प्रतिदिन लाखों का कारोबार

पहल. मिनी सूरत बनीं सोहसराय की कपड़ा मंडी एक माह में करीब 60 ट्रक कपड़े की आवक बिहारशरीफ : तीन दशक पहले आलू मंडी के नाम से ख्याति प्राप्त सोहसराय बाजार कपड़ा व्यवसाय एक अलग पहचान बनाने जा रही है. कपड़ा व्यवसाय के क्षेत्र में सोहसराय बाजार को मिनी सूरत कहा जाता है. इस बाजार […]

पहल. मिनी सूरत बनीं सोहसराय की कपड़ा मंडी

एक माह में करीब 60 ट्रक कपड़े की आवक
बिहारशरीफ : तीन दशक पहले आलू मंडी के नाम से ख्याति प्राप्त सोहसराय बाजार कपड़ा व्यवसाय एक अलग पहचान बनाने जा रही है. कपड़ा व्यवसाय के क्षेत्र में सोहसराय बाजार को मिनी सूरत कहा जाता है. इस बाजार में सूती साड़ी से लेकर ऊनी कपड़ों की सैकड़ों दुकानें हैं. कपड़ा के क्षेत्र में थोक मंडी रहने के कारण जिले का ही नहीं बिहार व झारखंड के कपड़ा व्यवसायी कपड़ों की खरीदारी करने यहां आते हैं. बाजार की विशेषता यह है कि इस मंडी के व्यवसायी कम मुनाफे में सूती से लेकर ऊनी वस्त्रों की हर डिजाइन व कलर के वस्त्रों का रोजगार कर रहे हैं
जिससे बिहार झारखंड के कपड़ा व्यवसायी वस्त्रों की खरीदारी के लिए सोहसराय मंडी पहुंचते हैं. मिनी सूरत बना सोहसराय में कपड़े के कई मार्केट हैं. सुपर मार्केट,र्फैसी मार्केट, मौया मार्केट, त्रिमूर्ति ,जयंत, कुशवाहा ,दीप ज्योति,शिवाजी ,सांईं कॉम्प्लेक्स सहित दस मार्केट है. इन मार्केट के अंदर करीब तीन सौ दुकानें हैं.
जो कपड़ों की थोक व्यापार कर रहे हैं. कपड़ा के सैकड़ों थोक विक्रेता रहने से बिहार व झारखंड के राज्यों से आये व्यापारी को सही कीमत में सूती साड़ी,लहंगा साड़ी,सिल्क,सूटिंग शटिंग,ऊनी, रेडिमेड कपड़ों के हर डिजाइजन कलर में एक ही जगह पर उपलब्ध हो जाने से व्यापारियों को सहूलियत होती है. जिसके कारण इस बाजार के प्रति व्यापारियों का काफी झुकाव है. रोजाना सूबे के अलावा अन्य राज्यों के व्यापारी कपड़ों की खरीदारी करने आते हैं. साथ ही लाखों के कपड़ों की खरीदारी करते हैं.
एक माह में करीब 60 ट्रक कपड़े यहां लाये जाते हैं. राजस्थान, बंगलोर,सूरत ,लूधियाना,मुंबइ,कोलकाता,यूपी आदि राज्यों से प्रति माह उक्त कपड़े मंगवाये जाते हैं. लुधियाना ऊनी, सूरत से साड़ी ,गुजरात जैतपुर से सूती साड़ी, राजस्थान से साया, पैंट,बंगलोर से सिल्क,कलकता से रडिमेड,यूपी से बनारसी साड़ी ट्रॉसपोर्ट के माध्यम से लाये जाते हैं. दुकानदार चंदन कुमार,नवीन कमार बताते हैं कि यहां के व्यापारी सीधे मिलों से कपड़ों की खरीदारी करते हैं. कम मुनाफे पर रोजगार करते हैं. इस मार्केट में सेकेंड क्लास की माल की डिमांड अधिक होती है.

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