बैठक कर हड़ताल की दी चेतावनी

कैबिनेट के निर्णय के विरोध में सीओ, राजस्वकर्मी व अमीन लामबंद

कैबिनेट के निर्णय के विरोध में सीओ, राजस्वकर्मी व अमीन लामबंद हरिश्चंद्र स्टेडियम में हुई अहम बैठक, हिसुआ व नरहट सीओ ने रखी स्पष्ट राय प्रतिनिधि, नवादा नगर. बिहार सरकार की कैबिनेट बैठक में 29 जनवरी को लिये गये निर्णय 23 और 30 के विरोध में जिले के अंचलाधिकारी, राजस्व कर्मचारी और सरकारी अमीन एकजुट हो गये हैं. शुक्रवार को शहर के हरिश्चंद्र स्टेडियम स्थित खेल भवन के सभागार में इन सभी की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें सरकार की नीतियों के खिलाफ गहरा असंतोष व्यक्त किया गया और जरूरत पड़ने पर हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी गयी. बैठक में हिसुआ सीओ सुमन सौरभ और नरहट सीओ मनीष कुमार ने भी अपनी बात स्पष्ट शब्दों में रखी. हिसुआ सीओ सुमन सौरभ ने कहा कि कैबिनेट के हालिया निर्णयों से बिहार राजस्व सेवा के अधिकारियों के पदोन्नति मार्ग और कार्यक्षेत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा. उन्होंने कहा कि यह निर्णय न केवल बिहार राजस्व सेवा नियमावली 2010 की भावना के विपरीत है, बल्कि माननीय पटना उच्च न्यायालय के पूर्व आदेशों की भी अनदेखी करता है. नरहट सीओ मनीष कुमार ने कहा कि राजस्व से जुड़े तकनीकी और संवेदनशील कार्यों को अन्य संवर्गों को सौंपे जाने से प्रशासनिक गुणवत्ता प्रभावित हो रही है. उन्होंने बताया कि दाखिल-खारिज, जमाबंदी अद्यतन, म्यूटेशन अपील और भूमि विवाद निबटारे जैसे मामलों में पहले से ही कार्यभार अधिक है, ऐसे में सेवा शर्तों में अस्थिरता कर्मचारियों का मनोबल गिरा रही है. बैठक के बाद बिहार राज्य भूमि सुधार कर्मचारी संघ (महासंघ गोपगुट) के जिलाध्यक्ष नंदन कुमार ने मीडिया से स्पष्ट कहा कि यदि सरकार शीघ्र कर्मचारियों की मांगों पर निर्णय नहीं लेती है, तो आंदोलन अपरिहार्य होगा. उन्होंने कहा कि निर्णय संख्या 23 के तहत भूमि सुधार उप समाहर्ता पदनाम में बदलाव और निर्णय संख्या 30 के तहत बिहार प्रशासनिक सेवा संवर्ग में 101 नये पदों के सृजन से राजस्व सेवा के भविष्य पर प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया है. इनकी प्रमुख मांगें जिलाध्यक्ष ने बताया कि कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में गृह जिला में पदस्थापन, वेतनमान 1900 से बढ़ाकर 2800 करना, सेवा संपुष्टि, अतिरिक्त पंचायतों का प्रभार हटाना, रिक्त पदों की शीघ्र बहाली, कार्यस्थल पर सुरक्षा की गारंटी, बायोमेट्रिक उपस्थिति से छूट, एसीपी-एमएसीपी का लाभ, पुरानी पेंशन योजना की बहाली, ऑनलाइन कार्यों के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराना, क्षेत्र भ्रमण के लिए मोटरसाइकिल की व्यवस्था तथा 10 वर्ष की सेवा पूर्ण करने वाले कर्मियों को पदोन्नति देना शामिल हैं. आंदोलन की होगी शुरुआत बैठक में मौजूद अधिकारियों और कर्मियों ने एक स्वर में कहा कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति या पद के खिलाफ नहीं, बल्कि सेवा शर्तों की रक्षा, संवैधानिक अधिकारों और न्यायालय के आदेशों के सम्मान के लिए है. यदि सरकार संवाद के माध्यम से समाधान नहीं निकालती है, तो जिले से आंदोलन की शुरुआत की जायेगी. मौके पर सीओ समेत जिले भर के राजस्वकर्मी अमित कुमार, सुजीत कुमार, अंतिमा कुमारी, प्रियंका कुमारी आदि मौजूद रहे.

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Author: VISHAL KUMAR

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