पीजी विभाग में कर दी पोस्टिंग, कॉलेज में भी प्राचार्य की अतिरिक्त जिम्मेदारी
विश्वविद्यालय की कार्य प्रणाली से खड़े हो रहे बड़े सवाल
By AMIT JHA | Updated at :
एक साथ दो-दो वित्तीय प्रभार संभाल रहे शिक्षक
मुंगेर. मुंगेर विश्वविद्यालय की कार्य प्रणाली खुद विश्वविद्यालय के शिक्षक और अधिकारियों के लिए मुसीबत बनती जा रही है. आये दिन विश्वविद्यालय की कार्य प्रणाली से बड़े सवाल भी खड़े हो रहे हैं. इस बार फिर एमयू के पीजी विभागों में शिक्षकों की पोस्टिंग पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है. बता दें कि विश्वविद्यालय द्वारा बीते दिनों 18 पीजी विभागों में 51 शिक्षकों की पोस्टिंग की गयी है. इसमें कई शिक्षक वरीयता के आधार पर पीजी हेड तो बनाये गये हैं, लेकिन वे खुद पहले से कॉलेजों में प्रभारी प्राचार्य की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं. ऐसे में अब पीजी विभाग में योगदान देने के बाद उनके पास दो-दो वित्तीय प्रभार है. जो खुद राजभवन के आदेशों की अवहेलना है. हद तो यह है कि विश्वविद्यालय द्वारा पीजी विभाग में इन प्रभारी प्राचार्यों की पोस्टिंग तो विभागाध्यक्ष के रूप में कर दी गयी है, लेकिन कॉलेजों के लिये प्रभारी प्राचार्य की सूचना जारी नहीं की गयी. इससे इन शिक्षकों में अब अपने अतिरिक्त प्रभार को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है.
पीजी विभागाध्यक्ष के साथ अब प्राचार्य की अतिरिक्त जिम्मेदारी
एमयू ने जहां इतिहास विभाग के पीजी विभागाध्यक्ष के रूप में डॉ जीसी पांडेय की पोस्टिंग इतिहास पीजी विभाग में कर दी है. वहीं उनके पास पूर्व से केएसएस कॉलेज, लखीसराय के प्रभारी प्राचार्य की जिम्मेदारी वित्तीय शक्तियों के साथ है. इतना ही नहीं उनके पास विश्वविद्यालय के आइसी लीलग की भी अतिरिक्त जिम्मेदारी है. इसके अतिरिक्त गृह विज्ञान विभाग में पीजी विभागाध्यक्ष के रूप में डॉ निर्मला कुमारी की पोस्टिंग की गयी है. जबकि उनके पास पूर्व से बीआरएम कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य की जिम्मेदारी वित्तीय शक्तियों के साथ है. वहीं डॉ अशोक कुमार पोद्दार की पोस्टिंग विश्वविद्यालय द्वारा वाणिज्य पीजी विभागाध्यक्ष के रूप में की गयी है, जिनके पास पहले से ही जमालपुर कॉलेज, जमालपुर के प्रभारी प्राचार्य की अतिरिक्त जिम्मेदारी वित्तीय शक्तियों के साथ है.
पोस्टिंग के बाद असमंजस में शिक्षक
एमयू की अपने पीजी विभागों में पोस्टिंग जहां विश्वविद्यालय के निर्णय पर बड़े सवाल खड़े कर रही है. वहीं खुद पोस्टिंग के बाद इन शिक्षकों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है, क्योंकि विश्वविद्यालय द्वारा इन शिक्षकों की पोस्टिंग तो पीजी विभागों में कर दी गयी है, लेकिन पीजी विभागाें में योगदान देने के बाद प्रभारी प्राचार्य के लिए विश्वविद्यालय द्वारा कोई अधिसूचना जारी नहीं की गयी है. इसके कारण अब इन शिक्षकों पर दो-दो वित्तीय शक्तियों का प्रभार संभालने की जिम्मेदारी बन गयी है.