Nawada News : एनएच-20 को अतिक्रमण मुक्त कराने की कार्रवाई के बाद सड़क किनारे बसे दर्जनों दलित परिवारों के सामने आवास का संकट खड़ा हो गया है. सीतारामपुर और अमीरका बिगहा में झोपड़ियां हटाए जाने से प्रभावित परिवार शुक्रवार को समाहरणालय पहुंचे. उन्होंने जिलाधिकारी को लिखित आवेदन देकर रहने के लिए स्थायी भूमि उपलब्ध कराने की मांग की.
बरसात में बढ़ी परेशानियां
पीड़ित परिवारों का कहना है कि बरसात के मौसम में झोपड़ियां टूट जाने के बाद परिवार के साथ रहना बेहद मुश्किल हो गया है. सिर छिपाने के लिए सुरक्षित जगह नहीं होने के कारण छोटे बच्चों के साथ जीवन-यापन करना कठिन हो गया है. लोगों ने मानवीय आधार पर स्थायी जमीन उपलब्ध कराने की मांग की.
वैकल्पिक व्यवस्था करने की उठाई मांग
आवेदन देने पहुंचे लोगों ने बताया कि वे लंबे समय से सड़क किनारे झोपड़ी बनाकर किसी तरह जीवन-यापन कर रहे थे. अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद अब उनके सामने रहने की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है. उन्होंने कहा कि प्रशासन सड़क को अतिक्रमण मुक्त करे, लेकिन प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए वैकल्पिक व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए.
दर्जनों लोगों ने सौंपा आवेदन
जिलाधिकारी को आवेदन देने वालों में सोहन मांझी, प्रमोद साव, नीतीश मांझी, पंकज मांझी, जीतन मांझी, सतीश मांझी, सुबोध मांझी, शकुंती देवी, असो देवी, कालो देवी और रानी देवी समेत दर्जनों लोग शामिल थे. उन्होंने प्रशासन से जल्द समाधान निकालने की मांग की, ताकि प्रभावित परिवारों को रहने के लिए सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराया जा सके.
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