किऊल-झाझा के बीच बिछेगी तीसरी रेललाइन, पटना-कोलकाता रूट पर घटेगा दबाव, 962 करोड़ की परियोजना को मंजूरी

Bihar Train News: किऊल-झाझा के बीच तीसरी रेललाइन को मंजूरी मिलने से पटना-कोलकाता रूट पर ट्रेनों का दबाव कम होगा. 962 करोड़ की इस परियोजना से यात्रियों और मालगाड़ियों दोनों की रफ्तार बढ़ने की उम्मीद है.

Bihar Train News: बिहार और झारखंड के रेल नेटवर्क को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने एक अहम फैसला लिया है. किऊल और झाझा के बीच करीब 54 किलोमीटर लंबी तीसरी रेललाइन बिछाने की मंजूरी दे दी गई है. इस परियोजना पर लगभग 962 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे.

पटना-कोलकाता रूट पर घटेगा भारी ट्रैफिक

यह रेलखंड देश के सबसे व्यस्त रेल कॉरिडोर में से एक माना जाता है, जो पटना-कोलकाता समेत पूर्वी और उत्तर भारत को जोड़ता है. मौजूदा समय में यहां दोहरी रेललाइन पर ट्रेनों का अत्यधिक दबाव है, जिससे अक्सर ट्रेनों को लूप लाइन में रोकना पड़ता है और देरी की समस्या बढ़ जाती है. नई तीसरी लाइन बनने के बाद इस रूट पर ट्रैफिक का दबाव काफी कम हो जाएगा और ट्रेनों का संचालन अधिक सुचारु हो सकेगा.

यात्रियों और माल ढुलाई दोनों को मिलेगा फायदा

इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ यात्रियों को मिलेगा. नई लाइन शुरू होने के बाद एक्सप्रेस, पैसेंजर और वंदे भारत जैसी प्रीमियम ट्रेनों की संख्या बढ़ाई जा सकेगी और समय पर संचालन संभव होगा. इसके साथ ही मालगाड़ियों के लिए भी यह कॉरिडोर और बेहतर हो जाएगा. उन्हें बिना लंबे इंतजार के निर्बाध रास्ता मिलेगा, जिससे माल ढुलाई की गति और क्षमता दोनों बढ़ेंगी.

तकनीकी खराबी में भी नहीं रुकेगा रेल संचालन

फिलहाल दोहरी लाइन पर किसी तकनीकी समस्या या मरम्मत के दौरान ट्रेनों का संचालन प्रभावित हो जाता है. लेकिन तीसरी लाइन बनने के बाद एक ट्रैक पर काम चलने की स्थिति में भी अन्य लाइनों से ट्रेनों की आवाजाही जारी रह सकेगी. इससे रेलवे संचालन अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बनेगा.

पूर्वी भारत को मिलेगा मजबूत कनेक्टिविटी नेटवर्क

किऊल-झाझा रेलखंड पूर्वी भारत को उत्तर भारत और नेपाल से जोड़ने में अहम भूमिका निभाता है. यह मार्ग कोलकाता और हल्दिया बंदरगाहों को रक्सौल के जरिए नेपाल तक जोड़ने का भी काम करता है. तीसरी लाइन बनने के बाद इस पूरे नेटवर्क की क्षमता बढ़ेगी और क्षेत्रीय व्यापार एवं परिवहन को नई गति मिलेगी.

भविष्य की बढ़ती मांग को ध्यान में रखकर योजना

रेलवे अधिकारियों के अनुसार आने वाले वर्षों में इस कॉरिडोर पर ट्रेनों की संख्या और भी बढ़ने की संभावना है. इसी को ध्यान में रखते हुए बुनियादी ढांचे का विस्तार किया जा रहा है ताकि भविष्य में किसी तरह की बाधा न आए. यह परियोजना न सिर्फ वर्तमान ट्रैफिक को आसान बनाएगी, बल्कि लंबे समय के लिए रेलवे सिस्टम को मजबूत भी करेगी.

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Published by: Abhinandan pandey

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