कहीं आप नाले का पानी तो नहीं पी रहे

अनदेखी. डिब्बा बंद पानी की नहीं हो रही गुणवत्ता जांच पानी की गुणवत्ता की जांच के बिना ही पानी बेचा रहा है. जिला व शहर स्तर पानी जांच की क्या व्यवस्था है इसकी जानकारी न तो पीएचइडी के पास है, न ही नगर निगम के पास दोनों विभाग यह कहकर निकल जा रहे हैं कि […]

अनदेखी. डिब्बा बंद पानी की नहीं हो रही गुणवत्ता जांच
पानी की गुणवत्ता की जांच के बिना ही पानी बेचा रहा है. जिला व शहर स्तर पानी जांच की क्या व्यवस्था है इसकी जानकारी न तो पीएचइडी के पास है, न ही नगर निगम के पास दोनों विभाग यह कहकर निकल जा रहे हैं कि विभाग के दायरे में नहीं आता है.
नगर निगम व पीएचइडी एक- दूसरे का बता रहे मसला
प्रतिदिन हो रहा लाखों का कारोबार
बिहारशरीफ : जिले में इन दिनों डिब्बा बंद पानी का प्रचलन काफी बढ़ गया है. शुद्ध जल के नाम पर नालियों का पानी पिलाया जा रहा है. पानी की गुणवत्ता की जांच के बिना ही पानी बेचा रहा है. जिला व शहर स्तर पानी जांच की क्या व्यवस्था है इसकी जानकारी न तो पीएचइडी के पास है, न हर नगर निगम के पास दोनों विभाग यह कहकर निकल जा रहा है कि विभाग के दायरे में नहीं आता है.
इसलिए कुछ नहीं कर पाते हैं. कारण जो भी जिले के लोगों को शुद्ध जल का सब्जबाग दिखा कर जो पानी बेची जा रही है, इसकी कसौटी की प्रशासनिक महकमे के पास नहीं है. जबकि सरकार के सात निश्चयों में जल भी एक है. इस व्यवसाय को करने वाले लोगों की स्थल जांच भी की जाती है. किस स्थल से पानी की निकास हो रही वह गंदे नाले के स्थान से कितनी दूर है! साथ ही पानी को स्टोर करने के लिए मानक अपनाया गया है. और तो पानी को ठंडक रखने वाली मशीन की क्या गुणवत्ता है.
प्रतिदिन लाखों का कारोबार जिले में है. दुकान से लेकर अफसरों तक पानी इस्तेमाल कर रहे हैं. 20 लीटर के डिब्बे पानी को कम से कम 20 रुपये लिया जाता है.
नगर निगम नहीं लगा रहा ट्रेड टैक्स:
शहर में किसी तरह का व्यवसाय करने वाले लोगों से ट्रेड टैक्स नगर निगम वसूल रहा है,जबकि इस धंधे को करने वालों से ट्रेड टैक्स नहीं लगाया जा रहा है.
क्या कहते पीएचइडी के अधिकारी:
हमारे विभाग का ऐसा कोई आदेश नहीं है. नियमित जांच तो होनी चाहिए. यह तो शहरी जलापूर्ति का मामला है. प्रशासन चाहे तो हमलोगों से जांच करवा सकता हैं.
राजेश कुमार सिन्हा,कार्यपालक अभियंता पीएचइडी बिहारशरीफ
क्या कहते हैं सिटी मैनेजर:
नगर निगम के क्षेत्राधिकार में नहीं आता है.यही कारण है कि कुछ नहीं कर पाते हैं. यह मामला पीएचइडी का है.
संतोष कुमार सिन्हा, सिटी मैनेजर नगर निगम बिहारशरीफ

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