Bihar News: बिहार में कम पूंजी लगाकर उद्योग शुरू करने वालों के लिए अच्छी खबर है. राज्य सरकार जल्द ही नई MSME (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम) नीति लाने जा रही है. इस नीति का मकसद छोटे उद्योगों को आर्थिक और तकनीकी मदद देकर उन्हें मजबूत बनाना है. नई नीति लागू होने के बाद छोटी औद्योगिक इकाइयों को वित्तीय सहायता, आसान लोन और बाजार तक पहुंच बनाने में मदद मिलेगी.
आठ लाख से ज्यादा इकाइयों को होगा फायदा
राज्य में फिलहाल करीब आठ लाख सूक्ष्म, लघु और मध्यम औद्योगिक इकाइयां काम कर रही हैं. वहीं मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत हर साल नौ हजार से अधिक नए उद्यमी भी तैयार किए जा रहे हैं. बिहार में कृषि आधारित उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण, वस्त्र, हस्तकरघा और डेयरी क्षेत्र की इकाइयों की संख्या सबसे ज्यादा है.
क्यों महसूस हुई नई नीति की जरूरत?
अब तक कुछ चुनिंदा क्षेत्रों के लिए अलग-अलग नीतियां बनी हुई हैं, लेकिन बड़ी संख्या में छोटे उद्योगों को पर्याप्त सरकारी सहायता नहीं मिल पाती है. पूंजी की कमी, तकनीकी पिछड़ापन और बाजार में प्रतिस्पर्धा जैसी समस्याओं के कारण कई इकाइयां आगे नहीं बढ़ पातीं. यही वजह है कि उद्योग विभाग ने नई MSME नीति तैयार करने का फैसला लिया है.
केंद्र की योजनाओं का भी मिलेगा लाभ
उद्योग विभाग का उद्देश्य केंद्र सरकार की MSME योजनाओं का अधिकतम फायदा राज्य की इकाइयों तक पहुंचाना है. केंद्र सरकार की ओर से पूंजीगत अनुदान और रियायती ब्याज दरों पर लोन दिए जा रहे हैं. कई राज्यों ने अपनी MSME नीति बनाकर इसका लाभ उठाया है. अब बिहार भी इसी दिशा में कदम बढ़ा रहा है.
किन क्षेत्रों को मिलेगी मदद?
नई नीति के तहत खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों, आटा-बेसन और सत्तू मिल, मसाला उद्योग, बेकरी, पशु आहार, मुर्गी दाना, हस्तशिल्प, वस्त्र एवं रेडिमेड परिधान, हस्तकरघा, चप्पल-जूता निर्माण, खिलौना उद्योग, फर्नीचर और सेवा क्षेत्र की इकाइयों को प्रोत्साहन मिलेगा.
क्या होंगे बड़े फायदे?
नई नीति के तहत उद्योगों को पूंजीगत अनुदान, तकनीकी सहायता, रियायती लोन, ऊर्जा और अन्य शुल्कों में राहत मिल सकती है. साथ ही उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने में भी मदद दी जाएगी. सरकार का मानना है कि इससे छोटे उद्योग मजबूत होंगे और राज्य में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे.
