अस्पतालों में आज से काम करेगा डेंगू वार्ड

पीएचसी में दो व अनुमंडलीय अस्पताल में पांच बेडों का होगा वार्ड, सीएस ने सभी प्रभारी व उपाधीक्षकों को दी हिदायत बिहारशरीफ : जिले में डेंगू की रोकथाम व इससे बचाव के लिए जिला स्वास्थ्य विभाग ने मुकम्मल व्यवस्था की है. डेंगू के संदिग्ध मरीज मिलने पर उसका सहज रूप से इलाज किया जा सके, […]

पीएचसी में दो व अनुमंडलीय अस्पताल में पांच बेडों का होगा वार्ड, सीएस ने सभी प्रभारी व उपाधीक्षकों को दी हिदायत

बिहारशरीफ : जिले में डेंगू की रोकथाम व इससे बचाव के लिए जिला स्वास्थ्य विभाग ने मुकम्मल व्यवस्था की है. डेंगू के संदिग्ध मरीज मिलने पर उसका सहज रूप से इलाज किया जा सके, इसके लिए मरीजों व उसके परिजनों को ज्यादा भाग-दौड़ नहीं करनी पड़े, उन्हें सहज रूप से पीएचसी स्तर पर भी चिकित्सा सेवा मिले, इसकी व्यवस्था जिले के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में संचालित अस्पतालों में भी की गयी है. यह व्यवस्था बुधवार से जिले के हर सरकारी अस्पताल में उपलब्ध रहेगी.
24 घंटे के दौरान हो वार्ड की व्यवस्था : प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों व अनुमंडलीय अस्पताल के उपाधीक्षकों को निर्देश दिया गया है कि हर हाल में 31 अगस्त तक अपने-अपने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र व अनुमंडलीय अस्पतालों में डेंगू व चिकिन गुनिया बीमारियों के मरीजों के इलाज
के लिए विशेष वार्ड खोलें. इस बात की हिदायत सिविल सर्जन डॉ सुबोध प्रसाद सिंह ने दी है. सीएस डॉ सिंह ने हिलसा व राजगीर अनुमंडलीय अस्पताल के उपाधीक्षकों को अस्पताल परिसर में पांच-पांच बेडों का विशेष डेंगू वार्ड खोलने को कहा है. इसके अलावा प्रत्येक पीएचसी में दो-दो बेडों के डेंगू वार्ड खोलने की हिदायत प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को दी गयी है. यह व्यवस्था 31 अगस्त से ही सुनिश्चित करने को कहा गया है. इस कार्य में किसी तरह की लापरवाही व शिथिलता नहीं बरतने की चेतावनी दी गयी है.
सदर अस्पताल में 10 बेडों का बना है वार्ड : डेंगू के मरीजों के इलाज के लिए सदर अस्पताल में पहले ही विशेष डेंगू वार्ड खोला जा चुका है. इस वार्ड में 10 बेड लगाये गये हैं. साथ ही वार्ड में भरती होने वाले मरीजों को इलाज के लिए चिकित्सकों व पारा मेडिकल स्टॉफों की प्रतिनियुक्ति की जा चुकी है. इसे चिकित्सीय उपकरणों से लैस किया गया है.
मच्छरदानी युक्त होंगे अस्पतालों के डेंगू वार्ड : पीएचसी से लेकर सदर अस्पताल तक काम करने वाले डेंगू वार्ड सुविधाओं से लैस होंगे. यहां तक कि डेंगू वार्ड में मच्छरदानी की भी व्यवस्था होगी. ताकी डेंगू वार्ड में भरती होने वाले संदिग्ध मरीजों को पूरी तरह से सुरक्षित रूप से चिकित्सा सेवा उपलब्ध करायी जा सके. वार्ड में मच्छरदानी लगे रहने से एडीज मच्छरों से मरीजों को बचाया जा सके. एडीज मच्छर काटने से ही डेंगू बुखार होता है. अमूमन यह डेंगू मच्छर बरसात के समय में ही काटता है. यह मच्छर सामान्य तौर पर दिन में काटता है.
जिस इलाके में मिलेंगे मरीज, वहां पर होगी फॉगिंग : जिले के जिस पीएचसी के अंतर्गत डेंगू के संदिग्ध मरीजों की पहचान होगी तो उस क्षेत्र में डेंगू के लार्वा को मारने के लिए फॉगिंग की जायेगी. इसके लिए जिला मलेरिया विभाग की ओर से मालाथियॉन की फाॅगिंग करायी जायेगी. फॉगिंग कराने से संबंधित क्षेत्र में डेंगू मच्छर का प्रकोप खत्म हो जाता है. यानी डेंगू मच्छर का लार्वा खत्म हो जाता है.
क्या कहते हैं अधिकारी
डेंगू बीमारी से पीड़ित संदिग्ध मरीजों को बेहतर चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिले के हर अस्पताल में विशेष वार्ड की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है. साथ मच्छरदानी की व्यवस्था करने की हिदायत प्रभारियों व उपाधीक्षकों को दी गयी है.
डॉ सुबोध प्रसाद सिंह, सिविल सर्जन,नालंदा

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