नवादा डीएम के निर्देश पर शिक्षा विभाग के डीपीओ स्थापना शिवकुमार वर्मा ने मंगलवार को सिरदला प्रखंड के उच्च माध्यमिक विद्यालय लौंद का गहन निरीक्षण किया. यह जांच स्थानीय ग्रामीणों और विधायक विमल राजबंशी की शिकायत के आधार पर की गयी. जांच के दौरान विद्यालय में व्यवस्था से संबंधित कई बिंदुओं की पड़ताल की गयी.
शीशम के पेड़ काटने, विकास कोष में गड़बड़ी और अवैध वसूली का आरोप
ग्रामीणों ने शिकायत में आरोप लगाया था कि विद्यालय परिसर में लगे करीब 15 विशाल शीशम के पेड़ों को राजस्व अधिकारी की अनुमति के बिना प्रभारी प्रधानाध्यापक अनिल प्रसाद और उनके समर्थकों द्वारा कटवाकर बेच दिया गया.
इसके अलावा विद्यालय विकास मद की राशि, नवनिर्मित भवन की रंगाई-पुताई, शौचालय, पेयजल व्यवस्था सहित अन्य मदों में कथित गड़बड़ी और सरकारी राशि के गबन का आरोप लगाया गया था. स्कूली बच्चों से कथित तौर पर नाजायज राशि वसूली की शिकायत भी की गयी थी.
शिक्षकों के दस्तावेजों से लेकर अभिलेखों और कोष की हुई पड़ताल
डीपीओ ने जांच के दौरान विद्यालय में कार्यरत शिक्षक-शिक्षिकाओं के योगदान से लेकर उनके चयन तक के दस्तावेजों की जांच की. विद्यालय के विभिन्न कोष एवं पंजी, ऑडिट पंजी सहित अन्य अभिलेखों का भी निरीक्षण किया गया जांच के दौरान विद्यालय में विद्यार्थियों के लिए समुचित शौचालय की व्यवस्था नहीं होने की बात सामने आयी.
शिक्षा मंत्री कार्यालय के निर्देश पर जांच, रिपोर्ट के आधार पर होगी कार्रवाई
बताया गया कि प्रभारी प्रधानाध्यापक अनिल प्रसाद वर्ष 2001 से विद्यालय में कार्यरत हैं और वर्ष 2018 से प्रभारी प्रधानाध्यापक के पद पर कार्यरत हैं. डीपीओ शिवकुमार वर्मा ने बताया कि शिक्षा मंत्री बिहार सरकार मिथिलेश तिवारी के कार्यालय से प्राप्त पत्र के निर्देश पर विद्यालय की जांच की गयी है.
विद्यालय के सभी प्रकार के कोष एवं पंजी की जांच की गयी है. जांच रिपोर्ट उच्च अधिकारियों तथा शिक्षा मंत्री को सौंपी जाएगी. जांच में यदि किसी प्रकार की वित्तीय या अन्य अनियमितता प्रमाणित होती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.
प्रभारी प्रधानाध्यापक ने आरोपों को नकारा, लिखित में देंगे जवाब
इधर, प्रभारी प्रधानाध्यापक अनिल प्रसाद ने ग्रामीणों के आरोपों को गलत बताया. उन्होंने कहा कि कुछ ग्रामीणों द्वारा व्यक्तिगत कारणों से आरोप लगाया गया है. उनके द्वारा किसी प्रकार की राशि का गबन नहीं किया गया है. डीपीओ स्तर से की गयी जांच और स्पष्टीकरण का जवाब वे लिखित रूप में देंगे.
