Bihar EV Charging Station : बिहार में इलेक्ट्रिक गाड़ी चलाने वालों के लिए अच्छी खबर है. गाड़ी चार्ज करने की चिंता अब खत्म होगी, क्योंकि सरकार राज्य भर में 235 नए ई-चार्जिंग स्टेशन खोलने जा रही है. राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की बढ़ती संख्या को देखते हुए, सरकार ने चार्जिंग स्टेशन का जाल बड़े पैमाने पर फैलाने का फैसला किया है. परिवहन विभाग के मुताबिक इस साल दिसंबर तक राजधानी पटना समेत राज्य के विभिन्न जिलों में 235 नये इ-चार्जिंग स्टेशन खोलने की पूरी तैयारी कर ली गयी है.
परिवहन विभाग की योजना के अनुसार नये चार्जिंग स्टेशनों का नेटवर्क केवल राजधानी तक सीमित नहीं रहेगा. इसे सभी प्रमुख जिला मुख्यालयों, व्यस्त बाजारों, मॉल, सार्वजनिक पार्किंग स्थलों और नेशनल व स्टेट हाइवे के किनारे प्रमुख मार्गों पर विकसित किया जायेगा.
पटना में वाहनों के सबसे बड़े दबाव को देखते हुए यहां सर्वाधिक संख्या में स्टेशन स्थापित किये जाने हैं. इससे राज्य में इलेक्ट्रिक दोपहिया, तिपहिया और चार पहिया वाहन चालकों को लंबी दूरी के सफर में चार्जिंग की समस्या से निजात मिलेगी.
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केंद्र की PM E-Drive योजना से बिहार में चार्जिंग स्टेशनों का नेटवर्क हो रहा तैयार
बिहार में फिलहाल पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत पहले चरण में 23 जिलों में 129 जगहों पर सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित किये जायेंगे. सोमवार 24 अगस्त से इसके लिए साइट सर्वे भी शुरू हो गया है. इस क्रम में पटना में भी पब्लिक प्लेसेज पर 48 चार्जिंग स्टेशन बनाए जाने हैं. अभी इसके लिए भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) की टीम सर्वे कर रही है. संबंधित कंपनियों, मॉल प्रबंधकों, पेट्रोल पंपों से आवेदन मांगा गया है.
चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने को 'सर्विस' के रूप में मान्यता दी गयी है.
आम नागरिक भी बनें चार्जिंग स्टेशन के मालिक: पूरी प्रक्रिया और फायदे
इ-चार्जिंग स्टेशन लगाने को लेकर सबसे बड़ी राहत यह है कि इसके लिए किसी विशेष सरकारी लाइसेंस या परमिट की जरूरत नहीं होती. केंद्र सरकार के विद्युत मंत्रालय की गाइडलाइन के अनुसार चार्जिंग स्टेशन स्थापित करना पूरी तरह डी-लाइसेंस गतिविधि है. इसे बिजली बेचने के बजाय एक 'सर्विस' के रूप में मान्यता दी गयी है.
ऐसे में कोई भी आम व्यक्ति, निजी जमीन मालिक, होटल, ढाबा या मॉल संचालक अपनी निजी या 5 से 10 साल के रजिस्टर्ड लीज वाली जमीन पर इसे एक नियमित कारोबार की तरह शुरू कर सकता है. इसके लिए कम से कम 500 से 1200 वर्ग फीट जगह की जरुरत होती है, जहां वाहनों के आने-जाने और पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था हो.
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बिहार में आम लोग कैसे कर सकते हैं आवेदन
बिहार इलेक्ट्रिक वाहन नीति के तहत चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर लगाने वाले निवेशकों को भारी वित्तीय अनुदान दिया जा रहा है.
- AC स्लो/मॉडरेट चार्जर (3 गन) : उपकरण खरीदने पर 75% की सब्सिडी मिलेगी. साथ ही, 10,000 रुपये इंस्टॉलेशन के लिए भी मिलेंगे (एक चार्जर पर अधिकतम 50,000 रुपये तक).
- AC फास्ट / DC स्लो चार्जर : खरीद पर 75 फीसदी सब्सिडी और 25 हजार रुपये इंस्टॉलेशन खर्च (अधिकतम 1.50 लाख रुपये प्रति चार्जर तक)
- DC फास्ट चार्जर (हाईवे व बड़े हब के लिए) : उपकरण खरीद पर 50 फीसदी सब्सिडी और 1 लाख रुपये इंस्टॉलेशन अनुदान (अधिकतम 10 लाख रुपये प्रति चार्जर तक)
बिजली दरों पर 30% छूट और ऑनलाइन आवेदन की सुविधा
राज्य में सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों को बढ़ावा देने के लिए परिवहन विभाग शुरुआती तीन वर्षों तक बिजली टैरिफ पर 30 फीसदी तक की सब्सिडी प्रदान करता है. स्टेशन के लिए नया बिजली कनेक्शन लेने की प्रक्रिया भी पूरी तरह ऑनलाइन कर दी गयी है.
दक्षिण बिहार के जिलों के उपभोक्ता SBPDCL के पोर्टल और उत्तर बिहार के जिलों के उपभोक्ता NBPDCL के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर सीधे कमर्शियल/EV टैरिफ श्रेणी में आवेदन कर सकते हैं.
इसके अलावा उपभोक्ता 'सुविधा ऐप' (SUVIDHA App) या 'बिहार बिजली बिल पे ऐप' के जरिए भी घर बैठे नये कनेक्शन के लिए जरूरी कागजात जमा कर सकते हैं. बिजली विभाग की ओर से किसी भी तकनीकी जानकारी या सहायता के लिए टॉल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1912 भी जारी किया गया है.
EV चार्जिंग स्टेशन खोलने की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया
- जगह: खुद की होनी चाहिए या कम से कम 5 से 10 साल के लीज एग्रीमेंट पर होनी चाहिए. यह सुनिश्चित करता है कि आपकी जगह सुरक्षित है और ग्राहकों को आसानी से जगह मिलेगी. साथ ही, 1-2 गाड़ियों की पार्किंग और टर्न-अराउंड स्पेस (लगभग 500 से 1200 वर्ग फीट जमीन) की व्यवस्था हो.
- लोकेशन: हाईवे, पेट्रोल पंप के पास, मुख्य बाजार, होटल/ढाबा, या कमर्शियल कॉम्प्लेक्स जैसे व्यस्त स्थान चुनें, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग आपके स्टेशन तक पहुंच सकें.
- लोड की जरूरत:
- चार्जर और हार्डवेयर का चुनाव (BIS सर्टिफाइड):
- बिजनेस मॉडल का चयन :
- सरकारी सब्सिडी के लिए आवेदन (बिहार परिवहन विभाग): स्टेशन चालू होने के बाद बिहार सरकार के संबंधित पोर्टल पर इनवॉइस, बिजली कनेक्शन रसीद और स्टेशन की तस्वीरों के साथ कैपिटल सब्सिडी के लिए क्लेम करें. इससे आपकी शुरुआती लागत कम हो जाती है.
अनुमानित शुरुआती बजट
- AC स्लो/मॉडरेट स्टेशन (2-3 गन): ₹1.5 लाख से ₹3 लाख (छोटे वाहनों और कमर्शियल कैब्स के लिए)
- DC फास्ट चार्जिंग स्टेशन (50-60 kW): ₹10 लाख से ₹18 लाख (हाईवे या मुख्य शहरों के लिए, ट्रांसफॉर्मर और सिविल वर्क सहित)
EV चार्जिंग स्टेशन को सामान्य घरेलू कनेक्शन पर नहीं चलाया जा सकता. इसे LTIS (Low Tension Industrial/Commercial - निम्न तनाव औद्योगिक/व्यावसायिक) या विशेष EV टैरिफ श्रेणी के तहत लिया जाता है.
- औसत ऊर्जा शुल्क (Energy Charge) : कमर्शियल/इंडस्ट्रियल स्लैब में बिना सब्सिडी के बेस दर लगभग ₹6.40 से ₹7.40 प्रति यूनिट के बीच आती है.
- फिक्स्ड/डिमांड चार्ज : कोई शुल्क नहीं है.
अब आगे इन खबरों से समझ लीजिए, बिहार में ईवी चार्जिंग स्टेशन का स्कोप कैसे बढ़ रहा है, और खुद के रोजगार की तैयारी करिए -
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