Atal Kala Bhawan: (पटना से सबिता की रिपोर्ट) बिहार में सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए कई जिलों में अटल कला भवन बनाए जा रहे हैं. हालांकि पटना, जहानाबाद और सुपौल में अब 620 सीटों वाले अटल कला भवन का निर्माण नहीं होगा. कला, संस्कृति एवं युवा विभाग का कहना है कि इन जिलों में अतिरिक्त अटल कला भवन की आवश्यकता नहीं है. इसी कारण यहां नई परियोजना को आगे नहीं बढ़ाया गया है.
20 जिलों में बन चुके हैं या निर्माण के अंतिम चरण में हैं भवन
विभाग के अनुसार राज्य के 20 जिलों में अटल कला भवन या अटल कला केंद्र का निर्माण पूरा हो चुका है या अंतिम चरण में है. पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण और मुजफ्फरपुर में 2000 दर्शकों की क्षमता वाले अटल कला भवन बनाए जा रहे हैं. इनमें पश्चिम चंपारण और पूर्वी चंपारण में भवन तैयार हो चुके हैं, जबकि मुजफ्फरपुर में निर्माण कार्य जारी है.
इन जिलों में पूरा हो चुका है निर्माण
दरभंगा, सहरसा, मुंगेर, पूर्णिया, गया, सारण और बेगूसराय में 600 सीटों वाले अटल कला भवन बनकर तैयार हो चुके हैं. इन भवनों के माध्यम से स्थानीय कलाकारों को सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने के लिए आधुनिक सुविधाएं मिल रही हैं.
कई जिलों में तेजी से चल रहा है निर्माण कार्य
राज्य सरकार के आंकड़ों के मुताबिक लखीसराय और बांका में 630 सीटों वाले प्रेक्षागृह का निर्माण किया जा रहा है. वहीं शेखपुरा, अरवल, बक्सर, कैमूर, सिवान, अररिया, नवादा, शिवहर, नालंदा, औरंगाबाद और जमुई में 620 सीटों वाले अटल कला भवन का निर्माण तेजी से चल रहा है.
9 जिलों में जमीन मिल चुकी, जल्द शुरू होगा काम
खगड़िया, कटिहार, किशनगंज, मधुबनी, भोजपुर, गोपालगंज, रोहतास, समस्तीपुर और मधेपुरा में अटल कला भवन निर्माण के लिए जमीन उपलब्ध करा दी गई है. इन जिलों में प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा.
वैशाली, भागलपुर और सीतामढ़ी में जमीन की समस्या
वैशाली, भागलपुर और सीतामढ़ी में अभी तक अटल कला भवन के लिए जमीन उपलब्ध नहीं हो सकी है. जमीन नहीं मिलने के कारण इन जिलों में निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है. विभाग भूमि उपलब्ध होने का इंतजार कर रहा है.
कलाकारों को मिलेगा आधुनिक मंच
अटल कला भवन बनने से जिलों में नाटक, संगीत, नृत्य और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन के लिए आधुनिक मंच उपलब्ध होगा. इसके अलावा स्थानीय कलाकारों को अपने ही जिले में अभ्यास और प्रदर्शन की बेहतर सुविधाएं मिलेंगी. इससे क्षेत्रीय कला और संस्कृति को भी बढ़ावा मिलेगा.
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