पटना : पेड़ों की लगातार हो रही कटाई पर कोर्ट नाराज

संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब पटना : राजधानी पटना में सड़कों के किनारे लगे पुराने पेड़ों की लगातार की जा रही कटाई को लेकर दायर लोकहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पटना हाइकोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित विभागों से जवाब तलब किया है. जस्टिस ज्योति शरण की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने गौरव सिंह द्वारा […]

संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब
पटना : राजधानी पटना में सड़कों के किनारे लगे पुराने पेड़ों की लगातार की जा रही कटाई को लेकर दायर लोकहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पटना हाइकोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित विभागों से जवाब तलब किया है.
जस्टिस ज्योति शरण की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने गौरव सिंह द्वारा दायर लोकहित याचिका पर सुनवाई करते हुए वन विभाग की ओर से दायर हलफनामे को खारिज कर दिया. साथ ही कोर्ट ने वन विभाग , सड़क निर्माण विभाग एवं शहरी विकास विभाग के प्रधान सचिव को यह बताने को कहा है कि आखिर ऐसी स्थिति क्यों हो रही है.
कोर्ट ने सरकार से जानना चाहा कि लगातार पेड़ों की कटाई किये जाने के बाद पर्यावरण संरक्षण के लिए सरकार द्वारा अब तक क्या कार्रवाई की गयी है. कोर्ट में सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा कि जज के आवासीय परिसर के अंदर के सूखे पेड़ को काटने की अनुमति देने में वन विभाग को एक साल का वक्त लग जाता है, वहीं रोड के किनारे के पेड़ों की कटाई रातों-रात कर दी जाती है. आखिर ऐसा क्यों हो रहा है.
सरकारी अधिकारी दोहरा मापदंड क्यों अपना रहे हैं. कोर्ट ने वन विभाग सहित राज्य सरकार के अन्य संबंधित विभागों के अफसरों की इस तरह की कार्यशैली पर भी गहरी नाराजगी व्यक्त की है. हाइकोर्ट ने 23 अप्रैल को सुनवाई करते हुए शहरी विकास विभाग, वन एवं पर्यावरण विभाग समेत सड़क निर्माण विभाग एवं ऊर्जा विभाग के प्रधान सचिव सहित पटना नगर निगम के आयुक्त से 6 बिंदुओं पर स्पष्ट जवाब मांगा था.
पटना में लगे हरे पेड़ों को एक पहचान अंक क्यों नहीं दिया गया है.
पिछले 2 वर्षों में काटे गये या गिर गये पेड़ों को गिराने की पूर्व अनुमति वन विभाग से ली गयी थी या नहीं.
काटते वक्त विभाग ने इस बात पर गौर किया था कि काटने की बजाय उन पेड़ों को पुनः स्थापित किया जा सकता है. क्या कदम उठाये हैं.
सड़क किनारे खड़े पेड़ों को काटने के बाद दोबारा लगाने के लिए क्या कदम उठाया गया.
पटना में जहां सड़क के किनारे से पूरी तरह पेड़ गायब है वहां इकोलॉजी को संतुलित करने के लिए पेड़ों को क्यों नहीं लगाया गया है.
हरियाली बढ़ाने और पर्यावरण संतुलित रखने के लिए कोई एक्शन प्लान है कि नहीं.
हाइकोर्ट ने इन सभी बिंदुओं पर जवाब देने का निर्देश अधिकारियों को दिया है. अगली सुनवाई गर्मी की छुट्टी के बाद होगी.

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