जॉडिस व दमा रोग में नीरा रामबाण
हार्लिक्स व बॉर्नबिटा की तरह शक्तिवर्धक है नीरा
नीरा में दूध मिलाकर बनाया जा सकता है शुगर फ्री पेड़ा, तमिलनाडु एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने ताड़ी व्यवसाय से जुड़े लोगों को दी नीरा बनाने की ट्रेनिंग
बिहारशरीफ/रहुई : ताड़ के पेड़ से निकलने वाले रस को नीरा कहते हैं. यह नीरा मानव शरीर के लिये बहुत ही फायदेमंद है. इसमें 25 प्रकार के पोषक तत्व पाये जाते हैं. इस रस में जौंडिस, दमा सहित अनेक प्रकार की बीमारियों को ठीक करने की ताकत होती है. ये बातें तमिलनाडु एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी कोयंबटूर के वैज्ञानिकों ने नालंदा की रहुई प्रखंड के बरांदी गांव में सोमवार को ताड़ी के कारोबार से जुड़े लोगों को नीरा बनाने का प्रशिक्षण देते हुये कहा.
उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत के राज्यों तमिलनाडु, केरल, महाराष्ट्र, गुजरात, आंध्र प्रदेश आदि राज्यों में नीरा बच्चों व महिलाओं को भी दिया जाता है. नीरा बच्चों एवं महिलाओं में अनेक प्रकार के कुपोषण को दूर करता है. यह नीरा हार्लिक्स, बॉर्नबिटा की तरह शक्ति प्रदायक है. इसके उपयोग से दक्षिण भारत के लोगों की उम्र भी बढ़ी है.
वैज्ञानिकों ने बताया कि नीरा को फर्मेंट कर दिया जाय तो ताड़ी बन जाता है. ताड़ी में अल्कोहल की मात्रा बढ़ जाती है. एवं यह नशीला पेय हो जाता है. यह शरीर के लिये हानिकारक हो जाता है. वैज्ञानिकों ने बताया कि जिस बरतन में ताड़ का रस निकाला जाता है, उसमें उपस्थित जीवाणु की वजह से फरमेंटेशन की क्रिया होती है. एवं ताड़ का रस जो मूल रूप से नीरा होता है, ताड़ी में बदल जाता है.
बरतन की सफाई जरूरी :
वैज्ञानिकों ने बताया कि जिन बरतनों में ताड़ का रस चुलाया जाता है, तथा जिन बरतनों में इन्हें एकत्र किया जाता है, उसकी साफ-सफाई बहुत जरूरी है. बरतन को पहले पानी से अच्छी तरह से साफ करने के बाद बरतन के भीतरी सतह पर चूना घोलकर साफ कर लें. चूना से बरतन को साफ करने पर वह जीवाणु नष्ट हो जाता है. फिर नीरा फरमेंट नहीं होता है, एवं ताड़ी में नहीं बदलता है. वैज्ञानिकों ने बताया कि बरतन को पानी एवं नमक के घोल से भी साफ किया जा सकता है.
नीरा का व्यवसाय फायदेमंद :
ट्रेनिंग के दौरान वैज्ञानिकों ने बताया कि अगर इस तरीके से ताड़ का रस निकाल कर उसका व्यवसाय किया जाय तो अधिक कीमत मिलेगी. इससे नशा भी नहीं होगा. इस व्यवसाय से जुड़े लोगों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा.
ब्रॉन्डिंग से बनेगा सम्मानजनक पेशा :
वैज्ञानिकों ने बताया कि नीरा के व्यवसाय की ब्रांडिंग होने से यह एक सम्मानजनक पेशा बन जायेगा. इससे लोगों की आय में वृद्धि होगी एवं जीवन स्तर ऊंचा होगा. थोड़ी सी मेहनत करके इस ताड़ के रस को काफी लाभकारी बनाया जा सकता है और इसका व्यापक पैमाने पर व्यवसाय किया जा सकता है.
रहुई के बरांडी गांव में ताड़ी व्यवसाय से जुड़े लोगों को नीरा बनाने की ट्रेनिंग देते वैज्ञानिक.
शूगर फ्री पेड़ा बनाने की तकनीक बतायी :
ट्रेनिंग के दौरान नीरा से पेड़ा बनाने की तकनीक लोगों को वैज्ञानिकों ने बताया. उन्होंने कहा कि नीरा एवं दूध को मिलाकर पेड़ा तैयार किया जा सकता है. तैयार पेड़ा शुगर फ्री होता है. नीरा से कई तरह के उत्पाद बनाये जायंेगे एवं इसकी बिक्री की भी पर्याप्त व्यवस्था होगी. इससे ताड़ी व्यवसाय से जुड़े लोगों की माली हालत अच्छी होगी. यह ट्रेनिंग पाकर बरांदी गांव के ताड़ के रस के कारोबार से जुड़े लोग काफी प्रसन्न दिखे एवं सबने नीरा व्यवसाय को अपनाने की ईच्छा प्रकट की.
इस प्रशिक्षण में जिला पदाधिकारी डा. तयागराजन, डीसीएल आर राकेश कुमार गुप्ता, जिला कृषि पदाधिकारी अशोक कुमार, आत्मा के परियोजना निदेशक मो. इस्माइल, कृषि विज्ञान केंद्र हरनौत व उद्यान महाविद्यालय के वैज्ञानिक, ताड़ी व्यवसाय से जुड़े बड़ी संख्या में ट्रेनर के रूप में तमिलनाडु से आई विशेषज्ञ एवं बिहार के लिए स्टेट रिसोर्स पर्सन शुभद्रा देवी, धाना सिंह मौजूद थे
