संवाददाता, मुजफ्फरपुर मोतीझील स्थित एसएसपी कार्यालय में शुक्रवार को विधिक जागरूकता कार्यशाला हुई. इसमें जिले के सभी थानेदार व वरीय पदाधिकारी शामिल हुए. कार्यशाला में अतिथि के रूप में चाइल्ड वेलफेयर ऑफिसर, स्पेशल पीपी व अन्य पदाधिकारी शामिल हुए. एसएसपी सुशील कुमार ने कार्यशाला में बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों से सुरक्षा के लिए बने पॉक्सो एक्ट 2012 (प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेज एक्ट) के केस की विस्तृत जानकारी दी. कार्यशाला में जिले के सभी थानेदार, अभियोजन कोषांग से जुड़े पुलिस पदाधिकारी व कर्मी शामिल हुए. एसएसपी सुशील कुमार ने कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए कहा कि बच्चों की सुरक्षा समाज की प्राथमिकता है. पॉक्सो एक्ट बच्चों को यौन शोषण, उत्पीड़न और अश्लीलता से बचाने का मजबूत कानूनी ढांचा प्रदान करता है. इसे लागू करने में पुलिस और जनता का जागरूक होना जरूरी है. उन्होंने थानेदारों को पॉक्सो मामलों में त्वरित और संवेदनशील कार्रवाई का निर्देश दिया. पीड़िता का पहचान गोपनीय रखकर अनुसंधान करना है. पॉक्सो एक्ट के तहत यौन हमला, यौन उत्पीड़न, बाल अश्लीलता और गंभीर यौन हमले जैसे अपराधों के लिए सजा का प्रावधान है. गंभीर मामलों में सात साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है. उन्होंने जोर दिया कि शिकायत दर्ज करने में गोपनीयता और पीड़ित की गरिमा का ध्यान रखा जाता है. साथ ही, फास्ट-ट्रैक कोर्ट के जरिए त्वरित न्याय सुनिश्चित किया जाता है.
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
