वरीय संवाददाता, मुजफ्फरपुर
जिले के सरकारी अस्पतालों में सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध होने के बावजूद बंध्याकरण और पुरुष नसबंदी के अधिकांश मामले निजी अस्पतालों में हो रहे हैं. इसके लिए सरकार निजी अस्पतालों को प्रति ऑपरेशन 3500 से 4000 रुपये तक का भुगतान भी कर रही है. हैरानी की बात यह है कि सरकारी तंत्र मौजूद रहने के बावजूद बंध्याकरण का ग्राफ सरकारी अस्पतालों में निजी की तुलना में काफी कम है.शुक्रवार को निजी अस्पतालों की ओर से भेजे गए बंध्याकरण और पुरुष नसबंदी के भुगतान को लेकर एक समीक्षा बैठक आयोजित की गई. बैठक में गठित जांच टीम ने स्पष्ट किया कि भुगतान से पहले निजी अस्पतालों को किए गए सभी बंध्याकरण और नसबंदी मामलों का पूरा विवरण देना होगा. इसमें ऑपरेशन की संख्या के साथ-साथ लाभार्थी महिलाओं और पुरुषों का नाम, मोबाइल नंबर और पूरा पता अनिवार्य रूप से शामिल रहेगा. सभी जानकारियां उपलब्ध होने के बाद ही संबंधित अस्पतालों को भुगतान किया जाएगा.
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जिले के एक दर्जन से अधिक निजी अस्पतालों को बंध्याकरण और पुरुष नसबंदी करने की अनुमति दी गई है. निजी अस्पतालों की ओर से किए गए ऑपरेशन का भुगतान लंबित रहने के कारण अब विभाग ने सख्ती बरतने का निर्णय लिया है.सरकारी सिस्टम खुद बीमार
बंध्याकरण अभियान को लेकर सरकारी सिस्टम की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं. सरकारी अस्पतालों में चिकित्सक और कर्मियों पर नियमित खर्च हो रहा है, फिर भी लाभार्थी निजी अस्पतालों का रुख कर रहे हैं. इससे सरकार को दोहरी आर्थिक मार झेलनी पड़ रही है. एक ओर सरकारी तंत्र का खर्च, तो दूसरी ओर निजी अस्पतालों को प्रति ऑपरेशन मोटी राशि का भुगतान. स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि यदि सरकारी अस्पतालों में ही बंध्याकरण को बढ़ावा दिया जाए, तो सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकता है और अतिरिक्त खर्च से बचा जा सकता है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
