दिव्यांग की श्रेणी में शामिल होंगे कैंसर व एड्स पीड़ित
योजना. 19 प्रकार की होंगी िवकलांगता की श्रेणी अब तक विकलांगता के सात प्रकार ही निर्धारित थे. इनमें कैंसर, एड्स व एनिमिया समेत कई अन्य को शामिल किया जायेगा. पटना : कैंसर व एड्स पीड़ित भी अब विकलांग की श्रेणी में होंगे. केंद्र सरकार विकलांगता के सात प्रकार को बढ़ाकर 19 करने जा रही है. […]
योजना. 19 प्रकार की होंगी िवकलांगता की श्रेणी
अब तक विकलांगता के सात प्रकार ही निर्धारित थे. इनमें कैंसर, एड्स व एनिमिया समेत कई अन्य को शामिल किया जायेगा.
पटना : कैंसर व एड्स पीड़ित भी अब विकलांग की श्रेणी में होंगे. केंद्र सरकार विकलांगता के सात प्रकार को बढ़ाकर 19 करने जा रही है. साथ ही सरकारी सेवाओं में विकालांग अभ्यर्थियों को मिलने वाली तीन प्रतिशत के आरक्षण को भी बढ़ाकर पांच प्रतिशत किया जा रहा है. केंद्र सरकार ने विकलांगों के लिए नया बिल तैयार किया है और संसद से उसे पारित कराने के बाद लागू किया जायेगा. इसकी जानकारी दिव्यांग जन के मुख्य आयुक्त डॉ. कमलेश कुमार पांडेय ने दी. शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने बताया कि अब तक विकलांगता के सात प्रकार ही निर्धारित थे, लेकिन इसे बढ़ाया जा रहा है और इसे 19 किया जा रहा है.
इसमें कैंसर, एड्स व एनिमिया समेत कुल 19 प्रकार को शामिल किया जायेगा. उन्होंने बताया कि विकलांगों को सरकारी नौकरी में तीन प्रतिशत आरक्षण मिलता है. केंद्र इसे बढ़ाकर पांच प्रतिशत करने जा रही है. इसके अलावा राष्ट्रीय विकलांग आयोग का भी गठन किया जा रहा है. राष्ट्रीय स्तर पर आयोग के गठन होने के बाद राज्य सरकारों को भी अपने-अपने यहां राज्य स्तर पर विकलांग आयोग का गठन करना होगा. यह आयोग विकलांगों को अधिकार दिलाने में कारगर कदम उठायेगा. डॉ. पांडेय ने कहा कि बिल में जो व्यक्ति 40 प्रतिशत विकलांगता से ज्यादा विकलांग होगा, उसे भी पेंशन और छात्रवृत्ति ऋण का लाभ दिया जायेगा.
बिहार में यह पहले से ही लागू है. उन्होंने बताया कि दिव्यांगजन के गठन के बाद 17 राज्यों में मॉनीटरिंग की जा रही है. इसमें एक राज्य के कई स्थानों में मोबाइल कोर्ट का आयोजन किया गया.
राज्य सरकारों को भी दिव्यांगों की मॉनीटरिंग करने का जिम्मा है, लेकिन बिहार में अब तक विकलांगों के लिए अलग से विभाग नहीं है. सात राज्यों में डिसेबिल्टी डिपार्टमेंट काम कर रहा है, 14 राज्यों में स्टेट कमिशनर बनाये गये हैं. बिहार दोनों में नहीं है. तीन सालों में बिहार से मात्र 450 केस आये, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर 31,500 केस आये और 30 हजार से ज्याद सोल्व भी कर लिये गये. करीब 13 सौ मामले जो बच गये हैं उन पर कार्रवाई चल रही है. उन्होंने बताया कि जागरूकता के अभाव में लोग अपनी बात नहीं पहुंचा पा रहे हैं.
46000 प्री मैट्रिक व 30 हजार मैट्रिक के विकलांग छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति देने का चयन किया गया, लेकिन 24 हजार लाभार्थी ही सामने आ सके. यह भी जागरूकता के अभाव में हुआ. डॉ. पांडेय ने सुगम भारत योजना का भी जिक्र किया और उसे लागू कराये जाने की बात कही.
उन्होंने नेत्र दान किये जाने पर भी जोर दिया और कहा कि देश में 610 आइ बैंक खुल चुके हैं, लेकिन बिहार में एक भी नहीं है, झारखंड में है. उन्होंने कहा कि कई एनजीओ बिहार में फर्जी सर्टिफिकेट भी बांटते हैं, एेसे संस्थानों को ब्लैक लिस्टेड किया जायेगा. प्रेस कॉन्फ्रेंस समाज कल्याण विभाग की प्रधान सचिव वंदना किन्नी समेत अन्य मौजूद थे.
