छाती में अटक जाता था खाना, फोर्ड हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने की लेप्रोस्कोपिक सर्जरी से दिलाई मरीज को राहत

Ford Hospital: कटिहार के एक मरीज को अकैलेसिया कार्डिया जैसी दुर्लभ बीमारी से फोर्ड हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने सफल लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के जरिए राहत दिलाई. खाने की नली में अवरोध के कारण मरीज को निगलने में काफी दिक्कत होती थी. दो घंटे चली हेलर्स मियोटॉमी सर्जरी के बाद अब वह पूरी तरह स्वस्थ है.

Ford Hospital: फोर्ड हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने कटिहार के मनिहारी निवासी 48 साल के प्रेम कुमार राव (बदला हुआ नाम) को अकैलेसिया कार्डिया नामक दुर्लभ बीमारी से राहत दिलाई. इस बीमारी के कारण खाने की नली और पेट के बीच का हिस्सा (जीई जंक्शन) बंद हो गया था. इससे मरीज का भोजन पेट तक पहुंचने के बजाय छाती में ही अटक जाता था और उसे निगलने में काफी परेशानी होती थी.

फोर्ड हॉस्पिटल के निदेशक एवं जनरल सर्जन डॉ. संतोष कुमार, डॉ. आलोक कुमार और डॉ. प्रभात रंजन की टीम ने करीब दो घंटे तक चली लेप्रोस्कोपिक सर्जरी कर मरीज का सफल इलाज किया.

डॉक्टरों ने हेलर्स मियोटॉमी तकनीक के माध्यम से जीई जंक्शन के ऊपर लगभग दो सेंटीमीटर और नीचे चार सेंटीमीटर तक की मांसपेशियों को काटकर अवरोध को दूर किया. सर्जरी के बाद मरीज पूरी तरह स्वस्थ है और अब उसे खाने-पीने में किसी तरह की दिक्कत नहीं हो रही है.

हॉस्पिटल के निदेशक एवं जनरल सर्जन डॉ. संतोष कुमार ने बताया कि अकैलेसिया कार्डिया के पीछे हाइपर एसिडिटी, आनुवंशिक कारण या वायरल संक्रमण जिम्मेदार हो सकते हैं. शुरुआती चरण में बीमारी की पहचान होने पर इसका सफल इलाज संभव है, लेकिन लंबे समय तक इलाज नहीं कराने पर यह गंभीर रूप ले सकती है और कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है. इसलिए निगलने में लगातार परेशानी होने पर बिना देर किए विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए.


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लेखक के बारे में

12 वर्षों से टीवी पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दे रहा हूं. रांची विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग से पढ़ाई की है. राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय विषयों के साथ-साथ विज्ञान और ब्रह्मांड विषयों पर रुचि है. बीते छह वर्षों से प्रभात खबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम करने के बाद डिजिटल जर्नलिज्म का अनुभव काफी अच्छा रहा है.
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