सरकारी जमीन दाखिल-खारिज: बिहार में लघु जल संसाधन विभाग के अधीन दशकों से मौजूद लगभग 12 हजार भूखंडों की अब तक न तो जमाबंदी कायम हो सकी है और न ही दाखिल-खारिज की प्रक्रिया पूरी की गई है. कागजी प्रक्रिया अधूरी रहने के कारण हाल के दिनों में सरकारी जमीनों की अवैध खरीद-बिक्री और फर्जी दाखिल-खारिज के कई मामले उजागर हुए हैं. इस गंभीर स्थिति को देखते हुए विभाग ने त्वरित एक्शन प्लान तैयार किया है. विभाग के संयुक्त सचिव ने सभी कार्यपालक अभियंताओं को संबंधित अंचलाधिकारियों (सीओ) से समन्वय बनाकर प्राथमिकता के आधार पर मापी कराने तथा जमाबंदी व म्यूटेशन का कार्य शीघ्र पूरा करने के सख्त निर्देश जारी किए हैं.
अवर सचिव बने नोडल पदाधिकारी, निशुल्क होगी प्रक्रिया
इस महाअभियान को तय समय-सीमा के भीतर पारदर्शी तरीके से पूरा करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर विशेष व्यवस्था की गई है.
- निगरानी का जिम्मा: लघु जल संसाधन विभाग के अवर सचिव को नोडल पदाधिकारी बनाया गया है, जो जिला स्तर पर चल रहे कार्यों की नियमित समीक्षा करेंगे.
- निशुल्क मापी व्यवस्था: विभाग ने स्पष्ट किया है कि सरकारी भूमि की मापी ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से पूरी तरह निशुल्क कराई जाएगी.
- अवैध बिक्री पर रोक: दाखिल-खारिज और जमाबंदी दर्ज होने के बाद सरकारी भूमि के अवैध हस्तांतरण पर पूर्ण विराम लग जाएगा.
कागजात न होने पर भी भौतिक कब्जे के आधार पर होगी मापी
संयुक्त सचिव ने निर्देश दिया है कि यदि किसी विभागीय भूमि का पुराना कागजात या ठोस साक्ष्य उपलब्ध नहीं है, तब भी प्रक्रिया नहीं रोकी जाएगी. ऐसी स्थिति में संबंधित जमीन पर विभाग का भौतिक कब्जा होने अथवा विभागीय संरचना बनी होने पर विभाग प्रमुख द्वारा जमीन को चिह्नित कराया जाएगा. इसके बाद अंचलाधिकारी के माध्यम से भूमि की मापी कराकर जमाबंदी और म्यूटेशन का कार्य संपन्न कराया जाएगा.
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