जस्टिस उदय सिन्हा न्यायिक आयोग की रिपोर्ट सदन के पटल पर रखी गयी
पटना : काम के बदले अनाज योजना का चावल सड़ा नहीं था. डीलर ने इसे कालाबाजार में बेच दिया था. इससे राज्य सरकार को 239 करोड़ 79 हजार 998 रुपये की क्षति हुई है. हालांकि सरकार आयोग की संस्तुति पर 22 करोड़ तीन लाख 13 हजार रुपये की वसूली कर चुकी है. अभी 217 करोड़ की वसूली की जानी है. आयोग ने 1370 रुपये प्रति क्विंटल की दर से राशि की वसूली और 13 रुपये प्रति क्विंटल परिचालन राशि का समायोजन करने की सिफारिश की थी.
बुधवार को विधानसभा में ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री श्रवण कुमार ने राज्य में वर्ष 2002-06 के दौरान काम के बदले अनाज योजना में घोटाला की जांच कर रहे जस्टिस उदय सिन्हा न्यायिक आयोग की रिपोर्ट सदन के पटल पर रखी. संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना एवं काम के बदले अनाज योजना वर्ष (2002-2006) में बरती गयी अनियमितता के कारण सरकार को हुई वित्तीय क्षति के आंकलन और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने के लिये जस्टिस उदय सिन्हा की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग का गठन किया गया था.
जांच आयोग में खुलासा हुआ है कि तत्कालीन एसडीओ, उप विकास आयुक्त, जिला पदाधिकारी और आयुक्त स्तर के पदाधिकारियों ने अपनी ड्यूटी में लापरवाही बरती. इन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई को लिखा गया है. इस मामले में 689 एफआइआर दर्ज की गयी हैं. 5994 पीडीएस डीलर से वसूली की जानी है.
सीए रामाकांत झा, तत्कालीन उप विकास आयुक्त मुंगेर उपेेंद्र कुमार, बीडीओ धरहरा एमके अग्रवाल, राजापाकड़ के नवीन कुमार और वैशाली के तत्कालीन जिला अभियंता शिशिर कुमार के विरुद्ध भी कार्रवाई के निर्देश दिये गये हैं.
