बिहारशरीफ : घर-घर जाकर मरीजों को ढूंढने में लगी हैं आशा. गांव,कसबों से लेकर टोलों में जा रही आशा. घरों के दरवाजे पर हर दिन दस्तक दे रहीं आशा कार्यकर्ता.उनकी पैनी नजर है लेप्रोसी एमबी व चाइल्ड रोगियों के ऊपर. इसका मुख्य उद्देश्य है इस बीमारी पर पूरी तरह से काबू पाने का. पौ फटते ही फिल्ड में जाकर एेसे मरीजों की पहचान करने में लग जाती हैं. वैसे तो राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के अवसर 30 जनवरी से ही पूरे जिलेभर में राष्ट्र अभियान के तहत स्पर्श लेप्रोसी जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है.
घर-घर जाकर मरीजों को ढूंढ रही हैं आशा
बिहारशरीफ : घर-घर जाकर मरीजों को ढूंढने में लगी हैं आशा. गांव,कसबों से लेकर टोलों में जा रही आशा. घरों के दरवाजे पर हर दिन दस्तक दे रहीं आशा कार्यकर्ता.उनकी पैनी नजर है लेप्रोसी एमबी व चाइल्ड रोगियों के ऊपर. इसका मुख्य उद्देश्य है इस बीमारी पर पूरी तरह से काबू पाने का. पौ फटते […]

पूर्व प्रतिवेदन के आलोक में हो रहा सर्वे
जिले के अस्पतालों में कार्यरत पारा मेडिकल वर्करों व अचिकित्सक सहायकों से प्राप्त प्रतिवेदन के आलोक में जिला लेप्रोसी निवारण विभाग की ओर से सर्वे कार्य घर-घर जाकर किया जा रहा है. इस कार्य को मृर्तरूप देने में जिले की आशा कार्यकर्ता लगी है. जिन क्षेत्रों में चाइल्ड व एमबी के अधिक मरीज मिलने की रिपोर्ट विभाग को प्राप्त हुई थी़
14 फरवरी तक उपलब्ध करायें रिपोर्ट
ऐसे गांव व टोलों की सूची बनायी गयी है़ संबंधित गांव में आशा जाकर चाइल्ड व एमबी के रोगियों को पहचान कर रही है़ संदिग्ध रोगियों की सूची बनाने का निर्देश आशा कार्यकर्ताओं को दिया गया है़ सूचीबद्ध संदिग्ध मरीजों की रिपोर्ट 14 फरवरी तक जिला लेप्रोसी निवारण कार्यालय को उपलब्ध कराने को कहा गया है ताकि ऐसे मरीजों का पंजीयन कर उसका चिकित्सा सेवा शुरू की जा सके़
जिला लेप्रोसी निवारण पदाधिकारी डाॅ रवींद्र कुमार व चिकित्सा पर्यवेक्षक उमेश प्रसाद ने बताया कि पंजीकृत रोगियों को विभाग की ओर से नि:शुल्क दवाईंयां उपलब्ध करायी जायेंगी़
दो हजार से अधिक जगहों में हुईं सभाएं
स्पर्श लेप्रोसी जागरूकता कार्यक्रम के तहत अबतक 20507 जगहों पर अब तक जागरूकता सभाएं आयोजित की जा चुकी हैं. इन सभाओं में वार्ड सदस्यों से लेकर ग्रामीणों तक को जागरूक करने का काम किया गया है़ इन लोगों को लेप्रोसी के लक्षण व बचाव की जानकारियां पारा मेडिकल वर्करों द्वारा दी जा रही है़ अब 1.18 लाख से अधिक लोगों को जागरूक करने का काम किया गया है. यह कार्यक्रम 13 फरवरी तक निरंतर चलता रहेगा.