक्रिया क्या थी?

– ‘इक्कीस’ मेरे लिए सपने जैसा प्रोजेक्ट था. इसकी कास्टिंग करीब चार साल से चल रही थी और कई राउंड के ऑडिशन हुए. जब मुझे शॉर्टलिस्ट होने की खबर मिली तो खुशी के साथ घबराहट भी थी, क्योंकि मानक बहुत ऊंचे थे. फाइनल कॉल आया तो यकीन ही नहीं हुआ. मैंने तुरंत मां को फोन किया. उस पल लगा कि संघर्ष रंग लाया. श्रीराम सर जैसे निर्देशक के साथ काम करना मेरे लिए सम्मान की बात है. यह सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि मेरी मेहनत, धैर्य और भरोसे की जीत है.

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Q. आपने ‘किरण की सहेली’ के किरदार के लिए कैसी तैयारी की? क्या कोई चुनौती रही?

– मैंने किरदार की बैकस्टोरी पर बहुत काम किया. उसकी सोच, दोस्ती और भावनात्मक प्रतिक्रियाएं समझीं. ट्रेनिंग में डिक्शन, बॉडी लैंग्वेज और इमोशनल कंट्रोल पर फोकस किया. एनडीए कैंट में शूटिंग अपने आप में चुनौती थी, क्योंकि अनुशासन और समयबद्धता बहुत सख्त थी. असली कैडेट्स की ट्रेनिंग देखकर जिम्मेदारी का एहसास हुआ कि हमें कहानी को सच्चाई के साथ दिखाना है. सबसे बड़ी चुनौती थी, कम सीन में भी प्रभाव छोड़ना. मैंने सादगी और ईमानदारी से निभाने की कोशिश की.

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Q. श्रीराम राघवन व धर्मेंद्र पाजी के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?

– श्रीराम सर बेहद शांत और क्लियर हैं. वे सीन को तोड़कर समझाते हैं और कलाकार को स्पेस देते हैं, जिससे परफॉर्मेंस नैचुरल निकलती है. दिग्गज कलाकारों से सीखने को बहुत मिला. सेट पर अनुशासन, समय की कद्र और हर टेक में फोकस हैं. धर्मेंद्र पाजी की मुस्कान और सादगी ने दिल जीत लिया. वे सेट पर सकारात्मक ऊर्जा लाते हैं. मैंने सीखा कि बड़ा कलाकार वही है जो छोटों को भी बराबरी का सम्मान दे. यह अनुभव मेरे करियर का सबसे मजबूत स्कूल रहा.

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Q. एक आउटसाइडर के तौर पर आपकी यात्रा युवाओं के लिए क्या संदेश देती है?

– मैं छोटे शहर से हूं और बिना किसी फिल्मी बैकग्राउंड के आई हूं. मेरा मानना है कि सफलता कनेक्शन से नहीं, कंसिस्टेंसी से मिलती है. अपने क्राफ्ट, डिक्शन और फिटनेस पर रोज काम करें, धैर्य रखें और रिजेक्शन को सीख मानें.

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By हिमांशु देव

सितंबर 2023 से पटना में प्रभात खबर से जुड़कर प्रिंट और डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. कला, साहित्य-संस्कृति, नगर निगम और स्मार्ट सिटी से जुड़ी खबरों पर प्रमुखता से काम किया है. महिला, युवा और जनहित से जुड़े मुद्दों को उठाना प्राथमिकता में शामिल है. व्यक्तिगत तौर पर किताबें पढ़ना और नई जगहों को एक्सप्लोर करना अच्छा लगता है.

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