मुजफ्फरपुर से सुमित कुमार की रिपोर्ट
Muzaffarpur News: उत्तर बिहार के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल श्रीकृष्णा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (SKMCH) में गुरुवार को स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलने वाली एक बेहद दर्दनाक तस्वीर सामने आई. अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में महज आधे घंटे के भीतर दो गंभीर रूप से बीमार महिलाओं की मौत हो गई. परिजनों ने डॉक्टरों पर इलाज में घोर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है. हद तो तब हो गई जब मौत के बाद अस्पताल प्रशासन ने शव को घर ले जाने के लिए शव वाहन (मर्चरी वैन) तक उपलब्ध नहीं कराया. लाचार परिजन एक मृतका के शव को ई-रिक्शा पर लादकर घर ले जाने को मजबूर हुए.
समय पर नहीं मिला इलाज, कंट्रोल रूम ने वाहन देने से किया मना
पहली मृतका की पहचान नगर थाना क्षेत्र के जोगिया मठ निवासी नंदकिशोर महतो की पत्नी प्रमीला देवी के रूप में हुई है. उनकी बेटी ज्योति ने रोते हुए अस्पताल कर्मियों पर गंभीर आरोप लगाए. ज्योति का कहना है कि उनकी मां को गंभीर हालत में लाया गया था, लेकिन डॉक्टरों ने समय पर सुध नहीं ली जिससे उनकी मौत हो गई. दम तोड़ने के बाद जब उन्होंने शव वाहन की मांग की, तो अस्पताल के कंट्रोल रूम से साफ कह दिया गया कि गाड़ी उपलब्ध नहीं है.
इलाज शुरू होने से पहले ही दूसरी महिला ने भी तोड़ा दम
इसी अफरा-तफरी के बीच रामपुरहरि थाना क्षेत्र के जदबीर निवासी जयकला देवी की भी मौत हो गई. परिजनों के अनुसार, वे गंभीर स्थिति में जयकला देवी को लेकर इमरजेंसी वार्ड पहुंचे थे, लेकिन डॉक्टरों ने उनका इलाज शुरू तक नहीं किया और उन्होंने तड़प-तड़पकर दम तोड़दिया. आधे घंटे में दो मौतों से अस्पताल परिसर में चीख-पुकार मच गई और गुस्साए परिजनों ने कुव्यवस्था को लेकर जमकर हंगामा किया.
जांच का भरोसा देकर पल्ला झाड़ रहे जिम्मेदार अधिकारी
शव वाहन न मिलने के सवाल पर अस्पताल के हेल्थ मैनेजर सचिन चंचल ने अजीब दलील दी. उन्होंने कहा कि उस समय गाड़ी खाली नहीं थी और अस्पताल के खर्च पर निजी एंबुलेंस से शव भेजने का ऐसा कोई सरकारी आदेश उन्हें नहीं मिला है. वहीं, एसकेएमसीएच के अधीक्षक डॉ. महेश प्रसाद ने मामले से अनभिज्ञता जताते हुए कहा कि शव वाहन की जिम्मेदारी कंट्रोल रूम की होती है. इस मामले में किस स्तर पर लापरवाही हुई है, इसकी पूरी जांच कराई जाएगी और दोषियों पर कार्रवाई होगी.
