अनीसाबाद-दीदारगंज कॉरिडोर का काम नहीं हुआ शुरू, 5 साल करना होगा इंतजार; जानिए वजह

पटना के अनीसाबाद-दीदारगंज एलिवेटेड कॉरिडोर पर लोगों को आवागमन के लिए पांच साल तक इंतजार करना पड़ सकता है. यह महत्वाकांक्षी परियोजना फिलहाल मंजूरी के स्तर पर है. जानें पूरी रिपोर्ट.

Anisabad-Didarganj Elevated Corridor Project : एनएचएआइ की प्रस्तावित महत्वाकांक्षी सड़क परियोजना में शामिल अनीसाबाद-दीदारगंज एलिवेटेड कॉरिडोर पर आवागमन के लिए लोगों को अभी करीब पांच साल तक इंतजार करना पड़ सकता है. यह परियोजना फिलहाल अप्रेजल के स्तर पर है और इसे केंद्र से अंतिम मंजूरी नहीं मिली है. ऐसे में मंजूरी से लेकर टेंडर, निर्माण शुरू होने और काम पूरा होने तक लंबी प्रक्रिया से गुजरना होगा. हालांकि, एनएचएआइ ने परियोजना के लिए पांच साल की आधिकारिक समयसीमा जारी नहीं की है, इसलिए पांच साल का अनुमान मंजूरी और निर्माण की संभावित प्रक्रिया के आधार पर है.

कॉरिडोर की लंबाई और संरचना

एनएचएआइ के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार यह एलिवेटेड कॉरिडोर करीब 7.51 किलोमीटर लंबा और सिक्सलेन का बनाया जाना है. इसके अलावा 11.66 किलोमीटर छह लेन की एट-ग्रेड सड़क, 21.84 किलोमीटर सर्विस रोड और 10 एंट्री-एग्जिट रैंप बनाए जाने का प्रस्ताव है. रैंप की कुल लंबाई 8.16 किलोमीटर होगी.

एनएच-31 पर दबाव कम करने की योजना

परियोजना में आठ लेन का आरओबी, दो फ्लाइओवर, तीन माइनर ब्रिज और चार लाइट व्हीकल अंडरपास भी शामिल हैं. इसके साथ पांच किलोमीटर से अधिक लंबी नयी ड्रेनेज व्यवस्था विकसित की जाएगी. इस परियोजना का उद्देश्य एनएच-31 पर यातायात का दबाव कम करना, क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बेहतर करना और भविष्य में बढ़ने वाले यातायात को सुगम बनाना है. वर्ष 2030 तक ट्रैफिक करीब 1.27 लाख से अधिक पीसीयू होने का अनुमान है.

यह भी पढ़े- पटना अब सही में बनेगा 'स्मार्ट', तीन वर्ल्ड क्लास सुविधा जल्द मिलेगी, जानिए पूरी डिटेल

परियोजना की लागत और मॉडल

एनएचएआई के अनुसार परियोजना की वास्तविक सिविल निर्माण लागत करीब 3,442.92 करोड़ रुपये है. इसके अलावा जमीन की लागत करीब 232.29 करोड़ रुपये है. परियोजना को हाइब्रिड एन्युटी मोड (एचएएम) में लागू करने का प्रस्ताव है. इसमें शुरुआत में सरकार की ओर से परियोजना लागत का 40 प्रतिशत निवेश किया जायेगा. शेष 60 प्रतिशत राशि निर्माण एजेंसी लगायेगी. बाद में निर्माण एजेंसी की इस राशि की प्रतिपूर्ति परियोजना के संचालन और रखरखाव की अवधि में अगले 15 वर्षों में ब्याज सहित किये जाने का प्रावधान है.

राज्य सरकार की भूमिका

परियोजना में राज्य सरकार से भी वित्तीय सहयोग मांगा गया है. राज्य सरकार को एसएएससीआइ फंड से परियोजना की सिविल लागत का 25 प्रतिशत, राज्य जीएसटी का नौ प्रतिशत, निर्माण सामग्री पर सीग्नियोरेज शुल्क सहित जरूरत पड़ने पर राज्य की उपयोगिता सेवाओं के स्थानांतरण की लागत का 50 प्रतिशत वहन करने को कहा गया है.

अंतिम मंजूरी का इंतजार

इस एलिवेटेड कॉरिडोर को लेकर एनएचएआइ ने साफ किया है कि परियोजना अभी अप्रेजल के स्तर पर है और इसे अभी तक मंजूरी नहीं मिली है. मंजूरी के बाद आगे की प्रक्रिया में टेंडर और निर्माण एजेंसी का चयन होगा. इसके बाद ही जमीन पर निर्माण कार्य शुरू हो सकेगा.

Alos Read -पटना: इनकम टैक्स गोलंबर पर दो बाइकों में टक्कर, एक युवक घायल, पुलिस ने बचाई जान


प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Krishna kumar

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >