Nitish Kumar: 16वीं यात्रा पर निकलेंगे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, समृद्धि यात्रा से फिर होगा बिहार का सीधा संवाद
Nitish Kumar : बिहार की राजनीति में यात्राएं केवल दौरा नहीं, बल्कि जनता से सीधे जुड़ने का बड़ा मंच रही हैं. एक बार फिर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए 16 जनवरी से ‘समृद्धि यात्रा’ पर निकलने जा रहे हैं.
Nitish Kumar: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार वर्ष 2026 में अपनी 16वीं यात्रा के साथ बिहार के दौरे पर निकलेंगे. इस यात्रा का नाम ‘समृद्धि यात्रा’ रखा गया है, जिसकी शुरुआत 16 जनवरी को पश्चिम चंपारण से प्रस्तावित है. अलग-अलग चरणों में होने वाली इस यात्रा में मुख्यमंत्री राज्य के सभी 38 जिलों का भ्रमण करेंगे.
सत्ता संभालने के बाद से यह उनकी यात्राओं की लंबी और सशक्त परंपरा का अगला अध्याय है, जिसमें वे सीधे जनता से संवाद करते रहे हैं और जमीनी हकीकत का आकलन करते आए हैं.
परिवर्तन यात्रा से शुरू हुआ सफर
मुख्यमंत्री की यात्राओं की शुरुआत जुलाई 2005 में ‘परिवर्तन यात्रा’ से हुई थी. उस समय बिहार की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव का दौर शुरू हुआ था. इसके बाद यात्राएं केवल कार्यक्रम नहीं, बल्कि शासन और जनता के बीच पुल बन गईं. हर यात्रा का एक अलग नाम और एक अलग उद्देश्य रहा, जिसने उसे विशिष्ट पहचान दी.
2009 बना यात्राओं का सबसे व्यस्त साल
2009 वह साल रहा जब मुख्यमंत्री ने सबसे ज्यादा यात्राएं कीं. जनवरी से जून तक विकास यात्रा, जून से धन्यवाद यात्रा और दिसंबर से प्रवास यात्रा हुई. इसके बाद 2010 में विश्वास यात्रा, 2011 में सेवा यात्रा और 2012 में अधिकार यात्रा निकाली गई. इन यात्राओं के जरिए सरकार ने विकास, भरोसे और अधिकार जैसे मुद्दों को जनता के सामने रखा.
संकल्प से संपर्क तक का सफर
2014 में संकल्प यात्रा और संपर्क यात्रा के जरिए सरकार ने योजनाओं के क्रियान्वयन और जनसंपर्क को मजबूत किया. 2016 में निश्चय यात्रा और 2017 में विकास समीक्षा यात्रा हुई, जिसमें सरकार के वादों और उपलब्धियों का आकलन किया गया. ये यात्राएं केवल राजनीतिक नहीं रहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही का भी जरिया बनीं.
पर्यावरण और समाज सुधार पर फोकस
दिसंबर 2019 से जनवरी 2020 तक चली जल-जीवन-हरियाली यात्रा ने पर्यावरण संरक्षण को केंद्र में रखा. इसके बाद दिसंबर 2021 से मार्च 2022 तक समाज सुधार अभियान चला, जिसमें सामाजिक बदलाव और कुरीतियों के खिलाफ संदेश दिया गया. जनवरी से मार्च 2023 तक समाधान यात्रा के जरिए जनसमस्याओं के त्वरित समाधान पर जोर दिया गया.
प्रगति के बाद अब समृद्धि की बारी
दिसंबर 2024 से फरवरी 2025 तक चली प्रगति यात्रा का मकसद विकास कार्यों की रफ्तार का जायजा लेना था. अब 16 जनवरी 2026 से प्रस्तावित समृद्धि यात्रा में सरकार का फोकस विकास को समृद्धि में बदलने पर रहेगा. माना जा रहा है कि इस यात्रा में आर्थिक विकास, रोजगार, ग्रामीण समृद्धि और बुनियादी ढांचे को लेकर बड़े संदेश दिए जाएंगे.
राजनीतिक और प्रशासनिक महत्व
नीतीश कुमार की यात्राएं बिहार की राजनीति में एक अलग पहचान रखती हैं. ये यात्राएं केवल चुनावी तैयारी नहीं, बल्कि शासन का फीडबैक सिस्टम भी हैं. जिलों में जाकर योजनाओं की हकीकत जानना और अधिकारियों को सीधे निर्देश देना इस यात्रा की खासियत रही है.
2005 से 2026 तक मुख्यमंत्री की यह 16वीं यात्रा साबित करती है कि बिहार में ‘यात्रा राजनीति’ एक स्थायी मॉडल बन चुकी है. समृद्धि यात्रा इसी परंपरा की अगली कड़ी है, जो यह संकेत देती है कि सरकार आने वाले समय में विकास से आगे बढ़कर समृद्धि को लक्ष्य बना रही है.
