चिकित्सा व इंजीनियरिंग क्षेत्र में रोजगार के लिए गोल्डन गेट साबित होगा बदलाव

पटना : जेईई और नीट के साल में अब दो बार परीक्षा आयोजित होने से विदेशों में इंजीनियरिंग व मेडिकल की उच्च शिक्षा ग्रहण करने जानेवाले विद्यार्थियों के लिए अब ज्यादा मौके हासिल हो सकेंगे. दरअसल यह दोनों एग्जाम ग्लोबल स्तर पर बेहद प्रतिष्ठित माने जाते हैं. कुल मिला कर विदेशों में भारतीय प्रतिभाओं को […]

पटना : जेईई और नीट के साल में अब दो बार परीक्षा आयोजित होने से विदेशों में इंजीनियरिंग व मेडिकल की उच्च शिक्षा ग्रहण करने जानेवाले विद्यार्थियों के लिए अब ज्यादा मौके हासिल हो सकेंगे. दरअसल यह दोनों एग्जाम ग्लोबल स्तर पर बेहद प्रतिष्ठित माने जाते हैं.
कुल मिला कर विदेशों में भारतीय प्रतिभाओं को अधिक अवसर मिल सकेंगे. एक्सपर्ट्स के मुताबिक दुनिया भर में खासतौर पर विकसित व खाड़ी देशों में भारतीय इंजीनियर्स व डॉक्टर्स की खूब मांग है. इस तरह नीट क्वालिफाइ विदेशों में प्रैक्टिस के लिए अधिक-से-अधिक जा सकेंगे. कुल मिला कर इस बदलाव की सबसे अहम औपचारिक वजह देश में इंजीनियर्स व चिकित्सकों की कमी को पूरा करना है.
इस तरह यह बदलाव परीक्षार्थियों के बीच पनपने वाली निराशाओं को खत्म करने में मददगार साबित हो सकता है.
आबादी के हिसाब से चिकित्सकों की भारी कमी है
रिसर्च व डेवलपमेंट एक्सपर्ट आनंद वत्स के मुताबिक भारत में आबादी के हिसाब से चिकित्सकों की भारी कमी है. अंतरराष्ट्रीय स्टेंडर्ड के हिसाब से एक हजार जनसंख्या पर एक चिकित्सक होना चाहिए. भारत में यह अनुपात काफी कम है. भारत में अभी 1800 की आबादी पर एक चिकित्सक है. वर्ष 2020 में यह अनुपात बढ़ कर 2000 की आबादी पर एक चिकित्सक तक हो जाने की आशंका है. चूंकि, देश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में हर साल अधिकतर सीटें खाली रह जाती हैं.
लिहाजा साल में दो बार परीक्षा होने से चिकित्सकों की इस कमी को पूरा किया जा सकेगा. जाहिर है कि मेडिकल क्षेत्र में रोजगार की संभावना तलाश रहे छात्रों के लिए यह बदलाव ‘ गोल्डन गेट ‘ साबित हो सकता है. कमोबेश इसी तरह की संभावनाएं इंजीनियरिंग के क्षेत्र में बनती हैं. जानकारों के मुताबिक इस बदलाव से सामान्य परीक्षार्थियों के साथ-साथ किसी कारणवश ड्रापआउट होनेवाले विद्यार्थियों को अधिक फायदा हो सकता है.
सीटों का बंटवारा होगा या सीटें बढ़ेंगी यह स्पष्ट नहीं
मेडिकल की तैयारी करानेवाली संस्थान गोल इंस्टीट्यूट के संचालक बिपिन कुमार सिंह कहते हैं कि अब साल में दो बार परीक्षा होंगी. लेकिन, सीटों का बंटवारा होगा या सीटें बढ़ेंगी, यह स्पष्ट नहीं है. क्योंकि, अभी तक इयर वाइज एग्जाम हो रहे हैं. हो सकता है इसके बाद सेमेस्टर सिस्टम करके एक साथ दो सेशन की पढ़ाई करायी जाये. इससे कॉलेजों पर लोड बढ़ेगा.
यह आशंकाएं भी हैं
पर्याप्त व्यवस्था करनी होगी सुनिश्चित
देश में पढ़ाई के लिए भी अगर दो बार परीक्षा होगी, तो पर्याप्त व्यवस्था सरकार को सुनिश्चित करनी होगी. नहीं तो छात्रों के साथ-साथ शिक्षकों के लिए भी यह सिरदर्द हो जायेगा. एक ही इन्फ्रास्ट्रक्चर में अगर ज्यादा छात्रों को एकोमोडेट करने की मंशा सरकार की है तो फिर इससे कुछ ज्यादा छात्र मेडिकल में पढ़ाई कर पायेंगे.
यह तो हो जायेगा, लेकिन फिर क्वालिटी पर प्रभाव पड़ना लाजिमी है. क्योंकि, शिक्षक, कॉलेज व इन्फ्रास्ट्रक्चर भी सीमित है. अगर शिक्षकों से अधिक ड्यूटी ली जायेगी और क्वालिटी पर असर पड़ेगा. लेकिन, यहां यह भी कहना होगा कि यह तो अभी शुरुआती प्रभाव समझ में आ रहे हैं, लेकिन जैसे-जैसे सरकार पूरी तरह से सारे नियमों को स्पष्ट करेगी कि इसके पीछे उनका ध्येय क्या है, तो स्थिति और स्पष्ट होगी.
एक अंक या एक % के अंतर से भी कॉलेज नहीं मिल पाता
दूसरा कि अलग-अलग पांच दिन परीक्षा लिये जाने पर अलग-अलग प्रश्नपत्र होंगे. इनका एक प्रश्न भी छात्रों के रिजल्ट पर प्रभाव डाल सकते हैं.
एक अंक या एक प्रतिशत के अंतर से भी छात्रों को कॉलेज नहीं मिल पाते. कहीं ऐसा न कि इससे मेधावी छात्र ही प्रभावित हो जाये. दूसरी समस्या बड़ी ऑनलाइन काउंसेलिंग पूरी तरह से करने पर ग्रामीण छात्रों को दिक्कत हो जायेगी, जो पहले से ही काफी परेशानी में हैं.

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