बीमारी से अधिक नियम मरीजों पर बन रहा भारी, पर्ची कटाने व जांच में बीत जा रहा आधा समय

मरीजों को इलाज कराने के लिये औसतन 42 मिनट का वेटिंग टाइम झेलना पड़ता है.

मुंगेर

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सरकार द्वारा साल 2024 में वैसे तो भव्या और आभा एप मरीजों को लंबी लाइनों में लगने, अपने मेडिकल रिर्पोट को पूरी तरह सुरक्षित रखने और इलाज में सुविधाओं को बढ़ाने के लिये लाया गया, लेकिन मुंगेर सदर अस्पताल में भव्या एप का नियम ही मरीजों के लिये बीमारी से अधिक मुसीबत बन रही है. हाल यह है कि अस्पताल के ओपीडी में चिकित्सक के पास पहुंचने से पहले ही मरीजों को पर्ची कटाने और वाइटल जांच के लिये लंबी लाइनों में जंग लड़नी पड़ती है. इसका अंदाजा केवल इसी बात से लगाया जा सकता है कि खुद स्वास्थ्य विभाग के रिर्पोट के अनुसार मरीजों को इलाज कराने के लिये औसतन 42 मिनट का वेटिंग टाइम झेलना पड़ता है.

पर्ची कटाने के लिये बीमारी नहीं एंड्रायड मोबाइल जरूरी

यदि आप सदर अस्पताल के ओपीडी में इलाज कराने पहुंच रहे है तो आपके पास बीमारी से अधिक एंड्रॉयड मोबाइल का होना जरूरी है, क्योंकि इसी एंड्रॉयड मोबाइल पर आभा एप के माध्यम से पर्ची कटनी है. हलांकि ओपीडी में अंदर आपको मोबाइल टावर भी सही से नहीं मिलेगा. जिससे आपको पहले तो ओटीपी के लिये ओपीडी के बाहर गेट पर खड़े होकर इंतजार करना होगा. वही मोबाइल पर रजिस्ट्रर्ड करने और ओटीपी आने के बाद ही आपका रजिस्ट्रेशन होगा और पर्ची काउंटर पर आपको यह पता चलेगा कि आपको किस चिकित्सक के पास जाना है.

वाइटल जांच कराना ही सबसे बड़ी जंग

ऐसा नहीं है कि केवल पर्ची कटाने के बाद आपके लिये इलाज कराना या चिकित्सक तक पहुंचना आसान होगा, क्योंकि इसके बाद आपको लंबी लाइन में लगकर वाइटल जांच अर्थात अपना हाइट, वजन, बीपी आदि जांच कराने के लिये जंग लड़ना होगा. इसके लिये लंबी लाइन में लगने के बाद आप अपना वाइटल जांच करा पायेंगे, क्योंकि बना वाइटल जांच कराये चिकित्सक आपका इलाज नहीं कर पायेंगे. हलांकि आप सुबह 9 बजे ओपीडी पहुंच भी जायेंगे तो वाइटल जांच काउंटर पारामेडिकल स्टूडेंट के भरोसे संचालित होने के कारण आपको 9.30 बजे तक इंतजार करना होगा.

खुद स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इलाज में लगते हैं 42 मिनट

सदर अस्पताल में मरीजों के लिये इलाज कराना कितना मुश्किल है. इसका अंदाजा केवल इसी बात से लगाया जा सकता है कि खुद स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार एक मरीज को ओपीडी में इलाज कराने के लिये औसतन 42 मिनट का समय लगता है. जिसे स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में औसतन वेटिंग टाइम और जर्नी टाइम कहा जाता है. फरवरी माह में स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े को देखें तो ओपीडी में इलाज कराने के लिये आने वाले मरीजों को पर्ची कटाने से लेकर चिकित्सक को दिखाने और दवा लेने के लिये कुल 42 मिनट का इंतजार करना पड़ता है.

कहते हैं सिविल सर्जन

सिविल सर्जन डॉ राजू ने बताया कि ओपीडी में मरीजों के औसतन इंतजार करने के समय को अधिकतम 30 मिनट तक रखने का निर्देश दिया गया है. इसके लिये समय-समय पर मॉनिटरिंग की जा रही है.

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By AMIT JHA

AMIT JHA is a contributor at Prabhat Khabar.

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