पटना : जानवरों को स्वस्थ रखने के लिए देशी चिकित्सा के साथ अल्पाहार का भी इस्तेमाल हो रहा है. सप्ताह में एक दिन सोमवार को बाघ, शेर जैसे बड़े मांसाहारी जानवरों को बिल्कुल भूखा रखा जाता है, जबकि लकड़बग्घा, लोमड़ी, तेंदुआ, सियार जैसे छोटे मांसाहारी जानवरोंं को मुर्गी का अंडा जैसा अल्पाहार दिया जाता है.
गेंडा, जिराफ, हाथी, दरियाई घोड़ा जैसे बड़े शाकाहारी जानवर को भी पूरी तरह भूखा रखा जाता है. हिरण, चीतल, सांभर और जेब्रा को कम मात्रा में हरी घास व बरसीम दिया जाता है. हल्दी, आजवाइन जैसे परंपरागत मसालों व औषधीय पौधों का भी जानवरों की चिकित्सा और स्वास्थ्यवर्धन में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है.
पाचन तंत्र दुरुस्त रखने में मिलती है सहायता
अल्पाहार और अनाहार के इस्तेमाल से जानवरों के पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में सहायता मिलती है. इससे जानवर कई तरह की बीमारियों से बचे रहते हैं क्योंकि पशुओं को होनेवाली ज्यादातर बीमारियों के मूल में खान-पान संबंधी अनियमितता होती है. पशु रोग विशेषज्ञों की मानें तो जरूरत से कम भोजन देना जानवरों के स्वास्थ्य के लिए जितना नुकसानदेह है उससे भी अधिक जरूरत से अधिक भोजन देना.
शावकों और छोटे पक्षियों को दी जाती पूरी खुराक
सोमवार को व्यस्क जानवरों के लिए अल्पाहार या निराहार होने के बावजूद छोटे शावकों को पूरी खुराक दी जाती है. छोटे पक्षियों यथा कबूतर, बत्तख आदि को भी इस दौरान पूरी खुराक दी जाती है जबकि मोर, ईमू, शुतुरमूर्ग, केसवरी जैसी बड़े पक्षियों को अल्पाहार दिया जाता है. जानवरों के इलाज में देशी पौधों और जड़ी बूटियों का इस्तेमाल भी किया जाता है.
केज में छिड़का जाता हल्दी पाउडर
सोमवार को जू के हर इनक्लोजर और केज की पूरी तरह से सफाई की जाती है. इसके साथ ही छोटे जानवरों के केज और बड़े जानवरों के नाइट सेल्टर में हल्दी पाउडर का छिड़काव किया जाता है. इससे केज और नाइट सेल्टर में मौजूद संक्रमण फैलाने वाले बैक्टिरिया और वायरस डिसइंफेक्ट हो जाते हैं.
साथ ही, पशुओं के शरीर के घाव भी इससे ठीक हो जाते हैं क्योंकि जमीन पर लेटने के क्रम में उनके शरीर और उसके कटे छिले हिस्सों में भी हल्दी लग जाती है.
स्वास्थ्यरक्षण में होती सुविधा
पशुओं को समुचित भोजन और पोषक सप्लीमेंट देने के साथ साथ सप्ताह में एक दिन अल्पाहार या निराहार पर भी रखा जाता है. इससे उनके स्वास्थ्यरक्षण में सुविधा होती है.
-डाॅ समरेंद्र बहादुर सिंह, पशु चिकित्सक, पटना जू
