प्रतिनिधि नवादा नगर जिले के सदर अस्पताल की बदहाल सफाई व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है. अस्पताल के महिला प्रसूति वार्ड के सामने पिछले कई सप्ताह से शौचालय की सेप्टिक टंकी का गंदा पानी मुख्य रास्ते पर जमा रहने से मरीजों, गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं और उनके परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था. लगातार जलजमाव और दुर्गंध के कारण अस्पताल का वातावरण अस्वच्छ हो गया था, जिससे संक्रमण फैलने की आशंका भी बनी हुई थी. दूषित पेयजल की भी आशंका स्थिति तब और गंभीर हो गई जब जलजमाव के पास पेयजल आपूर्ति की पाइपलाइन के क्षतिग्रस्त होने की बात सामने आई. स्थानीय लोगों का आरोप है कि फटी हुई पाइपलाइन में गंदा पानी मिलने की आशंका बनी हुई थी, जिससे अस्पताल में सप्लाई होने वाला पानी भी दूषित हो सकता था. यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया जाता तो मरीजों और उनके परिजनों के स्वास्थ्य पर इसका गंभीर असर पड़ सकता था.
जीविका दीदियों को सौंपी गई थी सफाई की जिम्मेदारी गौरतलब है कि 1 दिसंबर 2025 को जिलाधिकारी के निर्देश पर जीविका महिला विकास स्वावलंबी सहकारी समिति लिमिटेड की जीविका दीदियों को सदर अस्पताल की साफ-सफाई की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. कुल 33 जीविका दीदियां प्रतिदिन तीन शिफ्ट में अस्पताल परिसर, विभिन्न वार्डों, फैब्रिकेटेड वार्ड, इमरजेंसी और शौचालयों की नियमित सफाई करनी है. उन्हें अस्पताल परिसर में बायो-मेडिकल वेस्ट के सुरक्षित निस्तारण, नियमित सफाई, जलजमाव हटाने और स्वच्छ वातावरण बनाए रखने के लिए विशेष निर्देश भी दिए गए थे. इसके बावजूद प्रसूति वार्ड के सामने कई सप्ताह तक गंदा पानी जमा रहने से सफाई व्यवस्था की निगरानी और कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे.
डीपीएम ने संभाली कमान, शुरू हुआ समाधान मामले की जानकारी मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग के डीपीएम अमित कुमार ने स्वयं पहल करते हुए स्थिति का जायजा लिया. उनके निर्देश पर तत्काल सफाई अभियान चलाया गया और जमा गंदे पानी को हटाने का कार्य शुरू कराया गया. डीपीएम अमित कुमार ने बताया कि समस्या के स्थायी समाधान के लिए संबंधित स्थान पर नाली का निर्माण कराया जा रहा है, ताकि भविष्य में पानी जमा न हो. इसके लिए मजदूरों को बुलाकर कार्य शुरू करा दिया गया है. उन्होंने कहा कि अस्पताल परिसर में स्वच्छता बनाए रखना विभाग की प्राथमिकता है और मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होने दी जाएगी.
मरीजों की मांग स्वच्छता पर हो नियमित निगरानी मरीजों और स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल में सफाई व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसकी नियमित निगरानी भी होनी चाहिए. उनका कहना है कि सदर अस्पताल जिले का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है, जहां प्रतिदिन सैकड़ो मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं. ऐसे में स्वच्छ वातावरण, शुद्ध पेयजल और बेहतर साफ-सफाई सुनिश्चित करना स्वास्थ्य विभाग की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है. लोगों ने मांग की है कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो, इसके लिए नियमित निरीक्षण और जवाबदेही तय की जाए.
