नहीं बता पाये स्रोत, इनकम टैक्स विभाग को मामले की दी सूचना
पटना : पटना जंक्शन से जीआरपी पुलिस ने सोमवार को रात आठ बजे एक सोना कारोबारी को सोमवार की शाम 92.85 लाख रुपये के साथ पकड़ा है.
जीआरपी की औचक पूछताछ के दौरान वह धरा गया. मामले की जांच इनकम टैक्स विभाग को सौंपी गयी. प्रारंभिक पूछताछ में सोना कारोबारी आय का स्रोत नहीं बता सका है. पुलिस ने उसे हिरासत में ले रखा है.
पुलिस सूत्रों के मुताबिक 8:00 बजे पटना जंक्शन के मध्य फुट ओवर ब्रिज पर जीआरपी पुलिस औचक निरीक्षण कर रही थी.निरीक्षण के दौरान जीआरपी पुलिस ने रेल सुरेंद्र कुमार पर शक के आधार पर बैग चेक करने की कोशिश की गयी, तो यात्री ने कहा बैग में शराब नहीं कैश 10 लाख रुपये है. बैग में कैश सुनते ही पुलिस ने सुरेंद्र को हिरासत में ले लिया और जीआरपी थाना ले आयी. इसकी क्रम में सुरेंद्र कुमार के मालिक और सोना व्यवसायी भारतीस कुमार पहुंचे, जो बैग में 40 लाख कैश होने की बात कहने लगे. इसके बाद पुलिस का संदेह और बढ़ गया.
पुलिस भारतीस से गहन पूछताछ करने लगी, तो उसने बताया कि बैग में 92.85 लाख रुपये है. कैश से भरा बैग बरामद होते ही रेल एसपी अशोक कुमार सिंह ने आयकर अधिकारी को सूचना दिया. रेल एसपी की सूचना पर आयकर अधिकारी ऋषिकेश पांडेय जीआरपी थाना पहुंचे और बरामद रुपये की खोजबीन शुरू कर दी.
ज्वेलरी खरीदने जा रहे थे कोलकाता
राजेंद्र नगर रोड-नंबर एक स्थित ओम रेणुका अपार्टमेंट के रहने वाले और बाकरगंज के साहू कॉम्प्लेक्स स्थित नेहा कील भंडार के मालिक भारतीस कुमार अपने कर्मी के साथ हरिद्वार-हावड़ा एक्सप्रेस से कोलकाता जाने के लिए जंक्शन पहुंचे थे.
जंक्शन स्थित जेनरल काउंटर से जेनरल टिकट बुक कराया और मध्य फूट ओवर ब्रिज के रास्ते प्लेटफॉर्म संख्या 5-6 की ओर जा रहे थे, तभी जीआरपी के गिरफ्त में आ गये. पुलिस की पूछताछ में भारतीस ने बताया कि कोलकाता ज्वेलरी मार्केट के तीन-चार दुकानों से ज्वेलरी की खरीदारी करने जा रहे थे. यह रुपये ग्राहकों व दुकान की बिक्री की है.
नहीं दे सके जब्त रुपये का हिसाब : रेल एसपी की सूचना पर आयकर अधिकारी पहुंचे और सोना व्यवसायी भारतीस कुमार से रुपये से संबंधित पूछताछ करने लगे.
सोना व्यवसायी ने दुकान के प्रोपराइटर, फॉर्म हाउस के मालिक और आय-व्यय का लेखा-जोखा से संबंधित सवालों के जवाब नहीं दे सकें. इससे आयकर अधिकारी ने सीजर लिस्ट बना कर बैग सहित कैश जब्त करते हुए जीआरपी से कहा कि अगले दो-तीन दिनों तक भारतीस व सुरेंद्र को हिरासत में रखें. इस दौरान बरामद रुपये की श्रोत और हिसाब की छानबीन की जायेगी.
