चुनौतियों से भरा नये नगर आयुक्त का ताज, भ्रष्टाचार पर लगाम व बेहतर नागरिक सुविधा समय की मांग

कोतवाली थाना में प्राथमिकी दर्ज की गयी थी और कईयों को जेल तक जाना पड़ा.

By BIRENDRA KUMAR SING | January 16, 2026 7:33 PM

मुंगेर

नगर निगम में रहने वाले लोगों की तब उम्मीद काफी बढ़ जाती है, जब कोई नये आईएएस अधिकारी नगर आयुक्त के पद पर आसीन होते हैं. क्योंकि पिछले कुछ वर्षो से निगम की बागडोर संभालने वाले अधिकारियों के समक्ष चुनौतियां भी बढ़ी हैं. गुरुवार को 2022 बैच के आइएएस पार्थ गुप्ता ने मुंगेर नगर निगम के नये नगर आयुक्त का कार्यभार संभाला. इससे पूर्व वे पूर्णिया में एसडीएम के रूप में कार्य कर चुके हैं, जहां उन्होंने प्रशासनिक अनुभव और ज़मीनी समझ के साथ अपनी भूमिका निभाई. अब मुंगेर नगर निगम की व्यवस्था और मूलभूत सुविधाओं से जूझ रहे शहरवासियों को बेहतर नागरीय सुविधा उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी इनके कंधे पर है.

दागदार रहा है नगर निगम का दामन

निगम की बागडोर संभालने वाले अधिकारियों के समक्ष पिछले कुछ वर्षों में चुनौतियां काफी बढ़ गयी हैं. क्योंकि निगम में भ्रष्टाचार चरम पर है. ठेकेदारी प्रथा हावी है और विकास योजनाओं में बड़े पैमाने पर धांधली मची हुई है. वर्ष 2013 में हुए कूड़ा घोटाला का दाग निगम के माथे लगा था. 24 लाख 29 हजार 917 रूपये का कूड़ा मोटर साइकिल व स्कूटर पर ढुलाई कर दी गयी थी, हालांकि इस मामले में कोतवाली थाना में प्राथमिकी दर्ज की गयी थी और कईयों को जेल तक जाना पड़ा. जबक वित्तीय वर्ष 2022-23 में एस्टीमेट घोटाला हुआ था. जिसमें अच्छी और बेहतर सड़क को खराब बताते हुए निगम के योजना विभाग व अभियंता ने एस्टीमेट बना कर उसके निर्माण की निविदा निकाली थी. निगम के ई-टेंडरिंग आमंत्रण सूचना संख्या 12/ 2022-23 में हुए 56 ग्रुप के कार्य की निविदा में निगम प्रशासन ने शहर के ऐसे सड़क और नालों का एस्टीमेट बनाकर बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की थी जो सड़क व नाले दुरुस्त अवस्था में थे. इस मामले को लेकर पथ निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता के नेतृत्व में टीम ने जांच भी की थी. जिसके आधार पर यह पाया गया था कि कई ऐसे सड़कों का निर्माण किया जा रहा है जो बिलकुल दुरुस्त थी. कई ऐसे सड़कों की निविदा को रद्द भी किया गया था. इस मामले की जांच निगरानी विभाग पटना की टीम मुंगेर पहुंच कर की थी. वर्तमान समय में भी कई ऐसे सड़कें बनी है जो दो-तीन माह में ही उखड़ने लगी है. जो धरातल पर अब भी दिख रहा है. हालांकि पूर्व की नगर आयुक्त ने एक दो मामलों की जांच कर संवेदक का बिल रोकने का काम किया थी.

अतिक्रमण व मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराना होगा चुनौती

नगर निगम क्षेत्र के प्रत्येक नागरिक को बेहतर, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण नगरीय सुविधाएं उपलब्ध कराना नये नगर आयुक्त के लिए बड़ी चुनौती साबित होगी. क्योंकि मुंगेर शहर आज पुरी तरह से अतिक्रमण के मकड़जाल में फंसा हुआ है. जिसके कारण ट्रैफिक व्यवस्था जहां शहर में धवस्त है. पेयजलापूर्ति मुंगेर शहरवासियों के लिए कई दशकों से समस्या बनी हुई है. अमृत योजना के तहत अरबों रुपये से शहरी पेयजलापूर्ति योजना पूर्ण करने करते हुए निर्माण एजेंसी बुडको और काम करने वाली एजेंसी जेएमसी ने शहर में पानी की सप्लाई का दावा किया तो रहा है. लेकिन अधिकांश वार्ड आज भी पानी के लिए त्राहिमाम कर रही है. यहां सफाई व्यवस्था भी बदहाल है. एजेंसी को शहर की सफाई के लिए करोड़ों से अधिक राशि दी जाती है. लेकिन शहर में सफाई नदारत है. इतना ही नहीं शहर में यूरिनल नहीं है, खास कर महिलाओं को लिए. शौचालय का भी बुरा हाल है. आज तक यहां कचरा निष्पादन के लिए एमआरएफ सेंटर बनाने की योजना भी फाइलों में ही दम तोड़ रही है.

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