बिहार : नकली दवाओं का कारोबार, कबाड़ के भाव में खरीदीं एक्सपायर्ड दवाएं ब्रांडेड रैपर लगाया और बेच दीं

रुपये की नकली दवाएं जब्त पटना : राजधानी पटना में गुरुवार को दवाओं के काले धंधे का खुलासा हुआ है. औषधि विभाग ने छापेमारी में ब्रांडेड कंपनियों की रैपर लगी एक्सपायर्ड और नकली दवाओं का जखीरा जब्त किया गया है. नकली दवाओं को ब्रांडेड कंपनियों का रैपर लगाने का यह खेल कंकड़बाग स्थित अशोक नगर […]

रुपये की नकली दवाएं जब्त
पटना : राजधानी पटना में गुरुवार को दवाओं के काले धंधे का खुलासा हुआ है. औषधि विभाग ने छापेमारी में ब्रांडेड कंपनियों की रैपर लगी एक्सपायर्ड और नकली दवाओं का जखीरा जब्त किया गया है. नकली दवाओं को ब्रांडेड कंपनियों का रैपर लगाने का यह खेल कंकड़बाग स्थित अशोक नगर रोड नंबर 14 में तीन कमरों के एक मकान से चल रहा था.
गुप्त सूचना के आधार पर औषधि विभाग ने पुलिस के साथ मिल कर राजधानी व इसके आसपास के इलाकों में अभियान चलाया. इसी क्रम में दोपहर में अशोक नगर रोड नंबर 14 में एक घर में छापेमारी की गयी. इसमें पता चला कि संजय कुमार नाम का एक व्यक्ति नकली दवाओं को बनवा कर बेचने का कारोबार करता है.
हालांकि छापेमारी के दौरान वह फरार हो गया. ड्रग निरीक्षक सच्चिदानंद प्रसाद के बयान के आधार पर गुरुवार की देर रात प्राथमिकी दर्ज कर ली गयी है. इस मामले में संजय कुमार को नामजद आरोपित बनाया गया है.
किराये के मकान में करता था कारोबार : आरोपित संजय कुमार अशोक नगर में किराये के मकान में नकली दवाओं को बेचने का काम करता था. इंदिरा राय के मकान में उसने तीन कमरे किराये पर ले रखा था. वह पटना में ही नकली दवाओं को बनवा कर किराये के मकान में स्टॉक करता था.
जहां से पूरे बिहार में सप्लाई होती थी. पुलिस मकान मालिक से संजय के बारे में और पूछताछ कर रही है. संजय मूल रूप से नवादा का रहने वाला है. जिस समय छापेमारी हुई तो उसका कमरा बंद था. जिसके कारण संभावना यह भी जतायी जा रही है कि छापेमारी होने की उसे भनक लग गयी थी और फिर वह फरार हो गया.
ब्रांडेड कंपनियों का लगाता था रैपर
छापेमारी में पकड़ी गयी 25 लाख की अधिकांश दवाएं ब्रांडेड कंपनियों की पायी गयी हैं. पांच तरह की ब्रांडेड कंपनियों का रैपर लगा कर वह नकली दवाओं को बेचता था. छापेमारी में ब्रांडेड कंपनियों के रैपर भी बरामद हुए हैं. पकड़ी गयी दवाओं में गैस, दर्द, हृदय रोग, हड्डी रोग व बुखार की दवाएं थीं. मार्केट में अधिक इस्तेमाल होने वाली दवाएं जैसे-पेन 40, पेन टॉप, क्रोसिन, पैरासीटामॉल, पेन डी, खांसी आदि की नकली दवाएं भी पकड़ी गयीं.
कंकड़बाग के अशोक नगर में औषधि विभाग की
छापेमारी, संजय कुमार चलाता था कारोबार
ब्रांडेड कंपनियों का रैपर लगा कर बनाता था नकली दवा, आरोपित संजय फरार
हो सकते हैं बड़े खुलासे
गुप्त सूचना के आधार पर हमने करीब 25 लाख रुपये की दवाएं जब्त की हैं. इनमें पांच तरह की ब्रांडेड कंपनियों के रैपर का इस्तेमाल होता था. जांच के बाद इसमें कई बड़े खुलासे हो सकते हैं.
-डॉ सच्चिदानंद विक्रांत, ड्रग इंस्पेक्टर औषधि विभाग
कबाड़ के भाव दवाएं
औषधि विभाग को संदेह है कि संजय कुमार ने नकली दवा बनवाने व उसकी सप्लाई करने के लिए कई एजेंटों को भी इस काम में शामिल कर रखा है. वह एक्सपायर्ड दवाओं को कबाड़ी के भाव में थोक दुकानदारों से खरीद लेता है. बाद में इन्हीं दवाओं पर नामी-गिरामी कंपनियों का रैपर लगा कर उसे फिर से मार्केट में सप्लाई कर देता है.
इस धंधे में संजय आठ साल से अधिक समय से लगा हुआ है. उसके गिरोह में दो दर्जन से अधिक लोग हैं. इनमें कई थोक दुकानदार भी हैं.
गोदाम पकड़ाया, अभी फैक्टरी पकड़ानी है बाकी
संजय कुमार ने अशोक नगर स्थित किराये के फ्लैट में गोदाम बना रखा था. जबकि उसकी फैक्ट्री पटना में कहीं और है. फिलहाल फैक्टरी के संबंध में जानकारी नहीं मिल पायी है. संजय कुमार के पकड़े जाने के बाद ही जानकारी संभव है. इसके अलावा वहां बरामद दवा के कार्टन पर बिहार के कई जिलों के लोगों के नाम व पता अंकित था. जिसके कारण यह संभावना जतायी जा रही है कि उक्त दवाएं बिहार के कई जिलों में भी भेजी जाती थी. कुछ दवाओं पर लेबल नहीं थे.
अवैध व नकली दवाओं का करोड़ों का कारोबार
पटना : बिहार में अवैध व नकली दवाओं का कारोबार करोड़ों में हो रहाहै. बाजार में नकली विटामिन की गोलियों से लेकर जीवनरक्षक दवाएं, टेबलेट और सिरप ब्रांडेड कंपनियों के बनाये जा रहे है और उन्हें बाजार में सप्लाई की जा रही है. खास कर ग्रामीण इलाकों में इसकी सप्लाई काफी है. यह दवा स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है और जानलेवा है. दीगर बात यह है कि इन दवाओं के सेवन से मर्ज ठीक होने के बजाय कई रोगों को आमत्रंण देता है. अब तक पटना से 15 कराेड़ की नकली दवाएं बरामद हो चुकी है.
दवाओं का सबसे बड़ा बाजार
देश भर में सबसे अधिक नकली दवाओं का निर्माण दिल्ली के नोयडा और गुड़गांव इलाके में किया जाता है. जबकि बिक्री सबसे ज्यादा बिहार में की जाती है. कंकड़बाग में पकड़ी गयी नकली दवाओं का यह पहला मामला नहीं है.
फिजिशियन सैंपल की है काफी डिमांड
पकड़े गये खेप में फिजिशियन सैंपल भी काफी थे. आमतौर पर लोग फिजिशियन सैंपल को ऑरिजनल मानते है. इसलिए दवा माफियाओं ने नकली दवाओं के बनाने के बाद उसके रैपर पर फिजिशियन सैंपल भी लिखना शुरू कर दिया है. ताकि लोगों को विश्वास हो कि दवा असली है.

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