ट्रंप ने कही ऐसी बात, बुरी तरह असहज हुईं जापानी पीएम, ईरान युद्ध की चर्चा में उभारा 85 साल पुराना दर्द

Trump Makes Japan PM Takaichi Uneasy: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इन दिनों अपने ईरान अभियान के लिए दुनिया भर से समर्थन जुटाने का प्रयास कर रहे हैं. इसी सिलसिले में उनसे मिलने जापान की पीएम साने तकाइची वाशिंगटन डीसी पहूंचीं. लेकिन ट्रंप ने पीएम तकाइची के साथ बैठक के दौरान ऐसी बात की, जिससे वह सबके सामने बुरी तरह असहज हो गईं.

Trump Makes Japan PM Takaichi Uneasy: द्वितीय विश्व युद्ध  मानव इतिहास का सबसे अधिक मौतों वाला युद्ध रहा है. वर्ल्ड पॉपुलेशन रिव्यू के मुताबिक इस वॉर में 6 साल में कुल 8.6 करोड़ लोग मारे गए थे. आश्चर्य यह है कि इसमें अमेरिका (4 लाख 50 हजार) और ब्रिटेन (4 लाख 19 हजार) से ज्यादा भारत (30 लाख) लोग मारे गए थे. जापान ने भी भारत के बराबर ही अपने लोगों को खोया था. लेकिन इस युद्ध के समापन उस भयानक हमले से हुआ, जिसमें  2 लाख से अधिक लोगों की मौत हुई थी. यह अटैक था- अमेरिका द्वारा जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराया जाना. इस घटना के 85 साल बीत जाने के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जापानी पीएम साने तकाइची से इसी का जिक्र करके उन्हें असहज कर दिया.

गुरुवार को व्हाइट हाउस में जापान की प्रधानमंत्री के साथ अमेरिका के राष्ट्रपति ने द्विपक्षीय बैठक की. बैठक का मुद्दा था ईरान युद्ध और उससे पैदा हुई मुश्किल. डोनाल्ड ट्रंप ट्रंप लगातार जापान समेत अपने सहयोगी देशों पर दबाव बना रहे हैं कि वे मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच सक्रिय भूमिका निभाएं. उन्होंने जापान समेत यूरोपीय देशों से होर्मुज स्ट्रेट को खुलवाने की अपील की है. हालांकि, कई देशों ने इस पर आपत्ति जताई और किसी भी मदद पर आनाकानी की. तकाइची उन शुरुआती सहयोगी नेताओं में शामिल हैं, जिन्होंने 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले शुरू होने के बाद ट्रंप से मुलाकात की है. 

यूरोपीय सहयोगियों का कहना है कि यह उनका युद्ध नहीं है. ट्रंप ने यह हमला करने से पहले हमसे कोई सलाह मशविरा नहीं किया. यह एक सरप्राइज अटैक था. यह सवाल तकाइची के साथ बैठक के दौरान भी ट्रंप से पूछ लिया गया कि उन्होंने ईरान पर हमलों से पहले सहयोगियों को जानकारी क्यों नहीं दी. इस पर ट्रंप ने जापान के 7 दिसंबर, 1941 के पर्ल हार्बर हमले का जिक्र कर दिया. इसमें 2,400 से अधिक अमेरिकी मारे गए थे. इसी के बाद अमेरिका सेकेंड वर्ल्ड वॉर में शामिल हुआ था.

ट्रंप ने कहा, ‘हमने किसी को इसके बारे में नहीं बताया क्योंकि हम सरप्राइज चाहते थे. सरप्राइज के बारे में जापान से बेहतर कौन जानता है?’ इसके बाद उन्होंने तकाइची की ओर मुड़कर कहा, ‘आपने मुझे पर्ल हार्बर के बारे में क्यों नहीं बताया?’ यह टिप्पणी जापानी प्रधानमंत्री के लिए पूरी तरह असहज स्थिति पैदा करने वाली रही और यह कैमरे पर भी साफ दिखा. अमेरिका ने अपने पर्ल हार्बर अटैक का भी बदला लिया, जो 1945 में हिरोशिमा और नागासाकी पर दुनिया का पहला और एकमात्र हमला था. 

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हालांकि, बैठक की शुरुआत काफी हल्के माहौल में हुई, जब ट्रंप ने तकाइची की अंग्रेजी भाषा पर पकड़ की तारीफ की और अनुवाद की जरूरत न होने पर मजeक किया. वहीं बैठक के बाद, तकाइची ने कहा कि दोनों देशों ने होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला और सुरक्षित बनाए रखने की अहमियत पर सहमति जताई. 

आसान नहीं जापान का ईरान युद्ध में सैन्य सहयोग

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जापान का शांतिवादी संविधान और उसके कानून उनके सैन्य हस्तक्षेप को सीमित करते हैं और वह केवल आत्मरक्षा के तहत ही बल प्रयोग कर सकता है. जापान में जनता का रुख भी मायने रखता है. इस समय देश की केवल 9 प्रतिशत जनता ही अमेरिका और इजरायल का साथ देने के समर्थन में है. इसकी वजह से जापान के किसी भी सैन्य अभियान में मुश्किल आ सकती है. 

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने पहले कहा कि उन्हें उम्मीद है कि जापान आगे बढ़कर भूमिका निभाएगा, क्योंकि उसकी ऊर्जा जरूरतें काफी हद तक इसी मार्ग से पूरी होती हैं. वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरता है, लेकिन ईरान युद्ध की वजह से यह ब्लॉक है. ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से दबाव बढ़ाते हुए कहा है कि मध्य पूर्व के तेल पर जापान की भारी निर्भरता और दशकों से अमेरिका द्वारा दी गई सुरक्षा मदद के कारण जापान को अब आगे आना चाहिए.

ईरान ने हमलों से मचाई खलबली

होर्मुज स्ट्रेट में बुधवार रात, ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर इजरायल ने हमला किया, जिसके जवाब में ईरान ने कतर के रास लफान गैस रिफाइनरी पर अटैक कर दिया. यह भारत समेत दुनिया के कई देशों की गैस की जरूरतों की सप्लाई का  बड़ा सोर्स है. रिपोर्ट्स के अनुसार, यहां से 20 फीसद वैश्विक गैस आपूर्ति होती है. कतर ने इस हमले पर काफी नाराजगी जताई. उसका कहना है कि उसे 20 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ है. वहीं अब इस रिफाइनरी से उसकी 17 प्रतिशत क्षमता समाप्त हो गई, जो आने वाले 5 साल में वापस आ पाएगी. 

वहीं, कुवैत ने शुक्रवार को कहा कि उसकी मीना अल-अहमदी तेल रिफाइनरी पर ईरान ने फिर से ड्रोन हमला किया जिससे उसकी कई इकाइयों में आग लग गई. रिफाइनरी पर बृहस्पतिवार को भी हमला हुआ था जिससे उसमें आग लग गई थी. कुवैत ने कहा कि दमकलकर्मी फिर से हुए हमले के बाद लगी आग पर काबू पाने की कोशिश कर रहे हैं और हमले में किसी के हताहत होने की तत्काल कोई सूचना नहीं है. 

यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब कुवैत में रमजान के समापन पर ईद मनाई जा रही है. इसके अलावा ईरान ने इजरायल के हाइफा तेल रिफाइनरी पर भी हमला किया है. ईरान ने धमकी दी है कि अगर उसके ऊर्जा ठिकानों पर हमला किया गया तो वह मिडिल ईस्ट के अन्य देशों पर और हमले करेगा. 

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इन ब्लॉकेड और हमलों के परिप्रेक्ष्य में ट्रंप और तकाइची के बीच मुलाकात हो रही है.  यूरोपीय देशों की हिचकिचाहट के बाद अब वॉशिंगटन टोक्यो से अधिक भागीदारी की उम्मीद कर रहा है. गुरुवार को जापान ने 5 यूरोपीय देशों के साथ होर्मुज स्ट्रेट खुलवाने के लिए हाथ मिलाने का फैसला किया है. 

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By Anant narayan shukla

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उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

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