डीजे की कर्कश आवाज लोगों को पहुंचा रहा अस्पताल, प्रशासन की चुप्पी बढ़ा रही धड़कन

डीजे की कर्कश आवाज व उसकी धमक से एक समाजसेवी को अचानक हार्ट अटैक आ गया.

– नियम 45 डिसेबल से ज्यादा आवाज में नहीं बजा सकते डीजे, 200 डिसेबल में रहती है इनकी आवाज

मुंगेर

शादी-विवाह, पार्टी हो या फिर कोई राजनीतिक और धार्मिक आयोजन, इसमें डीजे न बजे तो लोग जश्न को अधूरा मानते हैं. शादी से शहनाई को दूर कर डीजे ने अपनी जगह बना ली है. लेकिन इसकी कर्कश आवाज और धमक लोगों को अस्पताल पहुंचा रहा है. कोई हार्ट अटैक का शिकार होकर तो कोई बहरेपन का शिकार होकर अस्पताल पहुंच रहे. बावजूद इसके प्रशासन की चुप्पी शहरवासियों की धड़कन बढ़ा रही है.

डीजे की कर्कश आवाज ने समाजसेवी को पहुंचा दिया अस्पताल

बुधवार को शहर के आजाद चौक स्थित जैन धर्मशाला से बारात निकली. जिसमें शहर के व्यवसायी, समाजसेवी और बुद्धिजीवि भी शामिल थे. जो डीजे की कर्कश आवाज व धमक के बीच साइड पकड़ कर चल रहे थे. जबकि युवा वर्ग डीजे की धुन पर थिरक रहे थे. इसी दौरान लगातार डीजे की कर्कश आवाज व उसकी धमक से एक समाजसेवी को अचानक हार्ट अटैक आ गया. जिसे सदर अस्पताल लाया गया, जहां से उसे निजी नर्सिंग होम में शिफ्ट कर दिया गया. हालांकि वे खतरे से अभी बाहर हैं. यह कोई पहली घटना नहीं है, जब कोई डीजे का शिकार होकर अस्पताल पहुंचा है, हार्ट और कान की शिकायत लेकर लोग लगातार अस्पताल और चिकित्सक के यहां चक्कर लगा रहे हैं.

45 के बदले 200 डिसेबल पर बज रहा डीजे, प्रशासन चुप

गाइड लाइन के अनुसार 45 डिसेबल से ज्यादा आवाज में डीजे नहीं बजाया जा सकता है. लेकिन संचालक 200 डिसेबल तक डीजे बजा रहे हैं. जबकि 60 डेसिबल तक आवाज सहन करने की कान की क्षमता है. 50 डेसिमल से ज्यादा साउंड सुनने से हृदय की गति बढ़ जाती है. इस साउंड और म्यूजिक द्वारा होने वाले कंपन से हृदय की शिरा की झिल्ली भी क्षतिग्रस्त हो सकती है, जिसकी वजह से डीजे बजाने के दौरान या तेज आवाज में शादियों में नाचने के दौरान किसी को भी एक्यूट हार्ट अटैक हो सकता है. जानकारों ने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी 85 डेसीबल से ज्यादा शोर सुनना खतरनाक बताया है. लेकिन मुंगेर में निर्धारित डिसेबल को ताख पर रख कर डीजे बजाया जाता है, जिस पर फिलहाल किसी का कोई नियंत्रण नहीं है.

10 बजे रात के बाद डीजे पर रोक का असर नहीं

सर्वोच्च न्यायालय का स्पष्ट निर्देश है कि रात 10 बजे के बाद डीजे नहीं बजाए जायेंगे. तेज आवाज में ध्वनि प्रदूषण फैलाने पर कठोर कार्रवाई का प्रावधान है. हैरानी की बात यह है कि न तो शहरवासी इस गंभीर समस्या को लेकर जागरूक हो रहे हैं, और न ही प्रशासन कोई ठोस कदम उठा रहा है. विवाह भवन, धर्मशाला, क्लब आदि चलाने वाले संचालक भी एक फॉर्म भरवा अपना पल्ला झाड़ लेते है, वहीं थाना भी आयोजक से एक फॉर्म भरवा कर अपना पल्ला झाड़ लेते है.

कहते हैं एसडीओ

सदर अनुमंडल पदाधिकारी कुमार अभिषेक ने बताया कि डीजे बजाने का नियम निर्धारित है. कितना डिसेबल होना चाहिए वह भी निर्धारित है. ताकि आम लोग इससे परेशान न हो. इसको लेकर थानों को भी निर्देश दिया गया है.

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By BIRENDRA KUMAR SING

BIRENDRA KUMAR SING is a contributor at Prabhat Khabar.

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