मुजफ्फरपुर शेल्टर होम का मामला : मकान तोड़ने के आदेश पर ट्रिब्यूनल की रोक

शेल्टर होम के मालिक का पक्ष सुन कर ही कोई आदेश पारित करें पटना : मुजफ्फरपुर के चर्चित शेल्टर होम मामले में भवन तोड़ने के आदेश पर ट्रिब्यूनल ने रोक लगा दी है. मुजफ्फरपुर नगर निगम के आदेश को स्थगित करते हुए म्यूनिसिपल बिल्डिंग ट्रिब्यूनलने एक अहम फैसला देते हुए कहा कि वे शेल्टर होम […]

शेल्टर होम के मालिक का पक्ष सुन कर ही कोई आदेश पारित करें
पटना : मुजफ्फरपुर के चर्चित शेल्टर होम मामले में भवन तोड़ने के आदेश पर ट्रिब्यूनल ने रोक लगा दी है. मुजफ्फरपुर नगर निगम के आदेश को स्थगित करते हुए म्यूनिसिपल बिल्डिंग ट्रिब्यूनलने एक अहम फैसला देते हुए कहा कि वे शेल्टर होम के मालिक का पक्ष सुन कर ही कोई आदेश पारित करें.
ट्रिब्यूनल ने यह आदेश शेल्टर होम की मालकिन और ब्रजेश ठाकुर की पत्नी कुमारी आशा की तरफ से दायर याचिका की सुनवाई के बाद दिया है.
यह आदेश पटना हाईकोर्ट के आदेश के बाद आया है. आवेदक की तरफ से बताया गया कि मुजफ्फरपुर नगर निगम ने शेल्टर होम के खिलाफ निगरानी केस दर्ज किया था. उसका कहना था कि विवादित मकान का जी प्लस एक का नक्शा स्वीकृत है, जिसका कागज आवेदिका के पास मौजूद है. परंतु इस भवन के ऊपर के बने मकान का नक्शा का कागज उनके पास नहीं है, क्योंकि उनके पति जेल में हैं.
उनका यह भी कहना था कि विवादित मकान के अगल-बगल में बने मकान की जांच नहीं की जा रहा है. वहीं, आवेदन का विरोध करते हुए मुजफ्फरपुर नगर निगम की तरफ से जिरह करते हुए वकील ने ट्रिब्यूनल को बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने मकान को अवैध करार देते हुए कार्रवाई करने का आदेश दिया था. इसके बाद शेल्टर होम की बिल्डिंग तोड़ने का आदेश दिया गया है.
मुजफ्फरपुर नगर निगम के मकान की संरचना की जांच की तो, पाया कि मकान का तीन तल्ला का निर्माण बिना स्वीकृत नक्शे के कर दी गयी है. इस आधार पर आवेदन को खारिज करने की गुजारिश ट्रिब्यूनल से की गयी.

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