खास बातें
Arup Biswas TMC Minister Biography: पश्चिम बंगाल की राजनीति में अरूप विश्वास एक ऐसा चेहरा हैं, जिनके लिए कहा जाता है कि उनके जीवन में ‘तस्वीर’ ही सब कुछ है. काम की तस्वीर हो या खास मौकों की, अरूप विश्वास हमेशा फ्रेम में रहना पसंद करते हैं. 61 वर्षीय अरूप विश्वास का राजनीतिक सफर न्यू अलीपुर कॉलेज की छात्र राजनीति से शुरू होकर ममता कैबिनेट के सबसे भरोसेमंद स्तंभ तक पहुंच चुका है. टॉलीगंज विधानसभा सीट पर साल दर साल उनका दबदबा ऐसा है कि विरोधी भी उन्हें वहां का ‘स्थायी छात्र’ और ‘फर्स्ट बॉय’ मानने लगे हैं.
जब मेसी के साथ फोटो पड़ी भारी, छोड़ना पड़ा विभाग
अरूप विश्वास के जीवन में तस्वीरों का प्रेम कभी-कभी संकट भी लेकर आता है. दिसंबर के महीने में एक ऐसा ही ‘फोटो कांड’ चर्चा में रहा. फुटबॉल के जादूगर लियोनेल मेसी के साथ तस्वीर खिंचवाने के चक्कर में ऐसा विवाद खड़ा हुआ कि उन्हें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पत्र लिखकर अपने पसंदीदा खेल विभाग की जिम्मेदारी से हाथ धोना पड़ा.
बन गये टॉलीगंज के बेताज बादशाह
वर्ष 1998 में तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने के बाद उनकी तरक्की का लिफ्ट इतनी तेजी से ऊपर चढ़ा कि वह पार्षद से सीधे विधायक बन गये. वर्ष 2006 में चुनाव से महज 21 दिन पहले टिकट पाकर उन्होंने सिर्फ 526 वोटों से जीत दर्ज की थी, तब से आज तक वह टॉलीगंज के बेताज बादशाह बने हुए हैं.
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अभिमान और पद के लिए दोस्त से बंद कर दी बात
अरूप विश्वास के स्वभाव में एक मासूम जिद भी है. 2011 में जब बंगाल में परिवर्तन की सरकार आयी, तो मंत्रियों की लिस्ट में अरूप का नाम नहीं था. इससे वह इतने आहत हुए कि अपने जिगरी दोस्त फिरहाद हकीम (बॉबी) से बात करना बंद कर दिया. हालांकि, नौ महीने बाद मंत्रिमंडल विस्तार में उन्हें मंत्री बना दिया गया. कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी सौंपी गयी.
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दीदी के साथ चलने से बचने का खास प्रोजेक्ट
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पैदल चलना बेहद पसंद है, लेकिन अरूप विश्वास को पैदल चलने से परहेज रहा है. जिले के दौरों के दौरान जब मुख्यमंत्री उन्हें साथ टहलने के लिए बुलाती थीं, तो अरूप अक्सर अपने विभाग की मीटिंग का बहाना बना लेते थे. पार्टी में उनके इस पैंतरे को मजाक में ‘दीदी के बोलो ना’ प्रोजेक्ट कहा जाता है.
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Arup Biswas: बिगड़ैल ‘बीगल’ ने काटा, तो भागे अस्पताल
अरूप विश्वास कुंवारे हैं और हाल ही में उन्होंने अपने अकेलेपन को दूर करने के लिए एक ‘बीगल’ (कुत्ते की नस्ल) पाला है. यह छोटा कुत्ता काफी शरारती है. चुनाव प्रचार के दौरान जब वह उसे गोद में लेकर लाड कर रहे थे, तो उसने उन्हें खरोंच मार दी या काट लिया. उन्होंने कोई जोखिम नहीं लिया और तुरंत अपने निर्वाचन क्षेत्र के बांगुड़ अस्पताल जाकर इंजेक्शन लगवाया.
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साल भर ‘पढ़ाई’ करते हैं टॉलीगंज के ‘पक्के’ खिलाड़ी
मजे की बात है कि हर बात पर फोटो खिंचवाने वाले अरूप की अब तक अपने पालतू कुत्ते के साथ कोई तस्वीर सामने नहीं आयी है. टॉलीगंज के ‘पक्के’ खिलाड़ी अरूप विश्वास इस बार भी अपनी चुनावी परीक्षा की तैयारी में हैं. वह पूरे साल ‘पढ़ाई’ (जनसंपर्क) करते हैं, इसलिए उन्हें नतीजों का डर नहीं सताता.
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