एम्स में एक मशीन के भरोसे 40 मरीज
पटना : आरा जिले की रहने वाले विनोद कुमार के कंधे में पिछले एक साल से दर्द है. प्राइवेट में डॉक्टरों से इलाज कराने के बाद भी उन्हें कोई फायदा नहीं हुआ.
लोगों की सलाह पर वह अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में दिखाने पहुंच गये. पिछले चार दिनों से वह डॉक्टर को दिखाने के लिए एम्स का चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन पीएमआर विभाग में उनको इलाज नहीं मिल पा रहा है. वहीं जब फिजियोथेरेपी विभाग में विनोद पहुंचे तो उनको डेढ़ महीने बाद का नंबर दे दिया गया.
यह स्थिति कई मरीजों के साथ है. बता दें कि एम्स संस्थान के फिजियोथेरेपी विभाग में हर दिन 30 से 40 मरीज दिखाने आते हैं. इसमें अधिकतर मरीजों को थेरेपी की आवश्यकता पड़ती है, लेकिन उचित व्यवस्था नहीं होने से मरीजों को इलाज के लिए इंतजार करना पड़ रहा है.
पीएमआर में मशीन, नहीं हो रहा इलाज
सूत्रों की मानें तो एम्स के पीएमआर विभाग में अल्ट्रासोनिक मशीन लगायी गयी है, लेकिन इसको अभी तक चालू नहीं किया गया है. वहीं फिजियोथेरेपी विभाग में सिर्फ एक अल्ट्रासोनिक मशीन है, लेकिन वहां मरीजों की संख्या अधिक है.
नतीजा एक से डेढ़ महीने बाद नंबर मिल रहा है. अगर पीएमआर विभाग की मशीन से इलाज शुरू हो जाये तो फिजियोथेरेपी विभाग में मरीजों का लोड कम हो जायेगा और वेटिंग लिस्ट भी घट जायेगी. लेकिन मशीन होने के बावजूद इलाज नहीं हो पा रहा है.
