डीआइजी बोले- बाल संरक्षण के मामलों में पुलिस की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण
मुंगेर. समाज कल्याण विभाग की ओर से बाल संरक्षण के क्षेत्र में आ रही चुनौतियों के निराकरण और पारस्परिक समन्वय बेहतर बनाने के लिए मंगलवार को प्रेक्षागृह में एक दिवसीय प्रमंडलीय विचार गोष्ठी सह संवेदीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया. इसमें मुंगेर व बेगूसराय रेंज के डीआइजी, सभी छह जिलों के डीएम, एसपी एवं इससे जुड़े अधिकारी व हितधारकों ने भाग लिया. कार्यक्रम का उद्घाटन प्रमंडलीय आयुक्त प्रेम सिंह मीणा, मुंगेर रेंज के डीआइजी राकेश कुमार, खगडिया के जिलाधिकारी नवीन कुमार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया.प्रमंडलीय आयुक्त ने कहा कि बच्चे किसी भी समाज की नींव होते हैं और आज आज हम सभी इन्हीं बच्चों के लिए एकत्रित हुए हैं. बाल संरक्षण, जो राज्य का एक वैधानिक दायित्व है. इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बाल संरक्षण से संबंधित हितधारकों का बेहतर समन्वय स्थापित करना है. बाल संरक्षण के क्षेत्र में आज हमारे सामने कई चुनौतियां हैं. बाल श्रम, बाल तस्करी, बाल विवाह और डिजिटल दुनिया में बच्चों के खिलाफ बढ़ते अपराध ऐसी समस्याएं हैं जो किसी एक विभाग के प्रयास से दूर नहीं हो सकती. अक्सर देखा जाता है कि जानकारी के अभाव या प्रक्रियात्मक देरी के कारण पीड़ित बच्चे को वैसा न्याय नहीं मिल पाता, जिसका वह हकदार है. उन्होंने सभी पदाधिकारी से अपील की कि हम सभी संवेदनशील होकर कार्य करें. बच्चा अपराधी हो या पीड़ित, हमारा दृष्टिकोण हमेशा सुधारात्मक और सुरक्षात्मक होना चाहिए. मुंगेर रेंज के डीआइजी कहा कि बाल संरक्षण के मामलों में पुलिस की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है. पुलिस, प्रशासन और अन्य विभागों के बीच बेहतर समन्वय से बाल संरक्षण से संबंधित मामलों में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकती है. डीएम निखिल धनराज ने बाल संरक्षण के विषय को अत्यंत संवेदनशील एवं महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं प्रशासनिक तंत्र को अधिक जागरूक और उत्तरदायी बनाने में सहायक सिद्ध होती हैं. उन्होंने उपस्थित अधिकारियों से अपील की कि वे इस कार्यशाला से प्राप्त अनुभव और सुझावों का उपयोग अपने-अपने जिलों में बाल संरक्षण प्रणाली को मजबूत करने में करें. मौके पर खगड़िया डीएम नवीन कुमार सिंह, लखीसराय डीएम मिथलेश मिश्र, मुंगेर एसपी सैयद इमरान मसूद, जमुई, शेखपुरा, बेगूसराय के डीएम, सभी जिलों के एसपी सहित प्रशासनिक एवं पुलिस पदाधिकारी मौजूद थे.
बाल अधिकार सुरक्षा को लेकर एक्सपर्ट ने विस्तार से दी जानकारी
समाज कल्याण विभाग के सहायक निदेशक राकेश रंजन ने कार्यक्रम की रूपरेखा और बाल संरक्षण की शुरुआत कैसे हुई, उसके बारे में जानकारी दी. उन्होंने कहा कि वर्तमान में हमारे पास किशोर न्याय (बालकों की देख-रेख और संरक्षण) अधिनियम-2015, मिशन वात्सल्य, पॉस्को एक्ट जैसे मजबूत कानून और योजनाएं मौजूद हैं. कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा विस्तार से प्रस्तुतीकरण दिया गया. इनमें बचाव, प्रस्तुतीकरण प्रक्रिया, सोशल इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट, व्यक्तिगत देखभाल योजना, पुनर्वास, पुनर्स्थापन, परिवार आधारित वैकल्पिक देखभाल, आफ्टर केयर, बाल श्रम, बाल विवाह, चिकित्सा सहायता, दस्तावेजीकरण, केस फॉलो-अप, अंतर-जिला समन्वय, संस्थागत देखरेख तथा निगरानी तंत्र जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गयी. यूनिसेफ से जुड़े विशेषज्ञ राकेश कुमार ने बाल संरक्षण की अवधारणा, बच्चों के अधिकारों की मूल भावना तथा संबंधित विधिक प्रावधानों के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि बाल संरक्षण केवल विधिक हस्तक्षेप का विषय नहीं है, बल्कि यह बच्चों की गरिमा, सुरक्षा, विकास, पुनर्वास और अधिकार आधारित दृष्टिकोण से जुड़ा व्यापक सामाजिक एवं प्रशासनिक दायित्व है.
समय पर कार्रवाई से बच्चों के जीवन पर पड़ता है सकारात्मक प्रभाव
विशेषज्ञों ने बताया कि जब किसी बच्चे के मामले में समय पर और उचित मंच पर कार्रवाई होती है, तो उसके जीवन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है. पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनती है. कार्यक्रम में अंतर-विभागीय समन्वय को और अधिक मजबूत बनाने के उपायों पर भी विस्तार से चर्चा की गयी. विशेषज्ञों ने कहा कि यदि जिला प्रशासन, पुलिस, जिला बाल संरक्षण इकाई, बाल कल्याण समिति, किशोर न्याय परिषद, श्रम विभाग, शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग तथा अन्य संबंधित संस्थाएं समन्वित रूप से कार्य करें तो बाल संरक्षण से जुड़े मामलों में देरी कम होगी.
