सात नेताओं की कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता रद्द, निष्कासित किये गये सभी

विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त पाये गये सात नेताओं को प्रदेश कांग्रेस कांग्रेस कमेटी ने प्राथमिक सदस्यता रद्द करते हुए छह वर्षों के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है.

संवाददाता,पटना

विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त पाये गये सात नेताओं को प्रदेश कांग्रेस कांग्रेस कमेटी ने प्राथमिक सदस्यता रद्द करते हुए छह वर्षों के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है. जिन नेताओं को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया गया है उनमें आदित्य पासवान, पूर्व उपाध्यक्ष, कांग्रेस सेवा दल, शकीलुर रहमान, पूर्व उपाध्यक्ष, प्रदेश कांग्रेस, राज कुमार शर्मा, पूर्व अध्यक्ष, किसान कांग्रेस, राज कुमार राजन, पूर्व अध्यक्ष, प्रदेश युवा कांग्रेस, कुंदन गुप्ता, पूर्व अध्यक्ष, अति पिछड़ा विभाग, श्रीमती कंचना कुमारी , अध्यक्ष, बांका जिला कांग्रेस कमेटी और रवि गोल्डेन , नालंदा जिला शामिल हैं.

प्रदेश कांग्रेस अनुशासन समिति ने कार्रवाई करते हुए इनके विरुद्ध आरोप लगाया है कि इन्होंने कांग्रेस पार्टी के मूल सिद्धांतों, अनुशासन और संगठनात्मक मर्यादा के प्रति शिथिल रवैया अपनाने तथा पार्टी-प्लेटफार्म के बाहर लगातार अवांछित व भ्रामक बयान जारी किया है. ऐसे में सात नेताओं के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करते हुए उन्हें छह वर्ष के लिए कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया है. अनुशासन समिति के अध्यक्ष कपिलदेव प्रसाद यादव द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि संबंधित नेताओं से प्राप्त स्पष्टीकरण समिति को संतोषजनक नहीं लगा. उनके कार्य पार्टी अनुशासन उल्लंघन के पांच मानकों में से तीन के अंतर्गत स्पष्ट रूप से आते हैं. समिति ने कहा है कि इन नेताओं ने कांग्रेस के कार्यक्रमों और निर्णयों के विरुद्ध लगातार पार्टी मंचों से बाहर बयान दिया है. सक्षम अधिकारियों के निर्देशों की जानबूझकर अवहेलना की है. प्रिंट और सोशल मीडिया में टिकट खरीद–फरोख्त जैसे निराधार और भ्रामक आरोप लगाकर पार्टी की प्रतिष्ठा को गंभीर क्षति पहुंचाई गयी है. समिति ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन मुद्दों को उठाकर नेताओं ने दुष्प्रचार किया उन पर पार्टी ने पूर्ण पारदर्शिता अपनायी थी. पर्यवेक्षकों की नियुक्ति, जनसंपर्क कार्यक्रम, प्रदेश चुनाव समिति की बैठकों तथा अखिल भारतीय चुनाव समिति द्वारा विस्तृत समीक्षा के बाद ही अधिकृत प्रत्याशियों की घोषणा की गयी थी. इसके बावजूद संबंधित नेताओं के आचरण से पार्टी के विभिन्न स्तरों प्रदेश कांग्रेस कमेटी, पर्यवेक्षक, चुनाव समितियों तथा अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के निर्णयों की अवमानना हुई और संगठन के भीतर भ्रम फैलाने की कोशिश की गयी. समिति ने यह भी बताया कि केंद्रीय पर्यवेक्षक अविनाश पांडेय की सहमति से विधान सभा पर्यवेक्षक बनाये जाने के बाद भी इन नेताओं ने अनुशासनहीनता जारी रखी.

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Author: RAKESH RANJAN

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