राज्य के 534 और पटना जिले में चिह्नित 23 मॉडल स्कूल (आदर्श विद्यालय) में उन्हीं बच्चों का कक्षा 9वीं में नामांकन होगा, जिन्होंने राष्ट्रीय आय सह मेधा छात्रवृत्ति योजना परीक्षा (एनएमएमएसएस) 2025-26 में सफलता पायी हो. यह छात्रवृत्ति परीक्षा एससीइआरटी द्वारा 11 मार्च को आयोजित होगी. इस परीक्षा में राज्य भर से 85 हजार विद्यार्थी शामिल होंगे. पिछले वर्ष इस परीक्षा में 42 हजार विद्यार्थी शामिल हुए थे. परीक्षा संचालन के लिए राज्य भर में 191 परीक्षा केंद्र बनाये गये हैं. पटना जिले में यह परीक्षा छह केंद्रों पर आयोजित होगी. छात्रवृत्ति योजना परीक्षा में कक्षा आठवीं में नामांकित विद्यार्थी शामिल होंगे. इस परीक्षा में पास होने के बाद उनका नामांकन कक्षा 9वीं में होगा. इसके बाद सफल विद्यार्थियों को कक्षा 9वीं से 12वीं तक पढ़ाई पूरी करने के लिए प्रति महीने एक हजार रुपये छात्रवृत्ति प्रदान की जायेगी.
मॉडल स्कूल में नये सत्र से होगी पढ़ाई
राज्य के 534 माध्यमिक स्कूलों को मॉडल स्कूल के रूप में विकसित किया गया है, जिसमें पटना जिले में 23 मॉडल स्कूल शामिल हैं. मॉडल स्कूल में कक्षा 9वीं में नामांकन के लिए अलग से प्रवेश परीक्षा नहीं ली जायेगी. जो विद्यार्थी राष्ट्रीय आय सह मेधा छात्रवृति योजना परीक्षा में सफल होते हैं और वे मॉडल स्कूल में कक्षा 9वीं में नामांकन के लिए इच्छा रखते हैं उनका ही नामांकन लिया जायेगा. नामांकन प्रक्रिया कक्षा आठवीं की वार्षिक परीक्षा के बाद शुरू किया जायेगा.
मॉडल स्कूल में मिलेंगी विभिन्न सुविधाएं
जिला शिक्षा पदाधिकारी साकेत रंजन ने बताया कि मॉडल स्कूल का कॉन्सेप्ट बेहतर है. पटना जिले में प्रत्येक प्रखंड में माध्यमिक स्तर के किसी स्कूल को एक मॉडल स्कूल के रूप में विकसित किया जायेगा, जिसमें विद्यार्थियों को हर तरह की सुविधा प्रदान की जायेगी. छात्रावास की भी व्यवस्था रहेगी, जिले में कुछ स्कूलों को चिह्नित किया गया है और कुछ का करना बाकी है.
करायी जायेगी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी
मॉडल स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करायी जायेगी, जिसमें मेडिकल, इंजीनियरिंग सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करायी जायेगी. इसके अलावा स्कूलों में कंप्यूटर की बेहतर शिक्षा के लिए लैब भी तैयार किये जायेंगे. इसके साथ ही विद्यार्थियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ कर उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करायी जायेगी. विद्यार्थियों को डिजिटल बोर्ड और प्रोजेक्टर आधारित लर्निंग और टीचिंग का अनुभव मिलेगा. इन स्कूलों में एकेडमिक ज्ञान के साथ ही खेल, संस्कृति, नृत्य और संगीत जैसे अन्य कौशल भी सिखाये जायेंगे. स्कूलों में इसमें विद्यार्थियों की संख्या के हिसाब से वर्ग कक्ष, विषयवार शिक्षकों की नियुक्ति, माध्यमिक विद्यालय में विषयवार न्यूनतम आठ से 10 और उच्च माध्यमिक में न्यूनतम 16 शिक्षक होंगे.
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